भारत और चीन के बीच रिश्तों को मजबूत बनाने के लिए सिनेमा एक नया जरिया बनता नजर आ रहा है. दिल्ली में आयोजित पहले चीनी फिल्म महोत्सव का समापन हो गया है. दो दिनों तक चले इस महोत्सव में दोनों देशों की 10 से ज्यादा फिल्में दिखाई गईं. फिल्म प्रेमियों को इन फिल्मों के जरिए चीन की कहानियों, वहां की संस्कृति और सिनेमा को करीब से जानने का मौका मिला.
महोत्सव के समापन समारोह में फिल्मों को सम्मानित करने के साथ भारत और चीन के बीच आगे होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों को लेकर भी एलान किए गए. इस आयोजन में चीनी दूतावास, दिल्ली इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल और नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा ने सहयोग किया.
बीजिंग में होगा इंडियन फिल्म फेस्टिवल
इस महोत्सव की सबसे खास बात यह रही कि अब चीन में भारतीय फिल्मों को दिखाने की तैयारी है. जल्द ही चीन की राजधानी बीजिंग में इंडियन फिल्म फेस्टिवल आयोजित करने का भी एलान किया गया है. इसके लिए चीन में मौजूद भारतीय दूतावास और दिल्ली इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल मिलकर काम करेंगे.

इस आयोजन का मकसद भारतीय सिनेमा को चीन के दर्शकों तक पहुंचाना है. इससे वहां के लोगों को भारतीय फिल्मों, कहानियों और संस्कृति को समझने का मौका मिलेगा. वहीं, दिल्ली में दूसरे चीनी फिल्म महोत्सव का आयोजन भी किया जाएगा. हालांकि, अभी इसकी तारीखों का ऐलान नहीं हुआ है.
‘द कंपोजर‘ को मिली बेस्ट फिल्म अवॉर्ड
दिल्ली के फिल्म्स डिवीजन ऑडिटोरियम में हुए इस महोत्सव में दिखाई गई फिल्मों में ‘द कंपोजर’ को बेस्ट फीचर फिल्म चुना गया. इसके अलावा ‘द सिंकिंग ऑफ द लिस्बन मारू’ को सिलेक्शन कमेटी चॉइस अवॉर्ड मिला. भारतीय फिल्म ‘द गर्ल विद क्लोज लिप्स’ के लिए बाल कलाकार आराध्या को भी सम्मानित किया गया.

समापन समारोह में विजेताओं को ट्रॉफी, गोल्ड मेडल और सर्टिफिकेट देकर सम्मानित किया गया. हालांकि, इस आयोजन का मुख्य मकसद सिर्फ फिल्मों को पुरस्कार देना नहीं, बल्कि दोनों देशों के कलाकारों और दर्शकों को एक-दूसरे की संस्कृति से जोड़ना भी रहा.
सिनेमा से करीब आएंगे भारत और चीन
चीनी दूतावास के मिनिस्टर काउंसलर ने नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD), संस्कृति मंत्रालय और सूचना व प्रसारण मंत्रालय (I&B Ministry) के बेमिसाल सहयोग के लिए विशेष आभार जताया है. उनका कहना है कि सिनेमा ऐसा माध्यम है, जो अलग-अलग देशों के लोगों को एक-दूसरे के करीब ला सकता है.
वहीं, महोत्सव के जूरी और थिएटर डायरेक्टर अरविंद गौड़ ने भी भारत और चीन के बीच ऐसे आयोजनों को जरूरी बताया. उनके मुताबिक, फिल्मों और कला के जरिए लोग एक-दूसरे के इतिहास, रहन-सहन और भावनाओं को बेहतर तरीके से समझ सकते हैं.














