
31 अक्टूबर 1984 को मिशिगन के रोचेस्टर हिल्स में जन्मे अब्दुल एल सैय्यद का पालन पोषण अलग-अलग कल्चरल माहौल में हुआ, उनके पिता मोहम्मद इजिप्ट से आए प्रवासी थे, जबकि उनकी सौतेली मां जैकी का परिवार 1800 के दशक से मिशिगन में रह रहा है.

वहीं उन्होंने मिशिगन के पब्लिक स्कूलों से पढ़ाई की. वह पढ़ाई के साथ-साथ खेलों में भी अव्वल रहे और हाई स्कूल में फुटबॉल, कुश्ती वह लैक्रोस टीमों के कप्तान रहे. उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ मिशीगन के सर्वोच्च सम्मान के साथ ग्रेजुएशन के डिग्री प्राप्त की.

इसके बाद उन्होंने कोलंबिया यूनिवर्सिटी से नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ फेलोशिप के तहत मेडिकल की पढ़ाई पूरी की. साथ ही प्रतिष्ठित ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से रोड्स स्कॉलर के रूप में अपनी दूसरी डॉक्टरेट की उपाधि हासिल की.

डॉक्टरी की पढ़ाई और ट्रेनिंग पूरी करने के बाद उन्होंने महसूस किया कि आम लोगों की स्वास्थ्य समस्याओं की मुख्य वजह राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था की कमियां है. इसके बाद अब्दुल एल सैय्यद ने जन सेवा के क्षेत्र में कदम रखा. वहीं उन्होंने डेट्रॉयट के दिवालिया होने के बाद वहां के स्वास्थ्य विभाग को दोबारा खड़ा किया.

वेन काउंटी के स्वास्थ्य मानव एवं पूर्व सैनिक सेवा विभाग के निदेशक के रूप में 18 लाख नागरिकों की उन्होंने जिम्मेदारी संभाली. वहीं बच्चों के लिए मुफ्त चश्मे की व्यवस्था, स्कूलों से लीड हटाना और ओपिऑयड ओवरडोज रोकने वाली दवा नारकन को सुलभ बनाना उनके प्रमुख कामों में शामिल हैं. उन्होंने एक योजना का नेतृत्व किया, जिसका टारगेट मिशिगन के तीन लाख लोगों का करीब 700 मिलियन डॉलर का मेडिकल कर्ज माफ करना था.

अब्दुल एल सैय्यद की ऐतिहासिक जीत का भारत के कर्नाटक राज्य से भी एक गहरा व्यक्तिगत रिश्ता है. उनकी पत्नी डॉ. सारा जुकाकू एक मनोचिकित्सा है, जिनकी पारिवारिक जड़े कर्नाटक के भटकल से जुड़ी है. सारा के दादा जुकाकू शमसुद्दीन मैसूर राज्य के तत्कालीन मुख्यमंत्री बी.डी. जत्ती की सरकार के में वित्त उप मुख्यमंत्री रह चुके हैं.
Published at : 06 Nov 2026 06:36 PM (IST)
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