• Home
  • देश-दुनिया की खबरें
  • Explained: सड़कों पर आगजनी और विरोध प्रदर्शन, भारी कर्ज और बजटीय घाटे के दलदल में क्यों फंसा फ्रांस?
Image

Explained: सड़कों पर आगजनी और विरोध प्रदर्शन, भारी कर्ज और बजटीय घाटे के दलदल में क्यों फंसा फ्रांस?


फ्रांस में इस समय हाल के वर्षों का सबसे भयंकर जन-आक्रोश देखने को मिल रहा है. एक महीने से जारी छात्र आंदोलन अब पूरे देश में फैल चुका है, जहां लोग बढ़ती महंगाई और गिरती सार्वजनिक सेवाओं  के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं.

देशभर में 5 लाख से अधिक लोग प्रदर्शनों में भाग ले चुके हैं. कई जगहों पर हिंसक झड़पें हुई हैं, दुकानों में तोड़फोड़ की गई और सरकारी इमारतों व ऐतिहासिक संपत्तियों को आग के हवाले कर दिया गया. देश भर में लगभग 1,800 लोगों को गिरफ्तार किया गया है.

2027 के राष्ट्रपति चुनाव से ठीक पहले राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की सरकार पर भारी दबाव बन गया है. इस पूरे संकट की जड़ में दो आपस में जुड़े मुख्य मुद्दे हैं, पहला राजनीतिक विखंडन और दूसरा गहराता आर्थिक दबाव.

फ्रांस में राजनीतिक समस्या

फ्रांस वैचारिक और राजनीतिक रूप से दो ध्रुवों में बंटा हुआ है. पहला राइट विंग विचारधारा. यह गुट आप्रवासन पर सख्ती, राष्ट्रीय पहचान और कल्याणकारी योजनाओं पर कड़े नियंत्रण पर जोर देता है.

वहीं दूसरी ओर वामपंथी पक्ष है जो बेहतर सार्वजनिक सेवाओं, संपत्ति के पुनर्वितरण और श्रमिकों के अधिकारों की मांग करता है.

इमैनुएल मैक्रों का मध्यमार्गी गठबंधन संसद में अपना पूर्ण बहुमत खो चुका है. इसके परिणामस्वरूप, सरकार के लिए नए बजट पास कराना और आर्थिक सुधार लागू करना बेहद मुश्किल हो गया है. स्थिति यह है कि राजनीतिक गतिरोध के कारण यह तय नहीं हो पा रहा है कि आर्थिक संकट का बोझ किसे उठाना चाहिए और किन सरकारी खर्चों में कटौती की जानी चाहिए.

आर्थिक समस्या, कमाई से ज्यादा खर्च
फ्रांस के पास एक व्यापक वेलफेयर मॉडल है, जो नागरिकों को पेंशन, स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा और सामाजिक लाभ प्रदान करता है. यह व्यवस्था टैक्स और सामाजिक योगदान से चलती है.

समस्या केवल यह नहीं है कि सरकार खर्च बहुत ज्यादा करती है, बल्कि मुख्य समस्या यह है कि बिना किसी असाधारण आपातकाल (जैसे युद्ध) के भी सरकारी खर्च लगातार सरकारी राजस्व से अधिक रहता है.

आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (OECD) के अनुसार, 2025 में फ्रांस का बजटीय घाटा उसकी जीडीपी का 5.1% रहा. फ्रांस का सार्वजनिक कर्ज बढ़कर जीडीपी का 115.5% हो गया है.

2023 से फ्रांस की औसतन जीडीपी वृद्धि दर केवल 1.4% के आसपास रही है. विकास की सुस्त रफ्तार के कारण टैक्स से होने वाली आय इतनी तेजी से नहीं बढ़ पा रही कि कर्ज के बोझ को कम किया जा सके.

क्यों सबसे केंद्रीय मुद्दा बना पेंशन?
पेंशन खर्च फ्रांस के सार्वजनिक वित्त पर सबसे बड़ा दबाव है. फ्रांस की आबादी बुजुर्ग हो रही है और लोगों की जीवन प्रत्याशा बढ़ रही है. इसका मतलब है कि सरकार को लंबी अवधि तक सेवानिवृत्ति लाभ देने पड़ रहे हैं, जबकि टैक्स देने वाली कामकाजी आबादी उस अनुपात में नहीं बढ़ रही है.

मैक्रों सरकार ने सेवानिवृत्ति की आयु को 62 से बढ़ाकर 64 वर्ष करने का प्रयास किया था, लेकिन वामपंथी और दक्षिणपंथी दोनों पक्षों के कड़े विरोध के कारण यह सुधार ठप हो गया.

नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री पॉल क्रुगमैन के अनुसार, फ्रांस की मुख्य वित्तीय समस्या यह है कि वह सेवानिवृत्ति को लेकर वास्तविक दृष्टिकोण अपनाने में असमर्थ रहा है.

क्रुगमैन लिखते हैं कि बहुत अधिक उदार पेंशन प्रणाली के कारण सरकार को शिक्षा जैसे अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों के खर्चों में कटौती करनी पड़ी है. यानी फ्रांस युवा पीढ़ी और शिक्षा की कीमत पर बुजुर्गों को भारी सब्सिडी दे रहा है. यही कारण है कि आज छात्र कक्षाओं में भीड़, शिक्षकों की कमी और जर्जर स्कूल भवनों को लेकर सड़कों पर आंदोलन कर रहे हैं.

फ्रांस सरकार अधिक कर्ज क्यों नहीं ले सकती?
जब सरकारें लगातार घाटे में चलती हैं, तो वे कर्ज लेती हैं. लेकिन निवेशकों को जब यह डर लगने लगता है कि कर्ज बहुत तेजी से बढ़ रहा है, तो वे अधिक ब्याज दरों की मांग करते हैं. इससे नया कर्ज लेना महंगा हो जाता है और बजट का बड़ा हिस्सा सिर्फ ब्याज चुकाने में चला जाता है, जिससे सार्वजनिक सेवाओं के लिए पैसा नहीं बचता.

यूरो ज़ोन की चुनौती
पॉल क्रुगमैन बताते हैं कि फ्रांस के लिए यूरोपियन यूनियन और ‘यूरो’ करेंसी का हिस्सा होना स्थिति को और जटिल बनाता है. फ्रांस स्वतंत्र रूप से अपनी मुद्रा नहीं छाप सकता, जबकि अपनी खुद की मुद्रा वाले देश संकट के समय पैसे छापकर काम चला लेते हैं.

समाधान क्या है और चुनौती क्यों बड़ी है?
ऐसा नहीं है कि फ्रांसीसी अर्थव्यवस्था में ताकत नहीं है, लेकिन आर्थिक समस्याओं को दूर करने के लिए जो कड़े कदम (जैसे टैक्स बढ़ाना, पेंशन सुधारना, या खर्च में कटौती करना) चाहिए, वे सभी राजनीतिक रूप से नुकसानदेह हैं.

यही फ्रांस की सबसे बड़ी दुविधा है. नागरिक बेहतर सेवाओं और महंगाई से राहत की मांग कर रहे हैं, जबकि अंतरराष्ट्रीय निवेशक कर्ज को नियंत्रित करने के लिए कड़े फैसलों की मांग कर रहे हैं. विभाजित संसद और आगामी राष्ट्रपति चुनावों के माहौल में किसी सहमति तक पहुंचना बेहद कठिन हो गया है.



Source link

Related Posts

टूटा कांच, मलबा, फ्रांस में प्रदर्शनकारियों ने फूंकी इमारतें, मैक्रों बोले- ‘जो लोग…’

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने देश में शांति और व्यवस्था बनाए रखने की अपील की है. हाल…

ByByPUJA KUMARI Oct 19, 2026

‘भारत-विरोधी ताकतें कभी…’, लंदन के वीडियो को लेकर रिजिजू का कांग्रेस पर तंज

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने एक बार फिर से कांग्रेस पार्टी पर निशाना साधा है. उन्होंने लंदन में…

ByByPUJA KUMARI Oct 19, 2026

फ्रांस की हिंसा पर ईरान ने दी चेतावनी, अराघची बोले- ‘मिस्टर मैक्रों, अब…’

फ्रांस में महंगाई और पब्लिक सर्विस के खराब हालात के खिलाफ हिंसक प्रदर्शन हो रहे हैं. कई शहरों…

ByByPUJA KUMARI Oct 19, 2026

Explained: फ्रांस से लेकर पुर्तगाल और इटली तक, आखिर क्यों सुलग रहा है यूरोप

वर्तमान समय में दुनिया के कई प्रमुख देशों में गंभीर आर्थिक संकट, महंगाई, आवास की भारी कमी और…

ByByPUJA KUMARI Oct 19, 2026

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top