पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) की अध्यक्ष महबूबा मुफ़्ती ने लोगों से नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की है. उनके मुताबिक यह प्रदर्शन लोकतंत्र और वोटिंग अधिकारों की सुरक्षा, अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न और उनके पूजा-स्थलों पर बार-बार हो रहे हमलों के विरोध में आयोजित किया जा रहा है.
‘इंडियन मुस्लिम मॉनिटरिंग कमेटी’ की ओर से आयोजित यह प्रदर्शन मंगलवार (29 सितंबर 2026) को दोपहर 3 से 5 बजे के बीच जंतर-मंतर पर होगा. इस आंदोलन को अपना औपचारिक समर्थन देते हुए महबूबा मुफ़्ती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक वीडियो संदेश के जरिए लोगों से प्रदर्शन में शामिल होकर मुल्क के भाईचारे और गंगा जमुनी तहजीब को बचाने में मदद की अपील की है.
An appeal to every Indian who cherishes the democratic and
secular values that bind our diverse nation together. Let us come together and raise our voices for the India we believe in.
Join us at Delhi’s Jantar Mantar on 29 September, from 2–5 PM. pic.twitter.com/LqrMgWgiZ3— Mehbooba Mufti (@MehboobaMufti) September 26, 2026
संविधान के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप की रक्षा हम सबकी जिम्मेदारी- महबूबा मुफ्ती
उन्होंने सिविल सोसाइटी, राजनीतिक कार्यकर्ताओं और आम जनता से बड़ी संख्या में जुटने का आग्रह किया. महबूबा मुफ्ती ने अपने बयान में जोर दिया कि संविधान के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप की रक्षा करना और हाशिए पर मौजूद समुदायों का बचाव करना हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है. उन्होंने वोटर लिस्ट से मुसलमानों के नाम हटाने का भी जिक्र किया.
अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर एकजुट होने की अपील
यह प्रदर्शन कथित रूप से संवैधानिक आजादी के बढ़ते उल्लंघन और अल्पसंख्यकों के पूजा-स्थलों पर बार-बार हो रहे हमलों के विरोध में आयोजित किया जा रहा है. इस व्यापक अभियान का मकसद लोकतांत्रिक अधिकारों की सुरक्षा, अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और ‘डेमोलिशन पॉलिटिक्स’ (तोड़-फोड़ की राजनीति) जैसी चुनिंदा प्रशासनिक कार्रवाइयों को खत्म करने जैसे मुद्दों को उजागर करना है.
यह आयोजन दिल्ली पुलिस के हालिया कदम के बाद हो रहा है, जिसने सितंबर के मध्य में अल्पसंख्यक अधिकार अभियान के एक अलग चरण के लिए अनुमति देने से इनकार कर दिया था. आयोजकों का कहना है कि शांतिपूर्ण ढंग से इकट्ठा होने का उनका लोकतांत्रिक अधिकार है. 29 सितंबर को दिल्ली में होने वाला यह जमावड़ा पूरे भारत के क्षेत्रीय नेताओं के लिए एक अहम केंद्र बिंदु होगा, जो संवैधानिक सुरक्षा उपायों के कमजोर होने को उजागर करेगा और देश भर में धर्मनिरपेक्ष मूल्यों और अभिव्यक्ति की आजादी की रक्षा की मांग करेगा.
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