
महेश काकडे का प्रमुख रिसर्च अलजेब्रिक नंबर थ्योरी से जुड़ा है. गणित की इस शाखा में बीजगणितीय संरचनाओं की मदद से संख्याओं और उनके गुणों से जुड़े सवालों को समझा जाता है. उनके रिसर्च में खासतौर पर नॉन कम्युटेटिव इवासावा थ्योरी से जुड़े जरूरी परिणाम शामिल है. इसके अलावा उन्होंने ग्रॉस स्टार्क और ब्रूमर स्टार्क अनुमान पर भी उल्लेखनीय काम किया है. उनके इस रिसर्च का संबंध डेविड हिल्बर्ट की प्रसिद्ध 12वीं समस्या से भी हैं, जो 1900 में सामने रखी गई गणित की 23 महत्वपूर्ण समस्याओं में शामिल थी.

वहीं आपको बता दें कि महेश काकडे ने गणित की शुरुआती उच्च शिक्षा इंडियन स्टैटिस्टिकल इंस्टीट्यूट बेंगलुरु से हासिल की. इसके बाद उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ कैंब्रिज से मास्टर ऑफ मैथमेटिक्स किया और 2008 में प्योर मैथमेटिक्स में पीएचडी पूरी की. उनकी पीएचडी के बाद उनका एकेडमी करियर अमेरिका और ब्रिटेन के कई प्रतिष्ठित संस्थाओं से जुड़ा रहा है.

उन्होंने प्रिंसटन यूनिवर्सिटी, यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन और किंग्स कॉलेज लंदन में काम किया. साल 2019 में वह भारत लौटे और आईआईएससी बेंगलुरु में प्रोफेसर बने, जहां वह गणित में रिसर्च और अध्यापन से जुड़े हुए हैं

रामानुजन पुरस्कार प्रोफेसर काकडे की उपलब्धियां में एक और बड़ा नाम जुड़ गया है. इससे पहले उन्हें 2022 में इंफोसिस प्राइज इन मैथमेटिकल साइंसेज मिला था. 2023 में उन्हें लंदन मैथमेटिकल सोसायटी के व्हाइटहेड प्राइज से सम्मानित किया गया और इसी साल उनका नाम एशियन साइंटिस्ट 100 में भी शामिल हुआ. वह इंटरनेशनल कांग्रेस ऑफ मैथमेटिशियन्स में आमंत्रित वक्ता भी रह चुके हैं.

रामानुजन पुरस्कार फॉर यंग मैथमेटिशियन्स फ्रॉम डेवलपिंग कंट्रीज की शुरुआत 2005 में हुई थी. इसे इंटरनेशनल सेंटर फॉर थियोरेटिकल फिजिक्स और इंटरनेशनल मैथमेटिकल यूनियन संयुक्त रूप से प्रदान करते हैं. यह सम्मान विकासशील देशों में काम करने वाले 45 वर्ष से कम उम्र के गणितज्ञों को दिया जाता है, जिन्होंने गणितीय विज्ञान के क्षेत्र में उत्कृष्ट रिसर्च किया हो.

इस पुरस्कार के साथ 10,000 अमेरिकी डॉलर की नकद राशि भी दी जाती है. यह सम्मान महान भारतीय गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन के नाम पर दिया जाता है और 2026 में इसके लिए प्रोफेसर महेश काकडे का चयन किया गया है.
Published at : 08 Oct 2026 08:26 AM (IST)















