एआई तेजी से दुनिया की तकनीकी दिशा बदल रही है. ऐसे समय में आईआईटी मद्रास के प्रोफेसर बालारामन रविंद्रन ने एआई में करियर बनाने की तैयारी कर रहे छात्रों को एक अहम सुझाव दिया है. उनका कहना है कि जो छात्र एआई के क्षेत्र में रिसर्च या मास्टर डिग्री करना चाहते हैं, उन्हें गेट के डेटा साइंस एंड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पेपर पर खास ध्यान देना चाहिए. आईआईटी मद्रास के वाधवानी स्कूल ऑफ डेटा साइंस एंड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (DA) के प्रमुख रविंद्रन के अनुसार गेट डीए सिर्फ एक परीक्षा नहीं है, बल्कि छात्रों के लिए एक एआई के क्षेत्र में आगे बढ़ने का एक मजबूत रास्ता खोल सकता है. उनका जोर इस बात पर है कि भारत को एआई का सिर्फ इस्तेमाल करने वाला देश नहीं, बल्कि इसके विकास और दिशा तय करने में योगदान देने वाला देश बनना चाहिए.
गेट में डेटा साइंस एंड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी डीए पेपर एआई शिक्षा में बढ़ती रुचि के बीच शुरू किया गया है. यह छात्रों के लिए डेटा साइंस और एआई में पोस्ट ग्रेजुएट पढ़ाई और रिसर्च की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर देता है. आईआईटी मद्रास में डेटा साइंस एंड एआई के एमटेक प्रोग्राम में एडमिशन के लिए गेट डीए क्वालिफिकेशन जरूरी योग्यताओं में शामिल है. हालांकि प्रोफेसर रविंद्रन छात्रों को इस परीक्षा को केवल ग्रेजुएशन के बाद पार की जाने वाली एक बाधा के तौर पर देखने के बजाय एआई के क्षेत्र में आगे बढ़ने के माध्यम के रूप में देखने की सलाह भी देते हैं.
भारत के लिए अलग तरह की AI की जरूरत
प्रोफेसर रविंद्रन के सुझाव के पीछे भारत की अलग परिस्थितियां भी एक बड़ी वजह मानी जा रही है. दुनिया में विकसित किए जा रहे कई एआई सिस्टम दूसरे देशों के डेटा और एक्सपीरियंस के आधार पर है. ऐसे में जरूरी नहीं है कि वह भारत में की भाषाई, सांस्कृतिक और सामाजिक विविधता को उसी तरह से समझ सके. इसी वजह से आईआईटी मद्रास में रिसर्चर्स यह रिसर्च कर रहे हैं कि अत्याधुनिक एआई मॉडल भारतीय डेटा और अलग-अलग भारतीय परिस्थितियों में किस तरह का काम कर सकते हैं. रविंद्रन का कहना है कि भारत जैसे बड़े और विविध देश के लिए एआई समाधान तैयार करने के लिए बड़े स्तर पर बुनियादी रिसर्च की जरूरत होगी.
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इन क्षेत्रों में AI के इस्तेमाल पर जोर
भारत के लिए विकसित एआई समाधानों का दायरा केवल टेक्नोलॉजी या व्यावसायिक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा. इसका इस्तेमाल शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि जैसे क्षेत्रों में भी किया जा सकेगा, जहां देश की बड़ी आबादी और अलग-अलग जरूरतों को ध्यान में रखना जरूरी है. इसलिए भारत के लिए एआई विकसित करने की चुनौती केवल नए मॉडल तैयार करने तक सीमित नहीं है. इसके लिए रिसर्च डेटा और ऐसी तकनीक की जरूरत है जो देश की परिस्थितियों और बड़े स्तर की जरूरत के अनुरूप काम कर सके.
छात्रों से बोले AI के विकास में लें भाग
प्रोफेसर रविंद्रन का संदेश सिर्फ गेट की तैयारी तक सीमित नहीं है. उनका कहना है कि छात्रों को एआई के भविष्य में सक्रिय भूमिका निभाने के बारे में सोचना चाहिए. भारत एआई के क्षेत्र में अपनी क्षमता बढ़ाने के लिए कंप्यूटिंग क्षमता, डेटा, रिसर्च और घरेलू एआई एक्सपर्टीज विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. ऐसे में गेट डीए की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए यह परीक्षा आगे की पढ़ाई और रिसर्च का एक रास्ता बन सकती है.
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