दिल्ली यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले लाखों छात्रों के लिए एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर है. अब डीयू से पढ़ाई पूरी करने के बाद छात्रों को अपनी डिग्री सर्टिफिकेट के लिए सालों-साल लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा. यूनिवर्सिटी प्रशासन एक ऐसी नई व्यवस्था पर काम कर रहा है, जिससे छात्रों को उनकी पढ़ाई पूरी होते ही बहुत जल्द और आसानी से डिग्री मिल जाएगी. इस बड़े कदम से उन छात्रों को सबसे ज्यादा फायदा होगा जो आगे की पढ़ाई या नौकरी के लिए विदेश जाना चाहते हैं या जिन्हें तुरंत डिग्री की जरूरत होती है.
दरअसल, अब तक छात्रों को कोर्स पूरा होने के बाद भी अपनी मुख्य डिग्री पाने के लिए महीनों या कभी-कभी सालों तक चक्कर काटने पड़ते थे. प्रोविजनल सर्टिफिकेट से काम चलाना पड़ता था, लेकिन अब डीयू इस पूरी प्रक्रिया को आसान और तेज बनाने की तैयारी में है. नए नियमों और व्यवस्था के तहत, जैसे ही छात्र का फाइनल रिजल्ट आएगा और दीक्षांत समारोह पूरा होगा, उसके कुछ ही समय के भीतर छात्रों के हाथों में उनकी ओरिजिनल डिग्री थमा दी जाएगी. यूनिवर्सिटी प्रशासन का मानना है कि टेक्नोलॉजी और बेहतर तालमेल की मदद से इस काम को समय पर पूरा किया जा सकता है.
डिजिटल माध्यम से भी मिलेगी मदद
इस प्रक्रिया को तेज करने के लिए दिल्ली यूनिवर्सिटी डिजिटल सिस्टम और स्टूडेंट पोर्टल का भी सहारा ले रही है. छात्र अपने पोर्टल पर जाकर आसानी से आवेदन कर सकेंगे. इसके अलावा नेशनल एकेडमिक डिपॉजिटरी NAD और डिजिलॉकर Digilocker जैसे प्लेटफॉर्म के जरिए भी डिग्री को सुरक्षित और तुरंत उपलब्ध कराने की कोशिशें तेज की गई हैं. इससे छात्रों को वेरिफिकेशन के लिए भी परेशान नहीं होना पड़ेगा.
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लाखों छात्रों को मिलेगी बड़ी राहत
डीयू के इस फैसले से रेगुलर कॉलेजों के साथ-साथ स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग और नॉन-कॉलेजिएट विमेंस एजुकेशन बोर्ड के छात्रों को भी बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है. अक्सर देखा जाता है कि फाइनल ईयर के बाद छात्रों को नौकरी के जॉइनिंग लेटर मिल जाते हैं या बड़े संस्थानों में दाखिला मिल जाता है, लेकिन ओरिजिनल डिग्री न होने की वजह से उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था. डीयू के इस नए कदम से छात्रों का यह मानसिक तनाव पूरी तरह खत्म हो जाएगा.
NEP के तहत मिल रहे कई विकल्प
आपको बता दें कि दिल्ली यूनिवर्सिटी में नई शिक्षा नीति NEP के तहत छात्रों को पढ़ाई के बीच में भी कई तरह के विकल्प दिए जा रहे हैं. अगर कोई छात्र किसी कारण से 1 साल में पढ़ाई छोड़ता है तो उसे सर्टिफिकेट मिलता है. 2 साल पूरे करने पर डिप्लोमा और 3 या 4 साल की पढ़ाई पूरी करने पर पूरी डिग्री दी जाती है. अब इस पूरी व्यवस्था को और मजबूत करते हुए यूनिवर्सिटी यह सुनिश्चित कर रही है कि छात्रों की मेहनत का फल यानी उनकी डिग्री उन्हें बिना किसी देरी के मिल सके.
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