देहरादून में नीट यूजी 2025 में फर्जी दस्तावेजों के सहारे मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस (MBBS) में प्रवेश दिलाने के मामले में देहरादून पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है. मामले का खुलासा तब हुआ जब 13 सितंबर को थाना रायपुर और थाना क्लेमेंटाउन में हुआ.
जब अलग-अलग अभ्यर्थियों द्वारा सरकारी पोर्टल पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र बनवाने के लिए दिए गए ऑनलाइन आवेदनों की जांच में इस्तेमाल किए गए दस्तावेज फर्जी पाए गए. इसके बाद जांच में सामने आई गड़बड़ियों के आधार पर थाना रायपुर और थाना क्लेमेंटाउन में बीएनएस की धाराओं में अलग-अलग मुकदमे दर्ज किए गए.
SIT टीम गठित कर दो आरोपियों को किया गिरफ्तार
मामले की गंभीरता को देखते हुए SSP देहरादून ने पुलिस अधीक्षक ग्रामीण जया बलोनी के नेतृत्व में SIT टीम गठित की, जिसके बाद टीम संबंधित शिक्षण संस्थानों तक पहुंची और वहां से भी जरूरी दस्तावेज बरामद किए जिनके अवलोकन से आरोपियों के असली पते सामने आए. मिली जानकारी और सबूतों के आधार पर एसआईटी ने रूपेश पंडित और अरविंद कुमार नामक दो व्यक्तियों को पूछताछ के लिए थाना रायपुर बुलाया, जहां पूछताछ में सामने आए तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर दोनों को मौके से गिरफ्तार कर लिया गया.
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हर एडमिशन के बदले 45 लाख रुपये लेने की बात की तय
पूछताछ में पुलिस को पता चला कि मुख्य आरोपी रूपेश पंडित पिछले पांच वर्षों से एजुकेशन कंसल्टेंसी के धंधे में सक्रिय था और मेरठ में मिकोडो पाठशाला’ के नाम से एक कंपनी भी चला रहा था. इस कंपनी की आड़ में वह विभिन्न प्राइवेट यूनिवर्सिटीज के साथ-साथ विदेशी संस्थानों में भी एमबीबीएस, बीटेक, बीसीए, बीबीए और बीकॉम जैसे कोर्सों में दाखिला दिलाने के नाम पर कमीशन पर काम करता था. दूसरा आरोपी अरविंद, रूपेश का पुराना परिचित है, जो पिछले दो-तीन वर्षों से उसे जानता था.
अरविंद ने अपनी बेटी परी का एमबीबीएस में दाखिला कराने के लिए रूपेश से संपर्क किया था और साथ ही अपने दो अन्य परिचितों के बच्चों को भी एमबीबीएस में प्रवेश दिलाने की बात कही थी. इस पर रूपेश ने अपने साथियों के साथ मिलकर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी कोटे से दाखिला दिलाने का भरोसा दिया और हर एडमिशन के बदले 45 लाख रुपये लेने की बात तय की.
तीनों अभ्यर्थियों के परिजनों से 20-20 लाख पहले ही वसूले
पुलिस के अनुसार तीनों अभ्यर्थियों के परिजनों से रूपेश और उसके साथियों ने एडवांस के रूप में 20-20 लाख रुपये पहले ही वसूल लिए थे और यह तय हुआ था कि बाकी रकम एमबीबीएस में दाखिला मिलने और कक्षाएं शुरू होने के बाद दी जाएगी.
जांच में सामने आया कि रूपेश पंडित ने अपने साथियों के साथ मिलकर तीनों अभ्यर्थियों के फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जाली स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र तैयार करवाए और इन्हीं फर्जी प्रमाण पत्रों के सहारे तीनों अभ्यर्थियों ने अलग-अलग मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस पाठ्यक्रम में दाखिला हासिल कर लिया था. पुलिस का कहना है कि एसआईटी इस पूरे प्रकरण से जुड़े हर पहलू की गहनता से जांच कर रही है और मामले से जुड़े सभी दोषियों की गिरफ्तारी जल्द की जाएगी.
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