चुनाव आयोग ने विवादों के बीच शनिवार को एक अहम बैठक की, जिसमें चीफ इलेक्शन कमिश्नर ज्ञानेश कुमार समेत दोनों चुनाव आयुक्त भी नजर आए. इस तस्वीर ने मौजूदा विवाद के बीच एक क्लियर मैसेज दिया. वहीं अब इसके बाद राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं आना शुरू हो गई हैं. इस मीटिंग को लेकर केंद्रीय मंत्री और एलजेपी (आर) के प्रमुख चिराग पासवान का बड़ा बयान सामने आया है.
चिराग पासवान ने अपने एक्स हैंडल पर लिखा, “जनता के मन में जब भी कोई सवाल या चिंता होती है, तो उसे सामने रखना और उसका स्पष्ट समाधान सुनिश्चित करना मेरा दायित्व है. यकीनन SIR को लेकर जनता की ओर से जो चिंताएं हमारे सामने आईं, उन्हें इसी जिम्मेदारी के साथ हमने चुनाव आयोग के समक्ष रखा था.”
चुनाव आयोग हर पहलू को स्पष्ट करे- चिराग पासवान
चिराग पासवान ने आगे लिखा, “हमारी अपेक्षा भी यही थी कि चुनाव आयोग उन चिंताओं को गंभीरता से लेते हुए हर पहलू को स्पष्ट करे. आज चुनाव आयोग ने बिंदुवार तरीके से सभी महत्वपूर्ण विषयों पर अपनी स्थिति स्पष्ट की है. SIR की प्रक्रिया, तीनों आयुक्तों की सर्वसम्मति और कैबिनेट सचिव से हुई बैठक से जुड़े तथ्यों को भी स्पष्ट रूप से सामने रखा गया है.”
उन्होंने यह भी लिखा, “यह स्पष्टता लोकतंत्र में जनता के विश्वास को और मजबूत करती है. लोकतंत्र में चुनाव आयोग की एक अहम भूमिका है, ऐसे में देश की जनता का विश्वास लोकतंत्र के प्रति और बढ़ा है.”
चुनाव आयोग ने बैठक में लिया ये फैसला
भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान नोटिस प्राप्त करने वाले मतदाताओं की सुविधा के लिए कई अहम फैसले लिए हैं. आयोग की शनिवार को हुई बैठक में तय किया गया कि अनमैप्ड और लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी के मामलों में नोटिस पाने वाले लोगों को सुनवाई के लिए ईआरओ-एईआरओ कार्यालय बुलाने की जरूरत नहीं होगी.
आयोग की बैठक 26 सितंबर को दोपहर तीन बजे हुई. बैठक में लिए गए फैसलों के अनुसार, ऐसे लोगों के घर जाकर बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) दस्तावेज एकत्र करेंगे और उन्हें ईसीआईनेट पर अपलोड करेंगे. इसके बाद संबंधित निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) दस्तावेजों के आधार पर फैसला करेंगे.
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