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Explained: सबा हैदर का भारत से क्या रिश्ता? US मिडटर्म में 71% वोटों से दर्ज की शानदार जीत


अमेरिका के 2026 मिडटर्म चुनावों में भारतीय मूल के कम से कम 30 उम्मीदवारों ने जीत हासिल की, लेकिन इनमें एक नाम ने सबका ध्यान खींचा- सबा हैदर. 42 वर्षीय सबा ने इलिनोइस की 84वीं हाउस डिस्ट्रिक्ट से डेमोक्रेटिक पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ते हुए रिपब्लिकन उम्मीदवार ब्रायन स्कोपा को करारी शिकस्त दी. सबा को 20,756 वोट (70.9%) मिले, जबकि स्कोपा के खाते में सिर्फ 8,520 वोट (29.1%) आए. इस जीत के साथ ही सबा हैदर इलिनोइस जनरल असेंबली में चुनी जाने वाली पहली दक्षिण एशियाई महिला बन गई हैं.

सबा की कहानी ऐसी महिला की है जो वाइल्डलाइफ साइंस की गोल्ड मेडलिस्ट से कैसे इलिनोइस की राज्य विधानसभा तक पहुंची…

बुलंदशहर से अलीगढ़ तक: पढ़ाई में टॉपर, बहस में माहिर

सबा हैदर का जन्म भारत में हुआ और उनके परिवार की जड़ें बुलंदशहर जिले के औरंगाबाद कस्बे में हैं. उनके पिता सैयद अली हैदर एक रिटायर्ड इंजीनियर हैं और मां चांदनी हैं. पिता के काम की वजह से परिवार गाजियाबाद में बस गया और सबा की परवरिश वहीं हुई.

पढ़ाई में सबा शुरू से ही तेज थीं. उन्होंने गाजियाबाद के होली चाइल्ड स्कूल से स्कूली शिक्षा पूरी की और राम चमेली चड्ढा विश्वास गर्ल्स कॉलेज से BSc की. यहां वे अपनी क्लास में टॉपर रहीं. इसके बाद अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) से वाइल्डलाइफ साइंस में मास्टर्स किया और गोल्ड मेडल हासिल किया. AMU में पढ़ाई के दौरान उन्होंने वन्यजीव गणना जैसे फील्डवर्क में भी हिस्सा लिया.

मां चांदनी बताती हैं कि सबा को बचपन से ही पब्लिक अफेयर्स में दिलचस्पी थी. वे स्कूल-कॉलेज के डिबेट और ओरेटरी कॉम्पिटिशन में लगातार हिस्सा लेती थीं. यही झुकाव आगे चलकर उन्हें राजनीति की तरफ ले गया. हालांकि तब किसी ने नहीं सोचा होगा कि यह सफर इलिनोइस की विधानसभा तक पहुंचेगा.

2007 में अमेरिका: शादी, योगा और एक नई जिंदगी

2006 में सबा की शादी अली काजमी से हुई, जो बुलंदशहर के एक कंप्यूटर साइंस इंजीनियर हैं. 2007 में शादी के बाद वे अमेरिका चली गईं और शिकागो के आसपास के इलाके में बस गईं. आज उनके दो बच्चे हैं बेटा अprम (16) और बेटी आइजा (12).

अमेरिका में सबा ने अपनी पहचान दोबारा बनाई. उन्होंने सर्टिफाइड योगा टीचर की ट्रेनिंग ली और कॉलेज स्टूडेंट्स से लेकर कॉर्पोरेट प्रोफेशनल्स तक को योगा सिखाया. यह कम्युनिटी से जुड़ने का जरिया भी बना. शिकागो में भारतीय वाणिज्य दूतावास के योगा कार्यक्रमों में भी उन्होंने एक्सपर्ट इंस्ट्रक्टर के तौर पर हिस्सा लिया.

सबा खुद कहती हैं, ‘जब से मैं यहां आई हूं, मैंने अपनी जिंदगी उस कम्युनिटी को वापस देने में लगाई है जिसने मुझे और मेरे परिवार को इलिनोइस को अपना घर बनाने में मदद की.’ यही ‘देना’ आगे चलकर उनकी राजनीति का आधार बना.

राजनीति का पहला इम्तिहान: 2022 में हार, 2024 में वापसी

सबा की राजनीति में एंट्री कोई रातों-रात सफलता की कहानी नहीं थी. उन्होंने 2022 में पहली बार ड्यूपेज काउंटी बोर्ड का चुनाव लड़ा और करीब 1,000 वोटों से हार गईं.

यह हार उन्हें तोड़ नहीं पाई. वे लगातार लोगों से मिलती रहीं, कैनवासिंग करती रहीं और रिश्ते बनाती रहीं. 2024 में उन्होंने दोबारा चुनाव लड़ा और इस बार रिपब्लिकन इनकंबेंट पैटी गस्टिन को करीब 8,521 वोटों के अंतर से हराकर ड्यूपेज काउंटी बोर्ड की सदस्य चुनी गईं. ड्यूपेज काउंटी इलिनोइस की दूसरी सबसे बड़ी काउंटी है और करीब 10 लाख लोगों का प्रशासन चलाती है.

काउंटी बोर्ड में रहते हुए सबा ने एनवायर्नमेंट और स्ट्रैटेजिक प्लानिंग कमेटियों की अध्यक्षता की. उन्होंने पब्लिक हेल्थ बोर्ड और इंडियन प्रेयरी एजुकेशनल फाउंडेशन जैसी संस्थाओं में भी अहम भूमिका निभाई. इस अनुभव ने उन्हें राज्य स्तर की राजनीति के लिए तैयार किया.

2026 की ऐतिहासिक जीत: 15 महीने की मेहनत, 71% वोट

राज्य विधानसभा का चुनाव लड़ते समय सबा ने 15 महीने तक लगातार डिस्ट्रिक्ट के हर कोने में जाकर वोटर्स से बात की. यह जीत ग्रासरूट और पीपल-पावर्ड मूवमेंट का नतीजा थी. सबा ने अपने कैंपेन में किफायती हेल्थकेयर, बेहतर शिक्षा और बढ़ती लागत के बोझ को अहम मुद्दा बनाया.

यह जीत क्यों मायने रखती है?

सबा हैदर की जीत सिर्फ एक सीट जीतने की कहानी नहीं है. यह तीन बड़े संदेशों की कहानी है.

  • साउथ एशियाई महिलाओं के लिए रास्ता खुला: इलिनोइस जनरल असेंबली में पहली बार कोई साउथ एशियाई मूल की महिला पहुंची है. यह उन लाखों अप्रवासी महिलाओं के लिए एक प्रतीक है जो राजनीति में आना चाहती हैं लेकिन डरती हैं.
  • नामुमकिन से मुमकिन का सफर: वाइल्डलाइफ साइंस की गोल्ड मेडलिस्ट से योगा इंस्ट्रक्टर और फिर काउंटी बोर्ड से राज्य विधानसभा तक सफर बताता है कि अमेरिकी राजनीति में एंट्री के लिए कोई एक तय रास्ता नहीं होता. स्थानीय स्तर पर कम्युनिटी से जुड़ाव और लगातार मेहनत किसी भी पृष्ठभूमि से आने वाले व्यक्ति को आगे बढ़ा सकती है.
  • भारतीय-अमेरिकियों का बढ़ता राजनीतिक वजूद: 2026 के मिडटर्म में कम से कम 30 भारतीय-अमेरिकी उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की. सबा की जीत इस बढ़ती हुई राजनीतिक भागीदारी का हिस्सा है.

अब सबा हैदर स्प्रिंगफील्ड (इलिनोइस की राजधानी) पहुंचेंगी और राज्य विधानसभा में डिस्ट्रिक्ट 84 के लोगों की आवाज बनेंगी. उनका कहना है कि वे वर्किंग फैमिलीज की समस्याओं को प्राथमिकता देंगी और हेल्थकेयर, शिक्षा और महंगाई से जुड़े मुद्दों पर काम करेंगी.



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