बिहार विधान परिषद की सबसे हॉट मानी जाने वाली पटना स्नातक सीट पर मुकाबला बेहद दिलचस्प हो चुका है. सत्ताधारी जनता दल यूनाइटेड में मचा घमासान अब खुलकर सड़कों पर आ गया है. एक तरफ जहां JDU के मौजूदा MLC नीरज कुमार मैदान में हैं, तो वहीं दूसरी तरफ उनकी ही पार्टी के बाहुबली विधायक अनंत सिंह खुलेआम बगावत कर जनसुराज पार्टी के उम्मीदवार डॉ. अनुज सिंह का समर्थन कर रहे हैं.
गुरुवार, 1 अक्टूबर को पटना में अनुज सिंह ने अपने समर्थकों और अनंत सिंह के साथ भव्य नामांकन रैली निकाली. लेकिन इस पूरी सियासत का सबसे बड़ा ट्विस्ट तब सामने आया, जब जनसुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर पटना में हुए इस हाई-प्रोफाइल नामांकन से पूरी तरह नदारद रहे और दरभंगा निकल गए.
50 हजार रसगुल्ले बंटे, लेकिन ‘असली रसगुल्ला’ खा गए प्रशांत किशोर?
अनुज सिंह के नामांकन को लेकर पटना में काफी तैयारियां की गई थीं. समर्थकों के लिए 50 हजार रसगुल्लों का इंतजाम था, गाड़ियों का काफिला था और जीप पर मुछों पर ताव देते मोकामा विधायक अनंत सिंह मौजूद थे. लेकिन जिस पार्टी के टिकट पर अनुज सिंह पर्चा भर रहे थे, उस जन सुराज के सर्वेसर्वा प्रशांत किशोर रैली में नजर नहीं आए.
राजनीतिक गलियारों में चर्चा जोरों पर है कि प्रशांत किशोर ने बेहद चालाकी और सटीक प्लानिंग के साथ यह कदम उठाया है. पीके लगातार यह दावा करते रहे हैं कि जन सुराज किसी भी आपराधिक छवि वाले व्यक्ति को न तो टिकट देगी और न ही ऐसे तत्वों को बढ़ावा देगी. अनंत सिंह के साथ मंच या फ्रेम साझा करने से उनकी इस ‘स्वच्छ राजनीति’ वाली छवि पर सवाल उठ सकते थे. बिना खुद सामने आए पीके ने JDU के विधायक अनंत सिंह और JDU के आधिकारिक उम्मीदवार नीरज कुमार को आमने-सामने खड़ा कर दिया है. पार्टी के दो धड़ों में बंटने से असली नुकसान सत्ताधारी दल को हो रहा है.
अनुज सिंह को टिकट देना प्रशांत किशोर की चाल?
प्रशांत किशोर ने जब अनुज सिंह को जनसुराज से टिकट दिया तो उसकी टाइमिंग पर सियासी पंडितों ने काफी गौर किया. नीरज कुमार जेडीयू से टिकट के प्रबल दावेदार थे तो दूसरी तरफ अनंत सिंह चाहते थे कि जेडीयू से अनुज सिंह को मौका मिले. जिस दिन जेडीयू की तरफ से नीरज कुमार को टिकट दिया गया उसके अगले ही दिन प्रशांत किशोर ने भी पटना स्नातक सीट से अपने उम्मीदवार का ऐलान कर दिया और अनुज सिंह को टिकट दिया.
इसका मतलब ये है कि प्रशांत किशोर ने पहले इंतजार किया कि जेडीयू क्या करती है, उसके बाद जेडीयू की चाल को समझते हुए अपनी सियासी चाल चली. प्रशांत किशोर चाहते तो अनुज सिंह से दूरी बना सकते थे क्योंकि उनके साथ अनंत सिंह जो बाहुबली छवि के नेता हैं वो उनका समर्थन कर रहे थे. अगर अनुज सिंह निर्दलीय चुनावी मैदान में उतरते तो शायद जेडीयू के अंदर इतना घमासान नहीं मचता लेकिन अनुज सिंह जनसुराज के उम्मीदवार हैं और जनसुराज के समर्थन में जेडीयू का विधायक खड़ा है तो सवाल उठने लाजमी हैं.
प्रशांत किशोर को अब अनंत सिंह अच्छे लगने लगे?
प्रशांत किशोर आज पटना की जगह दरभंगा में अपने उम्मीदवार का नामांकन करा रहे थे. पत्रकारों ने जब पीके से अनंत सिंह के समर्थन को लेकर सवाल किया तो प्रशांत का जवाब था कि ‘पूरा बिहार जनसुराज का समर्थन कर रहा है, अनंत सिंह ने कर दिया तो क्या बड़ी बात है’ प्रशांत किशोर के इस बयान पर सियासी पंडितों ने सवाल उठाए हैं. अपराधिक छवि के व्यक्ति को टिकट नहीं देने की बात करने वाले प्रशांत किशोर किसी बाहुबली का समर्थन कैसे स्वीकार सकते हैं, क्या इसमें सच में कोई बड़ी बात नहीं ?
अनुज नहीं असली लड़ाई अनंत सिंह लड़ रहे
पटना स्नातक सीट सबसे ज्यादा चर्चा में इसलिए है क्योंकि अनंत सिंह ने यहां पर बगावत कर दी है. मीडिया में जनसुराज के उम्मीदवार अनुज सिंह से ज्यादा अनंत सिंह की चर्चा हो रही है, अनुज सिंह से ज्यादा अनंत सिंह के बयान चल रहे हैं. सियासी जानकार मानते हैं कि अनुज सिंह के बहाने अनंत सिंह अपना पुराना सियासी बदला नीरज कुमार से निकाल रहे हैं. अनंत सिंह ने साफ कहा है कि नीरज कुमार ने कई बार उनका चुनाव में विरोध किया तो उस वक्त पार्टी ने उनपर कोई कार्रवाई नहीं की तो मुझपर क्यों होगी.
प्रशांत किशोर की चाल से जेडीयू में हलचल
पीके ने अनुज सिंह को टिकट देकर एक तीर से कई निशाने साधे हैं, JDU के भीतर बगावत करा दी, अपने उम्मीदवार को मजबूत जनाधार दिलवा दिया और खुद फ्रेम से बाहर रहकर नैतिक बढ़त बनाए रखी. पटना स्नातक सीट पर अनंत सिंह के इस कदम से JDU नेतृत्व के हाथ-पांव फूल गए हैं. तीन बार से चुनाव जीतते आ रहे नीरज कुमार के लिए यह चौथा चुनाव सबसे मुश्किल साबित हो रहा है, क्योंकि चुनौती बाहर से कम और पार्टी के अंदर से ज्यादा मिल रही है.
मामला अब नीतीश कुमार के पास पहुंच चुका है. इसको लेकर आज बैठक भी हुई लेकिन कोई फैसलना नहीं हुआ. खैर, क्या रंग लाएगी पीके की ‘फूंक-फूंककर’ चलने वाली चाल ? कभी नीतीश कुमार के बेहद करीबी और JDU के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रहे प्रशांत किशोर आज उसी पार्टी की चूलें हिला रहे हैं. उन्होंने पटना स्नातक सीट पर ऐसा मोहरा सेट किया है, जिससे जेडीयू बैकफुट पर आ गई है. हालांकि, सवाल यह भी बना रहेगा कि क्या जनता पीके की इस ‘पर्दे के पीछे वाली’ राजनीति को स्वीकार करेगी या अनंत सिंह के बागी तेवर नीरज कुमार के जीत के चौके को रोक पाएंगे?
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