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कौन है IPS आदित्य मिश्रा? जिनके तबादले से भावुक हुए बालाघाट के लोग


आईपीएस आदित्य मिश्रा को उनके सख्त प्रशासनिक रवैया अपराधियों में खौफ और जनता के बीच जुड़ाव के लिए जाना जाता है. बालाघाट में एसपी के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कई बड़े अभियानों को सफलतापूर्वक अंजाम दिया.  उन्होंने बालाघाट में रहते हुए भारत को 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद मुक्त बनाने के अभियान में बहुत अहम और निर्णायक भूमिका निभाई. वहीं बालाघाट के चर्चित डबल मनी मामले में भी उन्होंने पुलिसिंग की एक ऐसी मिसाल पेश की, जिसकी पूरे राज्य में सराहना हुई.

आईपीएस आदित्य मिश्रा को उनके सख्त प्रशासनिक रवैया अपराधियों में खौफ और जनता के बीच जुड़ाव के लिए जाना जाता है. बालाघाट में एसपी के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कई बड़े अभियानों को सफलतापूर्वक अंजाम दिया.  उन्होंने बालाघाट में रहते हुए भारत को 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद मुक्त बनाने के अभियान में बहुत अहम और निर्णायक भूमिका निभाई. वहीं बालाघाट के चर्चित डबल मनी मामले में भी उन्होंने पुलिसिंग की एक ऐसी मिसाल पेश की, जिसकी पूरे राज्य में सराहना हुई.

इसके अलावा 2025 में उनके नेतृत्व में नो हेलमेट नो ड्राइव अभियान शुरू किया गया था. इस दौरान नियमों की सख्ती का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक बार एक पूर्व विधायक भी बिना हेलमेट वाहन चलाते पकड़े गए थे. जिन पर 2300 का चालान किया गया था और चालान राशि जमा न करने पर उनकी बाइक तक थाने में जब्त कर ली गई थी.

इसके अलावा 2025 में उनके नेतृत्व में नो हेलमेट नो ड्राइव अभियान शुरू किया गया था. इस दौरान नियमों की सख्ती का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक बार एक पूर्व विधायक भी बिना हेलमेट वाहन चलाते पकड़े गए थे. जिन पर 2300 का चालान किया गया था और चालान राशि जमा न करने पर उनकी बाइक तक थाने में जब्त कर ली गई थी.

वहीं भारतीय पुलिस सेवा में आने के बाद से आदित्य मिश्रा ने मध्य प्रदेश के कई जिलों में महत्वपूर्ण पदों पर अपनी सेवाएं दी. इंदौर में उन्होंने ट्रेनी एएसपी के रूप में शुरुआत की. इसके बाद बालाघाट में एएसपी (बैहर) और एएसपी (नक्सल ऑपरेशन) की जिम्मेदारी संभाली. वहीं राजगढ़ जिले में पुलिस अधीक्षक के रूप में कार्यकाल संभाला. इसके बाद बालाघाट में एसपी के पद पर लंबे समय तक सेवाएं दी, अब 27 अक्टूबर 2026 को प्रशासनिक आदेश के तहत उन्हें देवास जिले के एसपी की नई कमान सौंपी गई.

वहीं भारतीय पुलिस सेवा में आने के बाद से आदित्य मिश्रा ने मध्य प्रदेश के कई जिलों में महत्वपूर्ण पदों पर अपनी सेवाएं दी. इंदौर में उन्होंने ट्रेनी एएसपी के रूप में शुरुआत की. इसके बाद बालाघाट में एएसपी (बैहर) और एएसपी (नक्सल ऑपरेशन) की जिम्मेदारी संभाली. वहीं राजगढ़ जिले में पुलिस अधीक्षक के रूप में कार्यकाल संभाला. इसके बाद बालाघाट में एसपी के पद पर लंबे समय तक सेवाएं दी, अब 27 अक्टूबर 2026 को प्रशासनिक आदेश के तहत उन्हें देवास जिले के एसपी की नई कमान सौंपी गई.

आदित्य मिश्रा 2018 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं. आदित्य मिश्रा मध्य प्रदेश कैडर के पुलिस अधिकारी हैं. कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार आदित्य मिश्रा ने भोपाल के कैंपियन स्कूल से पढ़ाई की और फिर एमएनआईटी भोपाल से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक किया.

आदित्य मिश्रा 2018 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं. आदित्य मिश्रा मध्य प्रदेश कैडर के पुलिस अधिकारी हैं. कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार आदित्य मिश्रा ने भोपाल के कैंपियन स्कूल से पढ़ाई की और फिर एमएनआईटी भोपाल से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक किया.

आदित्य मिश्रा ने एक इंटरव्यू में बताया था कि उन्होंने कभी भी सिविल सेवा में जाने के बारे में नहीं सोचा, वह अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद कॉरपोरेट में नौकरी के लिए सोच रहे थे. लेकिन नौकरी के इंटरव्यू के कुछ समय पहले ही उन्हें एहसास हुआ कि उन्हें सिविल सेवा के लिए एक बार प्रयास करना चाहिए. इसके बाद उन्होंने सिविल सेवा की तैयारी के लिए वह दिल्ली गए.

आदित्य मिश्रा ने एक इंटरव्यू में बताया था कि उन्होंने कभी भी सिविल सेवा में जाने के बारे में नहीं सोचा, वह अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद कॉरपोरेट में नौकरी के लिए सोच रहे थे. लेकिन नौकरी के इंटरव्यू के कुछ समय पहले ही उन्हें एहसास हुआ कि उन्हें सिविल सेवा के लिए एक बार प्रयास करना चाहिए. इसके बाद उन्होंने सिविल सेवा की तैयारी के लिए वह दिल्ली गए.

आदित्य बताते हैं कि उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा तीसरी बार में पास की. पहले दो प्रयासों में वह आईपीएस नहीं बन पाए, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और अपने तीसरी प्रयास में ज्यादा मेहनत की और आखिर उन्हें वर्दी मिल गई. वह कहते हैं कि उन्होंने आईपीएस की तैयारी में एक बात सीखी वह यह है कि इस परीक्षा में सबसे ज्यादा जरूरी हार्ड वर्क होता है.

आदित्य बताते हैं कि उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा तीसरी बार में पास की. पहले दो प्रयासों में वह आईपीएस नहीं बन पाए, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और अपने तीसरी प्रयास में ज्यादा मेहनत की और आखिर उन्हें वर्दी मिल गई. वह कहते हैं कि उन्होंने आईपीएस की तैयारी में एक बात सीखी वह यह है कि इस परीक्षा में सबसे ज्यादा जरूरी हार्ड वर्क होता है.

Published at : 29 Oct 2026 06:40 PM (IST)

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