Asian Games 2026: जापान में हुए एशियन गेम्स 2026 में भारत ने 21 गोल्ड समेत कुल 85 मेडल अपने नाम किए. इस दौरान भारतीय खिलाड़ियों ने कई ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल कीं. महिला खिलाड़ियों का प्रदर्शन खास तौर पर शानदार रहा, जबकि रेसलिंग, बॉक्सिंग, गोल्फ, एथलेटिक्स, शूटिंग, आर्चरी और हॉकी में कई नए अध्याय लिखे गए.
एशियन गेम्स 2026 भारतीय खेलों के लिए कई मायनों में यादगार रहे. भारत ने जापान में हुए इन खेलों में 21 गोल्ड, 27 सिल्वर और 37 ब्रॉन्ज समेत कुल 85 मेडल जीतकर मेडल टैली में चौथा स्थान हासिल किया. हालांकि कुल मेडल की संख्या पिछले एशियन गेम्स के मुकाबले कम रही, लेकिन इस बार कई भारतीय खिलाड़ियों ने ऐसी उपलब्धियां हासिल कीं, जो लंबे समय तक याद रखी जाएंगी.
इन खेलों की एक बड़ी तस्वीर भारतीय महिला खिलाड़ियों की कामयाबी भी रही. भारत के 21 गोल्ड मेडल में 11 गोल्ड महिला खिलाड़ियों ने जीते, जबकि पुरुष खिलाड़ियों के खाते में सात गोल्ड आए. इसके अलावा टीम और मिक्स्ड स्पर्धाओं में भी भारत ने सफलता हासिल की.
कुंकुम मोहोत, नीरु ढांडा और गुलवीर सिंह का शानदार प्रदर्शन
कुछ भारतीय खिलाड़ियों ने एक से ज्यादा मेडल जीतकर अपनी अलग छाप छोड़ी. आर्चरी में कुंकुम मोहोत ने दो गोल्ड और एक सिल्वर मेडल अपने नाम किया. शूटिंग में नीरु ढांडा ने दो गोल्ड और एक सिल्वर जीतकर भारत की सफलता में बड़ी भूमिका निभाई.
एथलेटिक्स में गुलवीर सिंह ने दो सिल्वर और एक ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया. लॉन्ग डिस्टेंस रनिंग में भारत को लंबे समय से बड़ी सफलता का इंतजार रहा है और गुलवीर के तीन मेडल ने इस क्षेत्र में नई उम्मीद जगाई है.
प्रनवी उर्स ने गोल्फ में रचा इतिहास
महिला गोल्फर प्रनवी उर्स की उपलब्धि इन एशियन गेम्स की सबसे खास कहानियों में शामिल रही. प्रनवी ने गोल्फ में गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया. यह एशियन गेम्स में किसी भारतीय गोल्फर का पहला गोल्ड मेडल रहा.
उनकी इस उपलब्धि ने भारतीय गोल्फ को नई पहचान दी है. भारत में गोल्फ अब भी क्रिकेट, हॉकी, बैडमिंटन या कुश्ती जैसे खेलों की तुलना में कम लोकप्रिय है, लेकिन एशियन गेम्स में मिली यह ऐतिहासिक सफलता आने वाले वर्षों में इस खेल को नई दिशा दे सकती है.
पोल वॉल्ट में भारत को मिला पहला मेडल
पोल वॉल्ट में भी भारत ने इतिहास बनाया. ब्रोनिका ऑलन गोवन ने ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया. यह एशियन गेम्स के इतिहास में पोल वॉल्ट में भारत का पहला मेडल रहा. इस लिहाज से उनका ब्रॉन्ज भी किसी गोल्ड से कम नहीं माना जा सकता.
एथलेटिक्स में भारत की उपलब्धियां यहीं समाप्त नहीं हुईं. 400 मीटर हर्डल्स में विद्या रामराज ने ब्रॉन्ज मेडल जीतने के साथ एक बेहद खास रिकॉर्ड भी अपने नाम किया.
विद्या रामराज ने तोड़ा पीटी उषा का 42 साल पुराना रिकॉर्ड
विद्या रामराज ने महिलाओं की 400 मीटर हर्डल्स में शानदार प्रदर्शन करते हुए भारतीय एथलेटिक्स के सबसे प्रतिष्ठित रिकॉर्ड में से एक को पीछे छोड़ दिया. उन्होंने पीटी उषा का 42 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ा. पीटी उषा ने यह रिकॉर्ड 1984 के लॉस एंजेलिस ओलंपिक के दौरान बनाया था.
विद्या ने न केवल रिकॉर्ड तोड़ा, बल्कि एशियन गेम्स में ब्रॉन्ज मेडल भी हासिल किया. स्पोर्ट्स एक्सपर्ट और जाने-माने कमेंटेटर मनोज जोशी उन्हें भारतीय एथलेटिक्स की नई सनसनी मानते हैं. जोशी का कहना है की ये तो सिर्फ शुरुवात है आगे और रिकॉर्ड बनेंगे .
मैराथन में 44 साल बाद मेडल
सावन बरवाल ने भी भारतीय एथलेटिक्स के लिए इतिहास रचा. उन्होंने मैराथन में सिल्वर मेडल जीता. भारत को एशियन गेम्स की मैराथन स्पर्धा में 1982 के बाद पहली बार मेडल मिला. यानी 44 साल का लंबा इंतजार समाप्त हुआ.
हाई जंप में सर्वेश कुशारे ने भी ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की. उनके प्रदर्शन से भारत ने इस स्पर्धा में 56 साल बाद एशियन गेम्स मेडल अपने नाम किया.
उपलब्धियां इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं क्योंकि भारत को आम तौर पर ट्रैक एंड फील्ड की कुछ चुनिंदा स्पर्धाओं में ही मजबूत माना जाता रहा है. इस बार अलग-अलग इवेंट में मिली सफलता भारतीय एथलेटिक्स के बढ़ते दायरे की ओर इशारा करती है.
नीरु ढांडा ने ट्रैप शूटिंग में रचा इतिहास
शूटिंग में नीरु ढांडा का प्रदर्शन बेहद खास रहा. उन्होंने महिला ट्रैप शूटिंग के व्यक्तिगत इवेंट में गोल्ड मेडल जीतकर नया इतिहास बनाया. वह एशियन गेम्स के महिला ट्रैप व्यक्तिगत इवेंट में गोल्ड जीतने वाली पहली भारतीय निशानेबाज बनीं.
भारत परंपरागत रूप से शूटिंग में एशिया की मजबूत टीमों में शामिल रहा है, लेकिन इस उपलब्धि ने महिला ट्रैप शूटिंग में भी भारत के लिए एक नया रास्ता खोल दिया.
महिला हॉकी टीम का 44 साल का इंतजार खत्म
भारतीय महिला हॉकी टीम ने भी एशियन गेम्स 2026 को ऐतिहासिक बना दिया. टीम ने 44 साल बाद एशियन गेम्स का गोल्ड मेडल अपने नाम किया. इसके साथ ही महिला टीम ने लॉस एंजेलिस ओलंपिक 2028 के लिए भी क्वालीफाई कर लिया.
पुरुष हॉकी टीम ने भी गोल्ड मेडल जीतकर ओलंपिक का टिकट हासिल किया. इस तरह भारतीय हॉकी के लिए सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि पुरुष और महिला दोनों टीमों ने गोल्ड जीतकर लॉस एंजेलिस ओलंपिक में अपनी जगह पक्की की.
हालांकि मनोज जोशी का मानना है कि पुरुष टीम के लिए ओलंपिक की चुनौती आसान नहीं होगी. हालिया वर्ल्ड कप के प्रदर्शन को देखते हुए टीम को कुछ क्षेत्रों में बदलाव की जरूरत है. उनके मुताबिक ओलंपिक से पहले ज्यादा खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय एक्सपोजर देना होगा और टीम प्रबंधन को लगभग चार ऐसे खिलाड़ियों की तलाश करनी होगी जो जरूरी रिप्लेसमेंट के तौर पर टीम को मजबूती दे सकें.
आर्चरी में कोरिया को चुनौती दे रहा भारत
आर्चरी में भारतीय खिलाड़ियों ने एक बार फिर दिखाया कि वे दुनिया की सर्वश्रेष्ठ टीमों को चुनौती देने की स्थिति में पहुंच चुके हैं. महिला कंपाउंड टीम ने गोल्ड मेडल अपने नाम किया.
मनोज जोशी के मुताबिक भारतीय आर्चरी के लिए सबसे उत्साहजनक पहलू यह है कि भारत अब कोरियाई खिलाड़ियों और टीमों को हराने लगा है. दक्षिण कोरिया लंबे समय से विश्व आर्चरी की सबसे बड़ी ताकतों में शामिल रहा है. ऐसे में भारतीय खिलाड़ियों की सफलता लॉस एंजेलिस ओलंपिक से पहले उम्मीद बढ़ाती है.
रेसलिंग में 1962 और 1978 के बाद दोहराया इतिहास
रेसलिंग भी भारत के लिए एशियन गेम्स 2026 की बड़ी उपलब्धियों में शामिल रही. मनोज जोशी के मुताबिक 1962 के बाद पहली बार चार भारतीय पहलवान फाइनल तक पहुंचे. वहीं 1978 के बाद पहली बार भारत ने पुरुष फ्रीस्टाइल रेसलिंग में दो गोल्ड मेडल जीते.
ग्रीको-रोमन रेसलिंग में भी भारत ने लंबा इंतजार समाप्त किया. 1962 के बाद पहली बार कोई भारतीय पहलवान ग्रीको-रोमन के फाइनल तक पहुंचा.
इन खेलों में भारतीय पहलवानों ने वर्ल्ड चैंपियन और ओलंपिक चैंपियन तक को हराया. सुजीत कलकल की बाउट भारतीय रेसलिंग के जुझारूपन की मिसाल बनी. सुजीत एक समय 9-2 से पीछे चल रहे थे, लेकिन उन्होंने शानदार वापसी करते हुए मुकाबला 10-9 से जीत लिया.
प्रो रेसलिंग लीग से मिला फायदा?
मनोज जोशी भारतीय पहलवानों की सफलता में प्रो रेसलिंग लीग की भूमिका को भी महत्वपूर्ण मानते हैं. उनके मुताबिक लीग के कारण भारतीय पहलवानों को दुनिया के अलग-अलग देशों के शीर्ष पहलवानों के साथ और उनके खिलाफ खेलने का मौका मिला.
इससे भारतीय खिलाड़ियों को विदेशी पहलवानों की तकनीक और शैली को करीब से समझने का अवसर मिला. साथ ही बड़े विदेशी नामों को लेकर जो मनोवैज्ञानिक दबाव हुआ करता था, वह भी धीरे-धीरे कम हुआ. यही आत्मविश्वास अब बड़े अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में नजर आने लगा है.
बॉक्सिंग में तीन गोल्ड, लवलीना ने भी दिखाया दम
बॉक्सिंग में भारत ने तीन गोल्ड मेडल जीतकर अपनी ताकत दिखाई. स्टार भारतीय बॉक्सर लवलीना भी गोल्ड मेडल जीतने में सफल रहीं.
मनोज जोशी का मानना है कि ओलंपिक में प्रतिस्पर्धा एशियन गेम्स की तुलना में कहीं ज्यादा कठिन होगी, लेकिन भारतीय बॉक्सर्स और रेसलर्स ने जिस तरह का प्रदर्शन किया है, उससे लॉस एंजेलिस ओलंपिक के लिए उम्मीदें बढ़ गई हैं.
महिला खिलाड़ियों की सफलता में हरियाणा का बड़ा योगदान
इस बार महिला खिलाड़ियों की सफलता विशेष रूप से चर्चा में रही. मनोज जोशी इसके पीछे हरियाणा में बढ़े सोशल एक्सपोजर और खेलों को लेकर बदली सोच को भी महत्वपूर्ण कारण मानते हैं.
उनके मुताबिक पहले लड़कियों को खेलों में उतना सामाजिक एक्सपोजर नहीं मिलता था, लेकिन एक के बाद एक महिला खिलाड़ियों की सफलता ने परिवारों की सोच बदली है. अब माता-पिता को भी भरोसा होने लगा है कि उनकी बेटियां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मेडल जीत सकती हैं.
हरियाणा में सरकारी खेल नीतियां, कैडेट स्तर की प्रतियोगिताएं और अलग-अलग वेट कैटेगरी में बड़ी संख्या में महिला बॉक्सर्स और पहलवानों की मौजूदगी ने प्रतिस्पर्धा बढ़ाई है. इसका असर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के प्रदर्शन में दिखाई दे रहा है.
85 मेडल के बावजूद कहां रह गई कमी?
भारत ने 85 मेडल जीतकर चौथा स्थान हासिल किया, लेकिन कुछ खेलों में उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं हुआ. मनोज जोशी के मुताबिक एथलेटिक्स और शूटिंग में कुछ भारतीय खिलाड़ियों का प्रदर्शन अपेक्षा के अनुरूप नहीं रहने की वजह से भारत पिछले एशियन गेम्स की तुलना में कम मेडल जीत पाया.
इसके बावजूद इन खेलों ने भविष्य के लिए कई सकारात्मक संकेत दिए हैं. गोल्फ और पोल वॉल्ट में ऐतिहासिक उपलब्धियां मिलीं, मैराथन और हाई जंप में दशकों का इंतजार समाप्त हुआ, रेसलिंग ने पुराने रिकॉर्ड दोहराए, आर्चरी में भारत ने बड़ी ताकतों को चुनौती दी और पुरुष तथा महिला हॉकी टीमों ने ओलंपिक का टिकट हासिल किया.
सबसे बढ़कर महिला खिलाड़ियों का प्रदर्शन भारतीय खेलों में आ रहे बदलाव को दर्शाता है. 21 में से 11 गोल्ड महिला खिलाड़ियों के नाम रहना इस एशियन गेम्स की सबसे बड़ी कहानियों में से एक है.
एशियन गेम्स 2026 का भारतीय अभियान इसलिए केवल 85 मेडल की संख्या तक सीमित नहीं रहा. यह उन पुराने रिकॉर्ड्स के टूटने, दशकों लंबे इंतजार के खत्म होने और उन खेलों में नई उम्मीद पैदा होने का टूर्नामेंट रहा, जहां भारत अब तक बड़ी अंतरराष्ट्रीय ताकत नहीं माना जाता था. लॉस एंजेलिस ओलंपिक 2028 से पहले भारतीय खेलों के लिए यही इस एशियन गेम्स की सबसे बड़ी उपलब्धि कही जा सकती है.
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