AIMIM नेता वारिस पठान ने ECI ज्ञानेश कुमार विवाद को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि ये किसी एक राजनीतिक पार्टी का मुद्दा नहीं है. ये विपक्ष या सत्ताधारी दल का मुद्दा भी नहीं है. ये तमाम देशवासियों का मुद्दा है क्योंकि यहां सीधे लोकतंत्र के ऊपर हमला हुआ है. मतदान का अधिकार बहुत ही महत्वपूर्ण अधिकार है जो संविधान ने हमें दिया है. उसे छीनने का पूरा प्रयास किया जा रहा है. उन्होंने ज्ञानेश कुमार से इस्तीफे की भी मांग की.
उन्होंने सवाल उठाया कि 13 करोड़ लोगों के नाम आप गायब कर देते हैं, क्यों? अगर केवल एक व्यक्ति आदेश देता है तो यह तानाशाही हो गई. दिसंबर 2023 में जब सदन में ये बिल आया था, जब बिल पर चर्चा करनी थी तो उस समय पूरा विपक्ष तो बाहर चला गया था. अगर पूरा विपक्ष वहां मौजूद होता और इस बिल का विरोध करता तो शायद ये नौबत नहीं आती.
आप किसी के वोट के अधिकार को नहीं छीन सकते- वारिस पठान
वारिस पठान ने आगे कहा, ”आप किसी का भी मताधिकार नहीं छीन सकते हैं. अगर मुख्य चुनाव आयुक्त ने इतनी बड़ी गड़बड़ी की है तो उसे निकाल दिया जाना चाहिए लेकिन भाजपा के प्रवक्ता उनके बचाव में बयान दे रहे हैं. वह तो अलग संस्थान है न?. सीईसी को संवाद करना चाहिए या तो पद को छोड़कर चले जाना चाहिए.”
क्या इसी तरह से धांधली चलते रहेगी- वारिस पठान
उन्होंने अखबार की रिपोर्ट का जिक्र करते हुए कहा कि चुनाव आयोग में दो अन्य इलेक्शन कमिश्नर ने बताया कि 10 महीने में 14 मर्तबा हमने ऑब्जेक्शन उठाए थे मगर हमारी बात का किसी ने संज्ञान ही नहीं लिया. ये तो डिक्टेटरशिप है. उन्होंने सवाल उठाया कि किसके बोलने से किसके इशारे पर किसके आदेश अनुसार सीईसी ऐसा कर रहे थे. क्या जिम्मेदारी तय नहीं होनी चाहिए, क्या इसी तरह से धांधली चलते रहेगी?
इस संस्था को भी आपने जेब में रख लिया- वारिस पठान
वारिस पठान ने कहा कि हमने आपने देखा कि वोट चोरी की वजह से कितनी जगह पर नुकसान उठाना पड़ा. उन्होंने केंद्र पर आरोप लगाते हुए कहा कि इस संस्था को भी आपने जेब में रख लिया. अब आप उनके बचाव में आ रहे हो. ये तो देश के सामने आ गया है कि किसके बोलने पर और किसके इशारे पर किसको फायदा पहुंचाने के लिए ये सब किया गया था.
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