
इस घटना के बाद से वर्षा सिंह देशभर में चर्चा में आ गई और उनको लेकर कई लोग सवाल करने लगे हैं. दरअसल वर्षा सिंह 2016 बैच की बिहार कैडर की आईएएस अधिकारी है. उनके पास ग्रेजुएशन की डिग्री है. वहीं उनका संबंध बिहार के खगड़िया जिले से हैं. आईएएस बनने के बाद उन्होंने बिहार कैडर को चुना. प्रशिक्षण के दौरान उनकी पहली तैनाती गोपालगंज में सदर एसडीएम के तौर पर हुई थी, इसके बाद वह अरवल की जिलाधिकारी भी रह चुकी है.

वैशाली की डीएम बनने से पहले वर्षा सिंह नगर विकास एवं आवास विभाग में अपर सचिव के पद पर काम कर रही थी. उन्होंने 2 जून 2025 को वैशाली के जिला अधिकारी का पद संभाला था. वैशाली में डीएम की जिम्मेदारी संभालने के बाद वर्षा सिंह कई मौके पर सीधे ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंच कर लोगों से संवाद करती नजर आई.

दूर दराज के इलाकों में वह ट्रैक्टर से पहुंचती थी. इसके अलावा एक स्कूल में उन्होंने बच्चों के साथ बैठकर लंच भी किया था. वहीं मतदाता जागरूकता के दौरान उन्होंने खुद गीत गाकर लोगों को मतदान के लिए प्रेरित किया. इसके अलावा गांव में दौरे के दौरान लोगों के साथ जमीन पर बैठकर बातचीत करना भी उनके काम का हिस्सा रहा है.

वर्षा सिंह की पहचान केवल प्रशासनिक अधिकारी के तौर पर ही नहीं, बल्कि युवाओं से जुड़ने वाली अधिकारी के रूप में भी बनी है. वह सप्ताह में दो बार स्कूली छात्र-छात्राओं से बातचीत कर उन्हें करियर और भविष्य से जुड़े ऑप्शन के बारे में मार्गदर्शन देती है. वहीं महिलाओं और बेटियों को आगे बढ़ाने के लिए वह जियो नन्ही परी पहल से भी जुड़ी है. इसका उद्देश्य परिवारों को बेटियों की शिक्षा और करियर को लेकर समान अवसर और प्रोत्साहन देने के लिए प्रेरित करना है.

हाल ही में एलपीजी संकट के दौरान भी वर्षा सिंह की निगरानी में जिला प्रशासन की ओर से गैस की उपलब्धता बनाए रखने और कालाबाजारी रोकने के लिए रणनीति तैयार की गई थी. वर्षा सिंह की कार्यशैली में लोगों के बीच रहकर उनकी समस्याओं को समझना और मौके पर जाकर स्थिति की निगरानी करना प्रमुख रूप से दिखाई देता है.
Published at : 04 Oct 2026 04:29 PM (IST)
















