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शिलांग-सिलचर हाई-स्पीड कॉरिडोर को मंज़ूरी, ₹22,864 करोड़ की लागत से बनेगा ग्रीनफील्ड हाईवे


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) ने शिलांग से सिलचर के बीच 166.80 किलोमीटर लंबे ग्रीनफील्ड हाई-स्पीड कॉरिडोर (NH-06) के निर्माण, रख-रखाव और प्रबंधन को हाइब्रिड एन्युइटी मोड (HAM) पर मंजूरी दे दी है।…

Last Updated: अप्रैल 30, 2025 | 10:05 PM IST

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) ने शिलांग से सिलचर के बीच 166.80 किलोमीटर लंबे ग्रीनफील्ड हाई-स्पीड कॉरिडोर (NH-06) के निर्माण, रख-रखाव और प्रबंधन को हाइब्रिड एन्युइटी मोड (HAM) पर मंजूरी दे दी है। इस परियोजना की कुल पूंजीगत लागत ₹22,864 करोड़ होगी।

कहाँ बनेगा कॉरिडोर?

यह हाईवे मेघालय के मावलिंगखुंग (Shillong के पास) से असम के पंचग्राम (Silchar के पास) तक बनेगा। इसमें मेघालय में 144.80 किमी और असम में 22 किमी की दूरी शामिल है।

परियोजना की विशेषताएँ:

विवरण जानकारी
कुल लंबाई 166.80 किमी
सिविल निर्माण लागत ₹12,087 करोड़
भूमि अधिग्रहण लागत ₹3,503 करोड़
कुल पूंजी लागत ₹22,864 करोड़
निर्माण मोड हाइब्रिड एन्युइटी मोड (HAM)
संवद्ध राजमार्ग NH-27, NH-106, NH-206, NH-37, SH-07 आदि
जुड़े शहर/स्थल गुवाहाटी, शिलांग, सिलचर, डायंगपासोह, उम्मुलोंग, उमकियांग, कालैन आदि
हवाई अड्डे गुवाहाटी, शिलांग, सिलचर
ट्रैफिक अनुमान (2025) 19,000-20,000 यात्री कार इकाइयाँ (PCU)
रोज़गार सृजन 74 लाख मानव-दिवस (प्रत्यक्ष) और 93 लाख मानव-दिवस (अप्रत्यक्ष)

परियोजना के लाभ:

  • उत्तर-पूर्वी राज्यों — त्रिपुरा, मिज़ोरम, मणिपुर और असम के बराक घाटी क्षेत्र — की मुख्य भूमि से कनेक्टिविटी बेहतर होगी। 
  • यात्रा दूरी और समय में काफी कमी आएगी, जिससे लॉजिस्टिक्स कुशलता बढ़ेगी। 
  • मेघालय के कोयला और सीमेंट उत्पादक क्षेत्रों से होकर गुजरने वाला यह कॉरिडोर औद्योगिक विकास को बढ़ावा देगा। 
  • यह पर्यटन को प्रोत्साहित करेगा क्योंकि यह हवाई अड्डों और प्राकृतिक पर्यटन स्थलों को जोड़ेगा। 
  • मौजूदा NH-06 पर ट्रैफिक का दबाव कम होगा और PM गतिशक्ति मास्टर प्लान के अनुरूप परिवहन बुनियादी ढांचे का विकास होगा। 

राष्ट्रीय विकास में अहम भूमिका

शिलांग-सिलचर कॉरिडोर गुवाहाटी, शिलांग, सिलचर, इम्फाल, आइज़ोल और अगरतला के बीच कनेक्टिविटी को मजबूत करेगा। यह परियोजना आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक और कदम है, जो बुनियादी ढांचा, रोजगार और क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा देगी।

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