सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने अपने ‘रिजीम चेंज’ वाले बयान को लेकर एक बार फिर केंद्र सरकार और बीजेपी पर निशाना साधा है. वहीं, दिल्ली में होने वाली विपक्ष की रैली पर एतराज जताने वाले व्यापारियों को लेकर उन्होंने विवादित टिप्पणी करते हुए कहा है कि व्यापारी तो वैसे भी बीजेपी के गुर्गे होते हैं. उन्होंने कहा कि दिल्ली रैली को लेकर जो व्यापारी सवाल उठा रहे हैं, वे बीजेपी के गुर्गे हैं. सरकार इन पर दबाव डालकर कुछ भी करवा लेती है.
प्रशांत भूषण जयपुर प्रेस क्लब में संविधान पर आयोजित सेमिनार में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होने पहुंचे थे. इस दौरान मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि जहां भीड़ जुटती है, वहां व्यापारियों को फायदा होता है. जो व्यापारी रैली पर एतराज जता रहे हैं, उन्हें बताना चाहिए कि इससे उनका नुकसान कैसे होगा. नुकसान तो तब होता है, जब सरकार और पुलिस रास्ते व बाजार बंद कराती है.
‘कोहराम मचता है तो मचने दीजिए’
जब उनसे कहा गया कि व्यापारियों को बीजेपी का गुर्गा बताने वाले उनके बयान पर फिर से विवाद हो सकता है, तो उन्होंने कहा कि अगर कोहराम मचता है तो मचने दीजिए. बाद में उन्होंने अपनी बात स्पष्ट करते हुए कहा कि रैली पर सवाल उठाने वाले व्यापारी बीजेपी के ही गुर्गे हैं.
‘इतिहास की सबसे बेकार सरकार’
प्रशांत भूषण ने अपने रिजीम चेंज वाले बयान को दोहराते हुए कहा कि यह इतिहास की सबसे बेकार सरकार है. उनके मुताबिक, इस सरकार में लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर किया गया है और लोगों के मौलिक अधिकारों को कुचला गया है. इसलिए लोग मौजूदा रिजीम को खत्म कर नया रिजीम चाहते हैं. हालांकि, उन्होंने साफ किया कि वे किसी तरह के दंगे या हिंसा के जरिए बदलाव नहीं चाहते. उनका कहना था कि लोकतांत्रिक तरीके से ही सरकार बदलनी चाहिए.
बीजेपी नेताओं की ओर से उनके और राहुल गांधी के विदेशी ताकतों के हाथों में खेलने के आरोपों पर प्रशांत भूषण ने पलटवार किया. उन्होंने कहा कि सरकार को बताना चाहिए कि वे किन विदेशी ताकतों के हाथ में खेल रहे हैं. सरकार के खिलाफ बोलने या उसकी आलोचना करने वालों को विदेशी एजेंट बता दिया जाता है.
‘देश में नुकसार पहुंचा रही बीजेपी’
उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी देश में नुकसान पहुंचा रही है और फिर इसके पीछे विदेशी ताकतों का हाथ होने की बात कहती है. भूषण ने कहा कि बीजेपी गलत प्रचार कर रही है कि विपक्ष हिंसा और दंगा चाहता है, जबकि विपक्ष के आंदोलन शांतिपूर्ण रहे हैं.
‘लोगों को सड़कों पर उतरना जरूरी’
दिल्ली में होने वाली इंडिया गठबंधन की रैली को उन्होंने पूरी तरह जायज बताया. भूषण ने कहा कि देश में जिस तरह के हालात हैं और लोकतंत्र की हाईजैकिंग हुई है, उसमें बड़ी संख्या में लोगों का सड़कों पर उतरना जरूरी है. हालांकि, उन्होंने दोहराया कि आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण होना चाहिए. उनके मुताबिक, विपक्ष के आंदोलनों में हिंसा नहीं हुई, बल्कि हिंसा सरकार के इशारे पर पुलिस और बीजेपी के लोगों ने की है.
‘भारत में शांतिपूर्ण तरीके से हो रिजीम चेंज’
बीजेपी की ओर से बांग्लादेश और दूसरे देशों में हुए सत्ता परिवर्तन का उदाहरण देने पर भी भूषण ने प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि भारत और दूसरे देशों के हालात में फर्क है. वहां रिजीम चेंज के दौरान खून-खराबा हुआ, लेकिन भारत में वे शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से सत्ता परिवर्तन चाहते हैं.















