एनसीईआरटी की कक्षा 9वीं की नई सोशल साइंस के किताब जारी कर दी गई है. वहीं इस किताब में कई इतिहास से जुड़े अलग-अलग दौर के हिस्सों को जगह दी गई है. ऐसे में नई सोशल साइंस की किताब में सेंगोल को भी जगह दी गई है. किताब में सेंगोल को शासन और सुशासन से जुड़े सांस्कृतिक प्रतीक के तौर पर समझाया है. इसके साथ ही इसके इतिहास को चोल राजवंश के दौर से जोड़ा गया है. सेंगोल का जिक्र उस अध्याय में किया गया है, जिसमें शासन व्यवस्था और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों को समझाया गया है. कक्षा 9 की किताब का नाम Understanding Society-India and Beyond, Social Science Textbook for Grade 9, पार्ट 2 है. इसे शैक्षणिक स्तर की शुरुआत के करीब 6 महीने बाद जारी किया गया है. इससे पहले इस किताब का पहला भाग जून में जारी किया गया था.
किताब में बताया गया है कि सेंगोल को साल 2023 में नए संसद भवन में स्थापित किया गया था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 28 मई 2023 को नए संसद भवन के उद्घाटन के दौरान इसे लोकसभा अध्यक्ष के आसन के पास एक कांच के केस में स्थापित किया गया था. एनसीईआरटी की किताब में सेंगोल को शासन और अच्छे प्रशासन से जुड़े प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया गया है. इसमें बताया गया है कि सेंगोल को धर्म सम्मत शासन के प्रति के तौर पर इस्तेमाल करने की परंपरा 1000 साल से भी ज्यादा पुरानी मानी जाती है और इसका संबंध से चोल काल से जोड़ा गया है.
आजादी के समय सत्ता हस्तांतरण से भी जोड़ा
इस किताब के अध्याय में सेंगोल का संबंध 1947 में भारत की आजादी के समय सत्ता हस्तांतरण से भी बताया गया है. इसमें लिखा है कि 15 अगस्त 1947 की आधी रात आजादी के मौके पर तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को तमिलनाडु की आदीनम परंपरा से जुड़े संतों की ओर से सेंगोल दिया गया था. 2023 में नए संसद भवन के उद्घाटन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सेंगोल को 1947 में सत्ता हस्तांतरण का प्रतीक बताया था. उन्होंने कहा था कि यह प्रक्रिया राजाजी और आदीनम परंपरा के मार्गदर्शन में पूरी हुई है. हालांकि इस दावे को लेकर कांग्रेस की ओर से सवाल उठाए जाते रहे हैं. पार्टी का कहना है कि लॉर्ड माउंटबेटन, सी राजगोपालाचारी और जवाहरलाल नेहरू की ओर से सेंगोल को ब्रिटिश शासन से भारत को सत्ता हस्तांतरण का प्रतीक बताए जाने का कोई डॉक्यूमेंट प्रमाण नहीं है.
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तमिल परंपरा और शासन व्यवस्था से जुड़ा प्रतीक
संस्कृति मंत्रालय के अनुसार सेंगोल प्राचीन तमिल सभ्यता की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ा राजदंड है. तमिल राजाओं के राज्याभिषेक से जुड़ी परंपराओं में इसका इस्तेमाल होता था. मंत्रालय ने इसे केवल एक औपचारिक वस्तु नहीं, बल्कि शासन की नैतिक जिम्मेदारियां से जुड़े प्रतीक के रूप में बताया है. मंत्रालय के अनुसार 1947 में आजादी के समय सेंगोल की परंपराओं को फिर से सामने लाया गया था और एक सेंगोल जवाहरलाल नेहरू को सौंपा गया था. इसे वुम्मिडी बंगारू चट्टी ने तैयार किया था और तिरुवथिराई आदीनम के संतों ने इसे धार्मिक रूप से प्रतिष्ठित किया था.
सुशासन के सिद्धांतों को भी समझाएगी किताब
कक्षा 9 की सोशल साइंस किताब के शासन से जुड़े अध्याय में सेंगोल के अलावा सत्यमेव जयते और सुप्रीम कोर्ट के आदर्श वाक्य यतो धर्मस्ततो जय: का भी उल्लेख है. नई किताब इन प्रतीकों को शासन व्यवस्था से जुड़े मूल्य के संदर्भ में समझाती है. इस अध्याय में एक बरगद के पेड़ के उदाहरण के जरिए सुशासन के साथ सिद्धांत बताए गए हैं. इनमें भागीदारी, कानून का शासन, जवाबदेही, प्रभावशीलता, समावेशिता, उत्तरदायित्व और पारदर्शिता शामिल है.
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