उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव 2027 से पहले समाजवादी पार्टी और कांग्रेस नेताओं में सीटों को लेकर बयानबाजी थमने का नाम नहीं ले रही. अब सपा के प्रतापगढ़ से सांसद एसपी सिंह पटेल ने बड़ा बयान दिया हैं. उन्होंने दावा किया, “सपा से गठबंधन नहीं होता तो कांग्रेस 2024 के लोकसभा चुनाव में यूपी में एक भी सीट नहीं जीत पाती.”
सपा सांसद ने यह भी दावा किया कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी रायबरेली से चुनाव लड़ने को लेकर अनिच्छुक थे. बोले कि सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के ‘आश्वासन देने’ के बाद ही राहुल गांधी ने रायबरेली से चुनाव लड़ा.
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राहुल गांधी सीट छोड़ने को तैयार थे
सपा सांसद एसपी सिंह पटेल ने बड़ा दावा करते हुए कहा, “स्थिति ऐसी बन गई थी कि राहुल गांधी अपनी सीट छोड़ने को तैयार थे.” उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव ने उन्हें भरोसा दिलाया और चुनाव लड़ने के लिए मनाया. पटेल के मुताबिक, अखिलेश ने यह भी कहा कि अगर राहुल गांधी चुनाव नहीं लड़ेंगे तो सपा अपना उम्मीदवार उतार देगी और इसके बाद राहुल गांधी चुनाव लड़ने को तैयार हुए.
कांग्रेस को 50 सीटों पर संतोष करना चाहिए
सपा सांसद ने कहा कि सपा ने कांग्रेस को पूरा समर्थन दिया. बोले, “जहां-जहां कांग्रेस को सीट दी गईं, वहां समाजवादी पार्टी का एक-एक वोट उसे मिला/ इसी वजह से वह छह सीट जीत पाई.” उन्होंने कहा, “हमने 37 सीट हासिल कीं और वह छह सीट जीते. हम हर लिहाज से कांग्रेस से बहुत आगे हैं. उन्हें विधानसभा चुनाव में 50 से ज्यादा सीट नहीं मांगनी चाहिए और इतने में ही संतुष्ट रहना चाहिए.”
उत्तर प्रदेश में 2024 के लोकसभा चुनाव में राज्य की 80 सीट में से सपा ने 37 और उसकी सहयोगी कांग्रेस ने छह सीट जीती थीं. भाजपा ने 33 सीट जीती थीं, जबकि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) को कुल 36 सीट मिली थीं. वर्तमान में 403 सदस्यीय उत्तर प्रदेश विधानसभा में सपा के 101 और कांग्रेस के दो विधायक हैं.
आराधना मिश्रा को अध्यक्ष बनाने से नहीं मिलेगा फायदा
कांग्रेस द्वारा एक ब्राह्मण नेता को प्रदेश अध्यक्ष और एक मुस्लिम नेता को कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त कर सामाजिक समीकरण साधने के सवाल पर पटेल ने कहा, “इससे कोई फायदा नहीं होगा. देखिए, दलित मायावती के साथ थे, लेकिन अब वे हमारी तरफ आ गए हैं. उन्हें एहसास हुआ कि कांग्रेस शासन के दौरान दलितों का कोई खास उत्थान नहीं हुआ और भाजपा के राज में तो निश्चित रूप से नहीं हो रहा है जबकि समाजवादी पार्टी के कार्यकाल में सभी को समान अवसर मिलते हैं. सभी को आगे बढ़ने और अपने बच्चों को शिक्षा दिलाने के समान अवसर मिलते हैं.”
यह पूछे जाने पर कि यदि ‘बहन’ (आराधना मिश्रा ‘मोना’) अधिक सीटों की मांग करती हैं तो ‘भाई’ (अखिलेश यादव) क्या करेंगे, पटेल ने कहा, ‘‘ऐसा कुछ नहीं है. उत्तर प्रदेश में हम बड़े भाई हैं, बल्कि बहुत बड़े भाई हैं. वह यहां बहुत छोटे भाई हैं इसलिए उन्हें उत्तर प्रदेश की वास्तविक स्थिति को ध्यान में रखकर आगे बढ़ना चाहिए.”
उन्होंने कहा,”मैं विश्वास के साथ कह सकता हूं कि अगर वे गठबंधन के तहत चुनाव नहीं लड़ते हैं तो उनकी सीटें शून्य हो जाएंगी. इससे हमें ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा.”
इमरान मसूद पर उठाए सवाल
कांग्रेस की उत्तर प्रदेश इकाई में हुए फेरबदल पर पटेल ने कहा, “अध्यक्ष के पास पूर्ण अधिकार होने चाहिए, तो फिर ‘कार्यकारी अध्यक्ष’ की अवधारणा कहां से आई? खैर, जाने दीजिए. वह (इमरान मसूद) तरह-तरह के बयान देते रहते हैं. कभी वह दावा करते हैं कि समाजवादी पार्टी ने जो 37 सीट जीतीं, वे कांग्रेस की वजह से जीतीं, जबकि हकीकत ठीक इसके उलट है.”
पटेल ने कहा,”उन्होंने उत्तर प्रदेश में जो छह सीट जीतीं, वे वास्तव में हमारी समाजवादी पार्टी की वजह से जीतीं इसलिए वे बेवजह इमरान मसूद को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहे हैं. वह कोई बहुत बड़े जनाधार वाले नेता नहीं हैं. हमारे पास उनसे कहीं अधिक प्रमुख मुस्लिम नेता हैं.” उन्होंने कहा कि यह सिर्फ वोट की राजनीति और दबाव बनाने का तरीका है.
उन्होंने कहा,”वे यह सब यह सोचकर कहते रहते हैं कि इससे उन्हें अधिक सीटें मिलेंगी लेकिन ऐसा कुछ नहीं होगा. हम जानते हैं कि जीतने वाला उम्मीदवार कौन है और जनता वास्तव में किसका समर्थन करती है.”
कांग्रेस ने जताई नाराजगी
उधर पटेल की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए उत्तर प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता अंशु अवस्थी ने कहा,”समाजवादी पार्टी को ऐसे नेताओं पर लगाम लगाने के लिए काम करना चाहिए जो इस तरह के बयान देते हैं. ‘इंडिया’ गठबंधन की वजह से ही वह (पटेल) सांसद बने हैं. उन्हें अपनी सीमाएं पता होनी चाहिए और ऐसे बयान देने से बचना चाहिए.”
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