मुंबई में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रमुख राज ठाकरे और शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ निकाले गए एक संयुक्त विरोध मार्च को लेकर उद्धव गुट के नेता संजय राउत ने तीखा हमला बोला है. राउत ने कहा कि यह विरोध देश में चल रही तानाशाही, चुनावों को हाईजैक करने, चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट को अपनी जेब में रखने, वोट और चुनाव चुराने, और सांसदों व विधायकों को तोड़ने के खिलाफ है.
उन्होंने कहा कि यह उन सभी चीजों के खिलाफ एक विद्रोह है, ठीक वैसा ही जैसा 1857 में हुआ था. संजय राउत यहीं नहीं रुके. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा सभी चुनावों को ‘गैर-कानूनी’ बताए जाने के बाद राउत ने और आक्रामक रुख अपनाया.
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‘फिर से कराए जाएं लोकसभा-विधानसभा चुनाव’
उन्होंने कहा, “चुनावों में धोखाधड़ी, भ्रष्टाचार और हेरफेर हुई है. पूर्व सीईसी राजीव कुमार और मौजूदा सीईसी ज्ञानेश कुमार की भूमिका संदिग्ध है. सभी चुनाव रद्द किए जाने चाहिए और विधानसभा व लोकसभा चुनाव फिर से कराए जाने चाहिए.”
‘लोकतंत्र की रक्षा के लिए आंदोलन’
एक दूसरे बयान में संजय राउत ने कहा, “यह देश भर में लोकतंत्र की रक्षा के लिए एक बड़ा आंदोलन है और इसकी गूंज मुंबई में साफ तौर पर दिखाई दे रही है. राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में यह मार्च हुआ है.”
‘दोनों देश के दुश्मन’
उन्होंने चुनाव आयोग पर निशाना साधते हुए कहा, “जिस तरह से चुनाव कराए गए हैं, जिसमें गड़बड़ी, भ्रष्टाचार और धांधली के आरोप लगे हैं, उसे देखते हुए ज्ञानेश कुमार और पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार, दोनों ही देश के दुश्मन हैं.”
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