Cost Of Studying Abroad: भारतीय छात्रों के बीच विदेश जाकर उच्च शिक्षा हासिल करने का क्रेज लगातार बढ़ता जा रहा है. हर साल लाखों छात्र अपने सुनहरे भविष्य के लिए परदेस का रुख करते हैं. लेकिन विदेश में पढ़ाई करना हर किसी के बजट में नहीं होता. वैश्विक स्तर पर पढ़ाई के खर्चों का विश्लेषण करने वाली विभिन्न रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया में कई ऐसे देश हैं जहां शिक्षा हासिल करना बेहद खर्चीला सौदा है.
आम तौर पर लोगों को लगता है कि सिर्फ मेडिकल या इंजीनियरिंग जैसे बड़े प्रोफेशनल कोर्सेज की फीस ही करोड़ों में होती है, लेकिन असलियत यह है कि इन देशों में एक साधारण बीए या किसी अन्य ग्रेजुएशन डिग्री के लिए भी भारतीय छात्रों को हर साल लाखों-करोड़ों रुपये ट्यूशन फीस और रहने के खर्च के रूप में चुकाने पड़ते हैं.
नंबर वन पर अमेरिका, फीस भरते-भरते जेब हो जाएगी खाली
विदेशी शिक्षा के मामले में संयुक्त राज्य अमेरिका को दुनिया का सबसे महंगा देश माना गया है. अमेरिका की पब्लिक और प्राइवेट यूनिवर्सिटीज में फीस का ढांचा बेहद ऊंचा है. एक अंतरराष्ट्रीय छात्र को अमेरिका में सिर्फ ट्यूशन फीस के नाम पर ही हर साल औसतन 20,000 से लेकर 45,000 अमेरिकी डॉलर तक खर्च करने पड़ते हैं. अगर भारतीय रुपये में इसकी गणना की जाए तो यह राशि लगभग 20 लाख से 40 लाख रुपये सालाना बैठती है.
चूंकि अमेरिका में ग्रेजुएशन का कोर्स चार साल का होता है, इसलिए सिर्फ एक बीए पूरा करने में ही कुल खर्च 80 लाख से 2 करोड़ रुपये तक पहुंच जाता है. इसके अलावा न्यूयॉर्क या लॉस एंजेलिस जैसे बड़े शहरों में रहने और खाने का मासिक खर्च भी करीब 1 लाख से 2.5 लाख रुपये तक होता है.
ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन में भी पढ़ाई है बेहद भारी
महंगी शिक्षा के मामले में ऑस्ट्रेलिया दूसरे और यूनाइटेड किंगडम तीसरे स्थान पर आते हैं. ऑस्ट्रेलिया में अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए सालाना ट्यूशन फीस 20,000 से 45,000 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर तक होती है. भारतीय मुद्रा में यह करीब 15 लाख से 30 लाख रुपये सालाना सिर्फ कॉलेज की फीस होती है.
तीन साल की बीए डिग्री के लिए यहां 45 लाख से 90 लाख रुपये का बजट चाहिए होता है. वहीं ब्रिटेन की बात करें तो वहां बैचलर्स कोर्सेज की फीस 15 लाख से 25 लाख रुपयेसालाना के बीच वैरी करती है. लंदन जैसे शहरों में पढ़ाई के साथ रहने का खर्च जोड़ दिया जाए, तो एक साल का कुल खर्च आसानी से 30 लाख रुपये पार हो जाता है.
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कनाडा और न्यूजीलैंड की स्थिति भी नहीं है कम
चौथे और पांचवें पायदान पर कनाडा और न्यूजीलैंड जैसे देश आते हैं. कनाडा में हालांकि अमेरिका से थोड़ी राहत मिलती है, लेकिन फिर भी वहां अंतरराष्ट्रीय छात्रों को सालाना 15 लाख से 25 लाख रुपये तक ट्यूशन फीस देनी पड़ती है. इसके अलावा कनाडाई सरकार द्वारा रहने के खर्च के नियमों में किए गए हालिया बदलावों के बाद छात्रों के लिए वहां रहना और महंगा हो गया है.
वहीं न्यूजीलैंड में भी हर साल शिक्षा और स्वास्थ्य बीमा मिलाकर करीब 16 लाख से 25 लाख रुपये का सालाना खर्च आता है, जो एक मध्यमवर्गीय भारतीय परिवार के लिए काफी बड़ी रकम है.
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