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खुदरा व थोक महंगाई दर में कमी आई


खाद्य कीमतों में गिरावट और ज्यादा आधार के असर के कारण मार्च में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) पर आधारित महंगाई दर घटकर 3.34 प्रतिशत पर आ गई है, जो अगस्त 2019 के बाद का निचला स्तर है। इससे भारतीय रिजर्व…


The delicate balance between growth and inflation

The delicate balance between growth and inflation

खाद्य कीमतों में गिरावट और ज्यादा आधार के असर के कारण मार्च में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) पर आधारित महंगाई दर घटकर 3.34 प्रतिशत पर आ गई है, जो अगस्त 2019 के बाद का निचला स्तर है। इससे भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा रीपो रेट कम किए जाने की उम्मीद बढ़ गई है।  

सांख्यिकी मंत्रालय की ओर से मंगलवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक प्रमुख खुदरा महंगाई मार्च में करीब 6 साल के निचले स्तर पर पहुंच गई है, जो फरवरी में 3.61 प्रतिशत थी। महंगाई दर लगातार दूसरे महीने में रिजर्व बैंक के मध्यावधि लक्ष्य से कम बनी रही। इसके पहले अगस्त 2019 में प्रमुख खुदरा महंगाई दर 3.28 प्रतिशत थी। वहीं वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की ओर से मंगलवार को जारी आंकड़ों से पता चलता है कि भारत की थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) पर आधारित महंगाई दर भी मार्च में कम होकर 6 महीने के निचले स्तर 2.05 प्रतिशत पर आ गई है।  यह फरवरी में 2.86 प्रतिशत थी। खाद्य कीमतों में कमी के कारण ऐसा हुआ है, हालांकि विनिर्मित उत्पादों और ईंधन की कीमत में क्रमिक आधार पर वृद्धि हुई है।

आंकड़ों से पता चलता है कि खुदरा महंगाई में मार्च में खाद्य महंगाई सबसे तेजी से गिरकर 2.69 प्रतिशत पर आ गई, जो फरवरी में 3.75 प्रतिशत थी। मोटे अनाज (5.93 प्रतिशत), मांस (0.32 प्रतिशत) और दूध (2.56 प्रतिशत) की महंगाई कम हुई है। इसके अलावा सब्जियों (-7.04 प्रतिशत), दालों (-2.73 प्रतिशत) और अंडों (-3.16 प्रतिशत) की कीमत माह के दौरान संकुचन के क्षेत्र में रही। 

 हालांकि तेल और फैट  (17.07 प्रतिशत), फलों (16.27 प्रतिशत) और चीनी (3.89 प्रतिशत) की कीमत माह के दौरान बढ़ी है।

मार्च में सबसे महंगी होने वाली वस्तुओं में नारियल तेल (56.81 प्रतिशत), नारियल (42.05 प्रतिशत), सोना (34.09 प्रतिशत), चांदी (31.57 प्रतिशत) और अंगूर (25.55 प्रतिशत) शामिल हैं। इसके विपरीत कम महंगाई दर वाली वस्तुओं में अदरक (-38.11 प्रतिशत), जीरा (-25.86 प्रतिशत) और लहसुन (-25.22 प्रतिशत) शामिल हैं।  इक्रा में मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा कि मौद्रिक सख्ती किए जाने की उम्मीद बनी है और मौद्रिक नीति समिति की अगली 3 बैठकों में इसमें 50 आधार अंक की कमी की जा सकती है। महंगाई दर के अगले आंकड़े भी 4 प्रतिशत से नीचे रहने की उम्मीद है। 

उन्होंने आगे कहा, ‘आने वाले दिनों में तापमान बढ़ने से खराब होने वाले सामान की कीमत बढ़ सकती है। वहीं शुरुआती अनुमान में मॉनसूनी बारिश सामान्य से अधिक होने की संभावना है। बारिश का वक्त और उसके वितरण की कृषि उत्पादन में अहम भूमिका होगी।’

केयर रेटिंग्स में मुख्य अर्थशास्त्री रजनी सिन्हा ने कहा कि रिजर्व बैंक की दरों में कटौती का चक्र अधिक तीव्र  होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है, अगर वैश्विक व्यापार की अनिश्तितताएं वृद्धि पर असर नहीं डालती हैं। वित्त वर्ष 2026 में नीतिगत दर में 50 आधार अंक और कटौती किए जाने की संभावना है। 

उन्होंने कहा, ‘डॉलर सूचकांक में हालिया नरमी तथा फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में और कटौती की उम्मीदों के कारण रिजर्व बैंक नीतिगत दरों में और कटौती करने की बेहतर स्थिति में है।’इस माह की शुरुआत में 6 सदस्यों वाली मौद्रिक नीति समिति ने एक स्वर से नीतिगत रीपो दर में 25 आधार अंक और कटौती करने का फैसला किया, जिससे रीपो दर 6 प्रतिशत हो गया है। वहीं रुख समावेशी कर दिया है, जिससे कि आने वाले महीनों में दर में और कटौती की संभावना बनी है। रिजर्व बैंक ने वित्त वर्ष 2026 के लिए खुदरा महंगाई का अनुमान भी 4.2 प्रतिशत से घटाकर 4 प्रतिशत कर दिया है। 

समीक्षा बैठक के बाद संवाददाता सम्मेलन में रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि खाद्य महंगाई का परिदृश्य बहुत सकारात्मक है और रबी की फसल की अनिश्चितता काफी कम हो गई है।

 हालांकि मुख्य महंगाई दर, जिसमें खाद्य वस्तुएं और ईंधन शामिल नहीं हैं, महीने के दौरान थोड़ी बढ़ी है। हालांकि यह अभी भी यह कम स्तर (लगभग 4 प्रतिशत) पर बनी रही, क्योंकि आवास (3.03 प्रतिशत) और स्वास्थ्य (4.26 प्रतिशत), परिवहन (3.3 प्रतिशत) और पर्सनल केयर (13.5 प्रतिशत) जैसी सेवाओं की कीमतों में महीने के दौरान तेजी आई है। 

आंकड़ों से पता चलता है कि थोक महंगाई दर, जिसमें विनिर्मित उत्पादों की श्रेणी की हिस्सेदारी 64.2 प्रतिशत है, मार्च में 3.07 प्रतिशत रही, जो फरवरी में 2.86 प्रतिशत थी।  विनिर्मित वस्तुओं में अपैरल (1.98 प्रतिशत), चमड़े के उत्पाद (2.02 प्रतिशत) कागज के उत्पाद (2.39 प्रतिशत) और फॉर्मास्यूटिकल्स (1.26 प्रतिशत) व अन्य की कीमत बढ़ी है। 

 इसी तरह से ईंधन और बिजली की कीमत भी मार्च में बढ़कर 0.2 प्रतिशत हुई है, जो फरवरी में -0.71 प्रतिशत थी। पेट्रोल (-3.86 प्रतिशत) और हाई स्पीड डीजल (-2.28 प्रतिशत) की कीमतों में अवस्फीति के कारण ऐसा हुआ है।



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