दिल्ली के रेस कोर्स मस्जिद के पास शुक्रवार (23 अक्टूबर) को उस समय हलचल देखने को मिली, जब दिल्ली पुलिस ने इलाके में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू होने की जानकारी देने वाला एक नोटिस बोर्ड लगाया. इस बोर्ड पर साफ तौर पर लिखा गया कि मस्जिद के आसपास के इलाके में 5 या उससे अधिक लोगों का समूह एकत्र नहीं हो सकता. इसके साथ ही यहां किसी भी तरह के धरना-प्रदर्शन पर रोक की बात भी कही गई.
पुलिस ने चेतावनी दी कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी. यह नोटिस बोर्ड उपायुक्त पुलिस, नई दिल्ली की ओर से लगाया गया था.
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नोटिस बोर्ड लगने के कुछ मिनट बाद नमाज की मिली इजाजत
पुलिस की ओर से चेतावनी बोर्ड लगाए जाने के कुछ ही मिनट बाद घटनाक्रम में बदलाव देखने को मिला. मस्जिद के पास नमाज अदा करने पहुंचे लोगों को दिल्ली पुलिस ने नमाज पढ़ने की इजाजत दे दी. इसके बाद नमाजी मस्जिद के अंदर चले गए और नमाज अदा करने की तैयारी करने लगे.
इस घटनाक्रम के दौरान एक तरफ पुलिस की ओर से इलाके में भीड़ जुटाने और धरना-प्रदर्शन को लेकर सख्त चेतावनी दी गई, तो दूसरी तरफ नमाजियों को धार्मिक प्रार्थना करने की अनुमति भी मिल गई. हालांकि, इस मामले में प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों और मौके पर लागू शर्तों को समझना भी जरूरी है.
प्रशासन के फैसले का नमाजियों ने किया स्वागत
नमाज अदा करने पहुंचे लोगों और उनके समर्थकों ने प्रशासन के फैसले का स्वागत किया. उनका कहना था कि उन्हें नमाज पढ़ने की इजाजत दी गई, यह अच्छी बात है. उन्होंने कहा कि मस्जिद हो या मंदिर, दोनों जगह लोग अपने धर्म के अनुसार प्रार्थना और पूजा करने जाते हैं.
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उनका मानना था कि धार्मिक स्थलों पर लोगों को शांति से अपने धार्मिक कार्य करने का अवसर मिलना चाहिए. फिलहाल, रेस कोर्स मस्जिद के पास पुलिस की ओर से लगाए गए नोटिस और उसके बाद नमाज की इजाजत दिए जाने का घटनाक्रम चर्चा में है.














