बिहार की सम्राट सरकार ने राज्य की विभिन्न जेलों में बंद 44 कैदियों को महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर रिहा करने का निर्णय लिया है. शुक्रवार (02 अक्टूबर, 2026) को इन सभी कैदियों के चेहरे पर मुस्कान लौटेगी. इनमें बुजुर्गों की संख्या अधिक है.
इससे पहले महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के अवसर पर विभिन्न जेलों से 43 कैदियों को रिहा किया गया था. अब गांधी जयंती के अवसर पर फिर कैदियों की रिहाई की जा रही है.
इसके अलावा, अपराध के पीड़ितों के परिजनों को भी दो अक्टूबर को वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी. करीब 1,820 लाभार्थी परिवारों के बीच लगभग 3.86 करोड़ रुपये वितरित किए जाएंगे.
44 में दो कैदियों की उम्र 90 साल से भी अधिक
सरकार की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, इस वर्ष रिहा किए जाने वाले कैदियों में बड़ी संख्या उन बुजुर्गों की है, जिन्होंने लंबे समय तक जेल की सजा काटी है. इनमें दो कैदी 90 वर्ष से अधिक आयु के हैं, जबकि आठ की उम्र 80 वर्ष से अधिक है. 20 कैदी 70 से 80 वर्ष की आयु के बीच हैं.
पूर्णिया जेल में बंद एक महिला कैदी भी होगी रिहा
इसके अलावा, गंभीर बीमारी से पीड़ित एक कैदी को मानवीय आधार पर रिहा किया जा रहा है. पूर्णिया जेल में करीब 20 वर्ष की सजा काट चुकी एक महिला कैदी भी रिहा होने वालों में शामिल है.
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रिहा किए जाने वाले कैदियों में रोहतास जेल में बंद 93 वर्षीय रामवृक्ष कोइरी शामिल हैं. मधेपुरा के योगेश्वर यादव, हरिवंश राम (84) और रामाशीष यादव (82) को भी रिहा किया जाएगा. सत्यनारायण सिंह और पंकज गुप्ता भी रिहा होने वालों में शामिल हैं. सत्यनारायण सिंह और पंकज गुप्ता गंभीर बीमारियों से पीड़ित हैं. इन सभी कैदियों ने लंबे समय तक जेल की सजा काटी है.
कैदियों की रिहाई की सिफारिश राज्य कैदी परिहार समिति ने की थी. राज्य सरकार ने मानवीय आधार, सामाजिक पुनर्वास और जनकल्याण को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया है. सरकार के अनुसार, इस रिहाई से बुजुर्ग और बीमार कैदियों को अपने परिवारों के बीच लौटने तथा समाज में पुनर्वास का अवसर मिलेगा.
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