उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच इंडिया गठबंधन की समाजवादी पार्टी (SP) और कांग्रेस के बीच जोरदार खींचतान चल रही है. सितंबर 2026 के आखिरी हफ्ते में दोनों दलों के नेताओं के बीच ऐसे बयानों की बाढ़ आ गई है, जिससे सवाल उठने लगे कि क्या यह गठबंधन टूटने की कगार पर है. हालांकि, SP प्रमुख अखिलेश यादव का कहना है कि ‘ऊपर से लड़ाई हो रही है, लेकिन अंदर से हम एकजुट हैं.’ लेकिन क्या सिर्फ सौदेबाजी का दांव है या गठबंधन का अंत…
सीटों की मांग पर असल मामला क्या है?
UP विधानसभा चुनाव के लिए SP और कांग्रेस में सीटों के लिए खींचतान लंबी है…
- कांग्रेस: UP प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने साफ कह दिया है कि कांग्रेस 150 से कम सीटों पर चुनाव नहीं लड़ेगी. कांग्रेस का तर्क है कि पिछले 20 साल के चुनावी डेटा के आधार पर उसने 150 सीटें चिह्नित की हैं, जहां उसका मुकाबला मजबूत है. इन सीटों में मुस्लिम, दलित और ब्राह्मण मतदाताओं का प्रभाव वाली सीटों को खास तौर पर शामिल किया गया है. कांग्रेस ने अक्टूबर 2026 तक सीट शेयरिंग का फॉर्मूला तय करने की बात कही है. वहीं, पार्टी के भीतर यह भी तय माना जा रहा है कि अंतिम बातचीत में करीब 100 सीटों से कम पर समझौता नहीं किया जाएगा.
- SP: अखिलेश यादव ने SP की तैयारी 350 सीटों पर बढ़ाने का ऐलान किया है. उन्होंने कहा है कि प्रत्याशी का नाम बताइए, सीट ले जाइए. यानी सीट बंटवारा सिर्फ मांगों के आधार पर नहीं होगा, बल्कि उम्मीदवार की जीतने की क्षमता ही सबसे बड़ा पैमाना बनेगी. UP में SP ने कांग्रेस को 2024 में 17 लोकसभा सीटें दी थीं, जिसके लिहाज से 80 से 85 विधानसभा सीटें 2027 के चुनाव में बनती हैं. सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस उत्तर प्रदेश में 105 से 115 सीटों की मांग कर रही है, जबकि समाजवादी पार्टी उन्हें 85 से 90 सीटें ही देने के मूड में है. राजनीतिक जानकार बताते हैं कि कांग्रेस ज्यादा सीटें चाहती है, जबकि SP करीब 50 सीटें ही देने को तैयार है.
बयानबाजी का दौर शुरू
यह विवाद जुलाई 2026 में शुरू हुआ और सितंबर 2026 के आखिरी हफ्ते में और बिगड़ गया. कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा कि ‘न करें गठबंधन, कौन कह रहा है? हम क्या किसी से भीख मांग रहे हैं?’
इसके जवाब में SP सांसद इकरा हसन ने पलटवार किया कि ‘यह बेवकूफी भरा बयान है, UP में BJP को अखिलेश ही हरा सकते हैं.’ SP नेता आईपी सिंह ने कांग्रेस के 150 सीटों के दावे पर तंज कसते हुए कहा कि ‘लुटियंस कांग्रेसियों UP की 403 सीटों पर चुनाव लड़ो, अगली 5 पुश्तों से अब कभी कोई तथाकथित गांधी PM नहीं बनेगा.’
अखिलेश ने इंडिया गठबंधन की बैठक से दूरी बनाई
अखिलेश यादव ने 30 सितंबर 2026 को इंडिया गठबंधन की बैठक में शामिल होने से इनकार कर दिया. उन्होंने कहा कि उनकी UP में पहले से व्यस्तताएं हैं और वह अपनी जगह पार्टी का प्रतिनिधिमंडल भेजेंगे. सूत्रों का कहना है कि अखिलेश यादव फिलहाल कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के साथ आमने-सामने की बैठक से बचना चाहते हैं. राजनीतिक विश्लेषक इसे कांग्रेस को संदेश के तौर पर देख रहे हैं कि SP किसी के दबाव में नहीं है.
अखिलेश यादव ने कांग्रेस के गढ़ रायबरेली से अपनी रथ यात्रा शुरू करके एक बड़ा राजनीतिक संकेत दिया है. SP का मानना है कि उत्तर प्रदेश में उनका बड़ा जनाधार है, जबकि कांग्रेस राहुल गांधी की लोकप्रियता के दम पर ज्यादा सीटें मांग रही है. खासतौर पर रायबरेली और अमेठी की कुछ प्रमुख सीटों जैसे ऊंचाहार, हरचंदपुर और अमेठी को लेकर दोनों दलों के बीच खींचतान जारी है.
सूत्रों के मुताबिक, SP ने गठबंधन की बैठक में सीट बंटवारे को लेकर चार प्रमुख मांगें रखने का प्लान बनाया है. SP, कांग्रेस से संभावित उम्मीदवारों के नामों के साथ-साथ पसंदीदा सीटों की सूची मांग सकती है. अखिलेश यादव और राहुल गांधी के बीच पहले भी उच्च स्तरीय बैठकें हो चुकी हैं. आगामी बैठक में SP प्रमुख अखिलेश यादव स्वयं मौजूद न रहकर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को भेज सकते हैं.
मुस्लिम वोट और AIMIM का कार्ड
इस पूरे घटनाक्रम में एक और बड़ा फैक्टर AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी का है. ओवैसी ने कानपुर की जनसभा से कहा कि ‘हम 2 अक्टूबर तक इंतजार करेंगे… अगर विपक्षी पार्टियां साथ आईं तो ठीक, वरना अपनी राह खुद चुनेंगे.’ ओवैसी BJP को सत्ता में लगातार तीसरी बार आने से रोकने के लिए ‘गैर-BJP एकजुटता’ की दुहाई दे रहे हैं.
अखिलेश यादव ने साफ कर दिया है कि इंडिया गठबंधन में AIMIM को शामिल नहीं किया जाएगा. SP को लगता है कि मुस्लिम वोट बड़े पैमाने पर उसके पास आएगा. यही वजह है कि सीट शेयरिंग की बातचीत आगे नहीं बढ़ रही है.
BJP और अन्य दलों की प्रतिक्रिया
BJP प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कहा कि ‘राहुल गांधी उत्तर प्रदेश में गठबंधन के तहत ज्यादा सीटें हासिल करने के लिए अखिलेश यादव से मोल-भाव कर रहे हैं.’ उन्होंने कहा कि कांग्रेस की बुलाई बैठक में शामिल न होकर SP ने विपक्ष की एकता के नाम पर राहुल गांधी के दावों की पोल खोल दी है.
सुभासपा अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने SP-कांग्रेस गठबंधन को ‘ठगबंधन’ करार दिया है. उन्होंने कहा कि ‘राजनीति में कभी भी कुछ भी संभव है’ और 1995 के चर्चित गेस्ट हाउस कांड की याद दिलाई. राजभर का कहना है कि ‘ओवैसी, अखिलेश और राहुल गांधी का गठबंधन नहीं होगा.’
क्या यह महज दबाव की राजनीति है?
पॉलिटिकल एक्सपर्ट रशीद किदवई का मानना है कि यह पूरी लड़ाई सीट बंटवारे में ज्यादा से ज्यादा हिस्सा पाने की कोशिश है. सीट शेयरिंग की बहस में ‘प्रेशर पॉलिटिक्स’ हावी है, जिसे मीडिया बयानों से हवा मिल रही है. कांग्रेस जल्दी सीट शेयरिंग फाइनल करना चाहती है, जबकि SP ‘हार्ड बार्गेन’ करने के मूड में है और किसी भी तरह के दबाव में नहीं आना चाहती.
2024 के लोकसभा चुनाव में SP और कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश में मिलकर चुनाव लड़ा था. उस समय SP ने 80 में से 63 सीटों पर और कांग्रेस ने 17 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे. नतीजा यह हुआ कि गठबंधन ने 80 में से 43 सीटें जीत लीं. SP को 37 और कांग्रेस को 6 सीटें मिलीं. BJP का आंकड़ा 62 से घटकर 33 पर आ गया. यह गठबंधन की बड़ी सफलता थी. अब विधानसभा चुनाव की बारी है, जहां 403 सीटें हैं और दोनों दलों की मांगें आमने-सामने हैं.
2024 का सबक और 2027 की चुनौती
रशीद किदवई कहते हैं कि 2024 के लोकसभा चुनाव में SP-कांग्रेस गठबंधन को बड़ी सफलता मिली थी, लेकिन विधानसभा चुनाव में यह फॉर्मूला हमेशा काम नहीं करता.
2017 के विधानसभा चुनाव में SP और कांग्रेस ने गठबंधन करके चुनाव लड़ा था, लेकिन BJP को प्रचंड जीत मिली थी. उस चुनाव में BJP ने 312 सीटें जीतीं, BSP को 19, SP को 47 और कांग्रेस को 7 सीटें मिलीं. 2022 में दोनों दलों ने अलग-अलग चुनाव लड़ा, जिसमें SP का वोट शेयर 21.8 प्रतिशत से बढ़कर 32.06 प्रतिशत हो गया और कांग्रेस का वोट शेयर 6.25 प्रतिशत से घटकर 2.33 प्रतिशत रह गया.
SP सांसद जियाउर्रहमान बर्क का संदेश
संभल के SP सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने पार्टी नेताओं से बयानबाजी से बचने की अपील की है. उन्होंने कहा कि ‘अखिलेश यादव का रुख बिल्कुल पॉजिटिव है और बिल्कुल मिलकर ही चुनाव को INDIA गठबंधन के तहत उत्तर प्रदेश में लड़ेंगे.’
वहीं, 30 सितंबर 2026 को अखिलेश यादव ने कहा, ‘जो गठबंधन पहले था, वही आगे भी रहेगा, यानी पार्टी कांग्रेस के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ेगी.’ यह बयान इस पूरे विवाद पर एक बड़ा संकेत है कि दोनों दलों को पता है कि अलग होने का मतलब BJP की जीत है, इसलिए आखिर में कोई न कोई रास्ता निकलेगा.
तो क्या गठबंधन टूटने वाला नहीं है?
रशीद किदवई के मुताबिक, दोनों दलों के बीच औपचारिक सीट बंटवारे की बातचीत अक्टूबर 2026 में शुरू होने की उम्मीद है. अगर दोनों दल सीटों पर सहमति बना लेते हैं, तो इंडिया गठबंधन मजबूत स्थिति में होगा. अगर बातचीत टूट जाती है, तो दोनों दल अलग-अलग चुनाव लड़ सकते हैं, जिसका सीधा फायदा BJP को मिलेगा.
कुल मिलाकर, SP और कांग्रेस के बीच यह टकराव गठबंधन टूटने का संकेत नहीं, बल्कि सीटों के बंटवारे में अपनी-अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की कोशिश है. 2024 के लोकसभा चुनाव में भी राहुल-अखिलेश में जमकर बयानबाजी हुई थी. फिर आखिर में एक जॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस ने सब ठीक कर दिया.














