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दुनिया के टॉप 25 बिजनेस स्कूल में भारत के 4 संस्थान, इन कॉलेजों ने बनाई जगह


इस रैंकिंग में मैनेजमेंट डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट गुरुग्राम को 18वीं और इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट टेक्नोलॉजी गाजियाबाद को 25वीं रैंक मिली. यह नतीजे बताते हैं कि भारतीय बिजनेस स्कूल में तैयार किए गए केस स्टडीज का इस्तेमाल दुनिया के अलग-अलग देश में मैनेजमेंट की पढ़ाई के लिए किया जा रहा है.

इस रैंकिंग में मैनेजमेंट डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट गुरुग्राम को 18वीं और इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट टेक्नोलॉजी गाजियाबाद को 25वीं रैंक मिली. यह नतीजे बताते हैं कि भारतीय बिजनेस स्कूल में तैयार किए गए केस स्टडीज का इस्तेमाल दुनिया के अलग-अलग देश में मैनेजमेंट की पढ़ाई के लिए किया जा रहा है.

फाइनेंशियल टाइम्स की 2026 की रैंकिंग में टीचिंग केस कैटेगरी के तहत चार भारतीय संस्थानों को जगह मिली. इनमें IIM बेंगलुरु को 11वीं रैंक, SPJIMR को 15वीं रैंक, MDI गुरुग्राम को 18वीं रैंक और IMT गाजियाबाद को 25वीं रैंक मिली.

फाइनेंशियल टाइम्स की 2026 की रैंकिंग में टीचिंग केस कैटेगरी के तहत चार भारतीय संस्थानों को जगह मिली. इनमें IIM बेंगलुरु को 11वीं रैंक, SPJIMR को 15वीं रैंक, MDI गुरुग्राम को 18वीं रैंक और IMT गाजियाबाद को 25वीं रैंक मिली.

टीचिंग केस स्टडी ऐसी रिसर्च सामग्री होती है, जिसमें किसी वास्तविक कारोबारी स्थिति, समस्या चुनौती को सामने रखा जाता है. इसके जरिए छात्रों को यह समझने का मौका मिलता है कि कंपनियां और उसके प्रबंधन से जुड़े लोग अलग-अलग परिस्थितियों में फैसले कैसे लेते हैं.

टीचिंग केस स्टडी ऐसी रिसर्च सामग्री होती है, जिसमें किसी वास्तविक कारोबारी स्थिति, समस्या चुनौती को सामने रखा जाता है. इसके जरिए छात्रों को यह समझने का मौका मिलता है कि कंपनियां और उसके प्रबंधन से जुड़े लोग अलग-अलग परिस्थितियों में फैसले कैसे लेते हैं.

इन केस स्टडीज में रणनीति बनाने, मार्केटिंग, फाइनेंस, ऑपरेशन और लीडरशिप जैसे विषय शामिल हो सकते हैं. छात्र दिए गए मामलों का विश्लेषण करते हैं और जानकारी के आधार पर संभावित फैसलों पर विचार करते हैं. इससे उन्हें मैनेजमेंट से जुड़े सवालों को व्यवहारिक नजरिए से समझने में मदद मिलती है. फाइनेंशियल टाइम्स की इस कैटेगरी में यह देखा जाता है कि बिजनेस स्कूल के तैयार किए गए केस कितने संस्थानों तक पहुंच रहे हैं और उनका इस्तेमाल कितने व्यापक स्तर पर हो रहा है.

इन केस स्टडीज में रणनीति बनाने, मार्केटिंग, फाइनेंस, ऑपरेशन और लीडरशिप जैसे विषय शामिल हो सकते हैं. छात्र दिए गए मामलों का विश्लेषण करते हैं और जानकारी के आधार पर संभावित फैसलों पर विचार करते हैं. इससे उन्हें मैनेजमेंट से जुड़े सवालों को व्यवहारिक नजरिए से समझने में मदद मिलती है. फाइनेंशियल टाइम्स की इस कैटेगरी में यह देखा जाता है कि बिजनेस स्कूल के तैयार किए गए केस कितने संस्थानों तक पहुंच रहे हैं और उनका इस्तेमाल कितने व्यापक स्तर पर हो रहा है.

आईआईएम बेंगलुरु की ओर से शेयर की गई जानकारी के अनुसार 2024 और 2025 के दौरान संस्थान की टीचिंग केस स्टडीज का इस्तेमाल करीब 50 देशों के लगभग 680 उच्च शिक्षा संस्थानों में किया गया. इनके उपयोगकर्ताओं में शैक्षणिक संस्थान, शिक्षक, छात्र, कंपनी और पेशेवर शामिल थे.

आईआईएम बेंगलुरु की ओर से शेयर की गई जानकारी के अनुसार 2024 और 2025 के दौरान संस्थान की टीचिंग केस स्टडीज का इस्तेमाल करीब 50 देशों के लगभग 680 उच्च शिक्षा संस्थानों में किया गया. इनके उपयोगकर्ताओं में शैक्षणिक संस्थान, शिक्षक, छात्र, कंपनी और पेशेवर शामिल थे.

संस्थान ने 2024 और 2025 में हार्वर्ड बिजनेस इंपैक्ट के माध्यम से 26 केस प्रकाशित किए. इन केस की बिक्री 2024 में 1,40,457 थी, जो 2025 में बढ़कर 1,84,879 हो गई. इस तरह बिक्री में करीब 32% की बढ़ोतरी दर्ज की गई. वहीं आईआईएम बेंगलुरु के केस स्टडीज की अंतरराष्ट्रीय पहुंच और उनके इस्तेमाल से जुड़े आंकड़े भी इस रैंकिंग में संस्थान की स्थिति को समझने में मदद करते हैं.

संस्थान ने 2024 और 2025 में हार्वर्ड बिजनेस इंपैक्ट के माध्यम से 26 केस प्रकाशित किए. इन केस की बिक्री 2024 में 1,40,457 थी, जो 2025 में बढ़कर 1,84,879 हो गई. इस तरह बिक्री में करीब 32% की बढ़ोतरी दर्ज की गई. वहीं आईआईएम बेंगलुरु के केस स्टडीज की अंतरराष्ट्रीय पहुंच और उनके इस्तेमाल से जुड़े आंकड़े भी इस रैंकिंग में संस्थान की स्थिति को समझने में मदद करते हैं.

वहीं टीचिंग केस की अंतरराष्ट्रीय पहुंच से पता चलता है कि भारतीय संस्थानों में तैयार की गई अध्ययन सामग्री का इस्तेमाल दूसरे देशों में भी मैनेजमेंट की पढ़ाई के दौरान हो रहा है. भारतीय कंपनियां, उद्यमियों और सार्वजनिक क्षेत्र से जुड़े मामलों पर तैयार केस स्टडीज के जरिए विदेशों में पढ़ने वाले छात्रों को भारत के कारोबारी माहौल और प्रबंधन से जुड़ी चुनौतियों को समझने का अवसर मिल सकता है.

वहीं टीचिंग केस की अंतरराष्ट्रीय पहुंच से पता चलता है कि भारतीय संस्थानों में तैयार की गई अध्ययन सामग्री का इस्तेमाल दूसरे देशों में भी मैनेजमेंट की पढ़ाई के दौरान हो रहा है. भारतीय कंपनियां, उद्यमियों और सार्वजनिक क्षेत्र से जुड़े मामलों पर तैयार केस स्टडीज के जरिए विदेशों में पढ़ने वाले छात्रों को भारत के कारोबारी माहौल और प्रबंधन से जुड़ी चुनौतियों को समझने का अवसर मिल सकता है.

Published at : 10 Oct 2026 08:14 PM (IST)

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