विश्व प्रसिद्ध इमारत ताजमहल के रिवर साइड क्षेत्र में सशस्त्र हमले की स्थिति से निपटने की तैयारियों को परखने के लिए बहु-एजेंसी मॉक ड्रिल आयोजित की गई. अभ्यास में CISF, उत्तर प्रदेश पुलिस, ASI, फायर सर्विस, BDDS, डॉग स्क्वॉड, LIU और मेडिकल टीम ने हिस्सा लिया. मॉक ड्रिल की शुरुआत रिवर साइड क्षेत्र में दो सशस्त्र आतंकियों द्वारा काल्पनिक हमला और अंधाधुंध फायरिंग किए जाने के परिदृश्य से हुई. इस दौरान वहां तैनात CISF का एक जवान घायल होने की स्थिति दिखाई गई.
घटना की सूचना ड्यूटी पर तैनात कर्मी ने तत्काल CISF कंट्रोल रूम को दी. इसके बाद संबंधित सभी एजेंसियों और ड्यूटी पोस्ट को अलर्ट कर दिया गया. तय प्रक्रिया के अनुसार सुरक्षा बलों ने कार्रवाई शुरू की. काल्पनिक आतंकी ताजमहल के पिछले हिस्से की ओर बढ़े, जहां CISF की क्विक रिस्पांस टीम ने मोर्चा संभालते हुए उन्हें रोकने की कार्रवाई की.
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आतंकियों को निष्प्रभावी करने की ट्रेनिंग
इसके बाद CISF की असॉल्ट पार्टी ने समन्वित कार्रवाई करते हुए दोनों आतंकियों को निष्प्रभावी करने का अभ्यास किया. वहीं स्थानीय पुलिस ने ताजमहल के बाहरी क्षेत्र की घेराबंदी कर सुरक्षा व्यवस्था संभाली. घायल जवान को मौके पर मौजूद मेडिकल टीम ने प्राथमिक उपचार दिया. इसके बाद CISF, पुलिस, BDDS और डॉग स्क्वॉड की संयुक्त टीमों ने पूरे क्षेत्र की गहन तलाशी ली.
ट्रेनिंग के बाद अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ डी-ब्रीफिंग
मॉक ड्रिल का संचालन CISF यूनिट ताजमहल के कमांडेंट ऋषि कौशिक के पर्यवेक्षण में किया गया. अभ्यास पूरा होने के बाद सभी संबंधित एजेंसियों के अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ डी-ब्रीफिंग की गई. मॉक ड्रिल के जरिए सशस्त्र हमले जैसी स्थिति में सुरक्षा एजेंसियों की तैयारी, आपसी तालमेल, संचार व्यवस्था और त्वरित कार्रवाई की प्रक्रिया को परखा गया.
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