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अब किसके हाथ में इजरायली सत्ता की चाबी? नेतन्याहू-आइजेनकोट के बीच टक्कर, कैसे होगा फैसला?


इजरायल में अक्टूबर के संसदीय चुनाव के बाद किसी भी गठबंधन को सरकार बनाने के लिए जरूरी बहुमत नहीं मिला है. ऐसे में सरकार गठन को लेकर बातचीत तेज हो गई है. इस बीच अरब पार्टियों की भूमिका अहम हो गई है. उनके पास कुल 19 सीटें हैं. अगर ये पार्टियां विपक्षी गठबंधन का समर्थन करती हैं तो बेंजामिन नेतन्याहू को सत्ता से बाहर करने का रास्ता खुल सकता है. लेकिन विपक्ष के अंदर ही अरब पार्टियों से समर्थन लेने को लेकर मतभेद हैं.

इजरायल की संसद में कुल 120 सीटें हैं. सरकार बनाने के लिए कम से कम 61 सांसदों का समर्थन जरूरी है. चुनाव के बाद नेतन्याहू के दक्षिणपंथी गठबंधन को 53 सीटें मिली हैं, जबकि गादी ईसेनकोट के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन के पास 48 सीटें हैं. दो अरब पार्टियों के पास मिलाकर 19 सीटें हैं. इस तरह किसी भी खेमे के पास अपने दम पर बहुमत नहीं है.

अरब पार्टियां बन सकती हैं सरकार गठन में निर्णायक

CBC की रिपोर्ट के मुताबिक अरब पार्टियों में संयुक्त सूची (जॉइंट लिस्ट) को 11 और राम (Ra’am) पार्टी को 8 सीटें मिली हैं. दोनों के पास मिलाकर 19 सीटें हैं. अगर ये पार्टियां ईसेनकोट के गठबंधन को समर्थन देती हैं, तो उसके पास 67 सीटों का आंकड़ा हो सकता है. इस तरह सरकार बनाने के लिए जरूरी 61 सीटों से ज्यादा समर्थन मिल सकता है.

अरब पार्टियों ने नेतन्याहू को सत्ता से बाहर करने के लिए विपक्ष के साथ काम करने की इच्छा जताई है. हालांकि, यह जरूरी नहीं कि वे सरकार में शामिल ही हों. वे बाहर से समर्थन देने का विकल्प भी अपना सकती हैं.

विपक्ष में ही अरब पार्टियों के समर्थन पर मतभेद

गादी ईसेनकोट के गठबंधन में शामिल सभी दल अरब पार्टियों के साथ सहयोग करने को तैयार नहीं हैं. पूर्व प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट की पार्टी बी’याचद और एविग्डोर लिबरमैन की यिसरायल बेतेनु ने चुनाव प्रचार के दौरान अरब पार्टियों के साथ सरकार बनाने से इनकार किया था.

डेमोक्रेट्स पार्टी के नेता यायर गोलान ने अरब पार्टियों के साथ मिलकर काम करने की बात कही है. इससे विपक्ष के सामने मुश्किल खड़ी हो गई है. एक तरफ नेतन्याहू को सत्ता से हटाने के लिए बहुमत जुटाना जरूरी है, तो दूसरी तरफ गठबंधन के कुछ नेता अरब पार्टियों का समर्थन लेने के पक्ष में नहीं हैं.

इजरायल में राजनीतिक पार्टियों का गठबंधन

इजरायल में चुनाव से पहले राजनीतिक पार्टियां गठबंधन बनाती हैं और सरकार बनाने के लिए एक-दूसरे को समर्थन देने का वादा करती हैं. लेकिन चुनाव के बाद राजनीतिक हालात बदलने पर पार्टियां नए गठबंधन भी बना सकती हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या इजरायल में कोई पार्टी चुनाव से पहले किया गया गठबंधन तोड़ सकती है? क्या कोई सांसद अपनी पार्टी छोड़कर दूसरी पार्टी में जा सकता है? और क्या ऐसा करने पर उसकी संसद की सदस्यता खत्म हो जाती है? इजरायल में इन मामलों के लिए दलबदल से जुड़े नियम हैं. हालांकि, चुनाव के बाद पार्टियों का गठबंधन बदलना और किसी सांसद का अपनी संसदीय पार्टी छोड़ना दो अलग-अलग मामले हैं. दोनों पर एक जैसे नियम लागू नहीं होते.

इजरायल में दलबदल विरोधी कानून कब बना?

इजरायल में दलबदल रोकने के लिए 1991 में ‘बेसिक लॉ: द केनेसट’ में धारा 6A जोड़ी गई थी. इस कानून का मकसद सांसदों को निजी फायदे के लिए अपनी पार्टी छोड़कर दूसरी पार्टी में जाने से रोकना है. अगर कोई सांसद अपनी संसदीय पार्टी से अलग हो जाता है और अपनी संसद सदस्यता से इस्तीफा नहीं देता, तो उस पर कुछ कानूनी पाबंदियां लग सकती हैं. उसे मौजूदा केनेसट के कार्यकाल में किसी दूसरी संसदीय पार्टी में शामिल होने से रोका जा सकता है.

साथ ही, वह उसी कार्यकाल में मंत्री या उप-मंत्री भी नहीं बन सकता. ऐसे सांसद के अगले चुनाव लड़ने पर भी रोक लग सकती है. वह अगली बार ऐसी पार्टी की उम्मीदवार सूची से चुनाव नहीं लड़ सकता, जिसका प्रतिनिधित्व मौजूदा केनेसट में रहा हो. हालांकि, कानून में कुछ खास तरह के सामूहिक विभाजन के लिए छूट दी गई है.

 



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