ऑनलाइन रेलवे टिकट बुकिंग सिस्टम में कथित गड़बड़ियों और यात्रियों को हो रही परेशानियों को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है. हाई कोर्ट ने रेल मंत्रालय और इंडियन रेलवे केटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन से इस मामले में जवाब मांगा है. कोर्ट ने केंद्र और रेलवे की ओर से पेश वकील को मामले में निर्देश लेकर एक सप्ताह के भीतर स्थिति स्पष्ट करने को कहा है.
चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की बेंच एक वकील शुभम कुमार द्वारा दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी. याचिका में भारतीय रेलवे के यात्री रिजर्वेशन सिस्टम का स्वतंत्र ऑडिट कराने की मांग की गई है. इसमें IRCTC के अलावा RailOne और उससे जुड़ी ऑनलाइन सेवाओं को भी जांच के दायरे में लाने की मांग की गई है.
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कोटा और बॉट से टिकट बुकिंग पर उठे सवाल
याचिका में आरोप लगाया गया है कि ऑनलाइन टिकट बुकिंग सिस्टम में अलग-अलग कोटा के गलत इस्तेमाल की आशंका है. इसके अलावा, बिना अनुमति ऑटोमेटेड बुकिंग, बॉट और बड़े पैमाने पर टिकट बुक करने वाले सिस्टम के इस्तेमाल को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं. याचिकाकर्ता ने यह भी जांच की मांग की है कि क्या अधिकृत एजेंटों, बिचौलियों या ऑटोमेटेड सिस्टम को आम यात्रियों के मुकाबले कोई ऐसी सुविधा मिल रही है, जिसकी जानकारी सार्वजनिक नहीं है.
पैसे कट गए, टिकट नहीं मिला तो क्या होगा
जनहित में सबसे बड़ी चिंता उन यात्रियों को लेकर जताई गई है. जिनके बैंक खाते से टिकट की रकम कट जाती है लेकिन टिकट जारी नहीं होता. ऐसी स्थिति में यात्री का पैसा तो फंसता ही है, साथ ही इस दौरान उपलब्ध सीट पाने का मौका भी निकल सकता है.
याचिका में मांग की गई है कि ऐसे मामलों के लिए एक समयबद्ध व्यवस्था बनाई जाए, जिससे यह तुरंत पता चल सके कि ट्रांजैक्शन सफल हुआ, असफल रहा या बीच में अटक गया। कानून के मुताबिक वापस की जाने वाली रकम भी तय समय में यात्री को लौटाने की व्यवस्था की मांग की गई है..
RAC, वेटिंग और स्पेशल कोटे की भी जांच
याचिका में स्पेशल कोटे के आवंटन और इस्तेमाल में पारदर्शिता की मांग की गई है. इसके साथ ही RAC बर्थ, वेटिंग टिकट और टिकट कैंसिल होने के बाद मिलने वाले रिफंड की प्रक्रिया की भी जांच कराने की मांग की गई है.
तकनीकी और प्रशासनिक दोनों स्तर पर ऑडिट की मांग
याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट से रेलवे के पूरे रिजर्वेशन सिस्टम का स्वतंत्र तकनीकी और प्रशासनिक ऑडिट कराने का निर्देश देने की मांग की है. अब कोर्ट के निर्देश के बाद रेल मंत्रालय और IRCTC को इस मामले में अपनी स्थिति स्पष्ट करनी होगी. मामले की अगली सुनवाई एक सप्ताह बाद होगी.
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