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आइजेनकोट बनेंगे इजरायल के नए PM? अरब पार्टियों का समर्थन लेकिन फंसा बड़ा पेच!


इजरायल में अगली सरकार किसकी बनेगी, इसकी तस्वीर दो दिन बाद साफ हो जाएगी. इजरायली राष्ट्रपति इसहाक हर्जोग रविवार (8 नवंबर) को ऐलान करेंगे कि  वह नई सरकार बनाने का जिम्मा किसे सौंपेंगे. विपक्ष के गादी आइजेनकोट को प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की जगह लेने के लिए बड़ी संख्या में सिफारिशें मिली हैं. गुरुवार को राष्ट्रपति इसहाक हर्जोग के साथ हुई बातचीत की प्रक्रिया के दौरान अरब दलों ने आइजेनकोट का समर्थन किया है.

120 सदस्यीय नेसेट (इजराइली संसद) में नेतन्याहू के गठबंधन को 53 सीट पर जीत मिली थी, जबकि आइजेनकोट के गठबंधन को 48 सीट पर जीत हासिल हुई थी. वहीं, अरब दलों ने रिकॉर्ड 19 सीट जीतकर सरकार गठन में अहम भूमिका हासिल कर ली है.

19 सीटें जीतकर अरब दल बने ‘किंग मेकर’

चुनाव के बाद राजनीतिक गतिरोध के बीच अरब दलों ने आइजेनकोट के समर्थन की घोषणा की है. अगर आइसेनकोट का विपक्ष उनके साथ मिलकर काम करने के लिए तैयार होता है वे किंगमेकर की भूमिका निभा सकते हैं. हालांकि अभी यह साफ नहीं है कि ऐसा होगा या नहीं.

कहां फंसा पेंच

आइजेनकोट के गठबंधन में शामिल एक दक्षिणपंथी पार्टी इजराइल बेइतेनु ने साफ कह दिया है कि वह ऐसी किसी सरकार में शामिल नहीं होगी जो अरब पार्टियों के समर्थन पर टिकी हो. पार्टी प्रमुख अविगडोर लिबरमैन ने इसकी वजह बताते हुए कहा कि अरब पार्टियों ने हमास को खुले तौर पर ‘आतंकवादी संगठन’ मानने से इनकार कर दिया है. हालांकि, अरब पार्टियों ने 7 अक्तूबर 2023 को इजरायल पर हुए हमास के हमले की कई बार निंदा की है.

उधर, नेतन्याहू के लंबे समय तक सहयोगी दल रहे यूनाइटेड तोराह जुडैज्म ने इस बार राष्ट्रपति हर्जोग से मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री पद के लिए नेतन्याहू के नाम की सिफारिश नहीं की. हालांकि, उसने ऐज़ेनकोट का भी समर्थन नहीं किया है. इसे नेतन्याहू के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है. यूनाइटेड तोराह जुडाइज्म ने सात सीटें जीती हैं.

बहुमत के लिए 61 सीटें जरूरी

चुनाव में न तो नेतन्याहू के गठबंधन और न ही आइजेनकोट के खेमे को नेसेट में बहुमत के लिए जरूरी 61 सीटें मिली हैं. चुनाव का रिजल्ट आने के बाद राष्ट्रपति हर्जोग ने बुधवार को नेसेट में सीट जीतने वाले राजनीतिक दलों के साथ बातचीत शुरू की थी. इजरायल के राष्ट्रपति आमतौर पर उस सांसद को सरकार बनाने की जिम्मेदारी सौंपते हैं, जिसके बारे में उन्हें लगता है कि उसके पास सरकार बनाने की सबसे अच्छी संभावना है.

इस फैसले में विचार-विमर्श के दौरान राजनीतिक दलों की ओर से दिए गए समर्थन को भी ध्यान में रखा जाता है. इस पूरी प्रक्रिया का सीधा प्रसारण किया जाता है. सरकार बनाने की जिम्मेदारी पाने वाले नेता को गठबंधन तैयार करने के लिए 28 दिन का समय मिलता है. अगर राष्ट्रपति को लगता है कि सरकार बनने की उचित संभावना है, तो वह अपने विवेक से इस अवधि को 14 दिन और बढ़ा सकते हैं.



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