सऊदी अरब में हूती विद्रोहियों के लगातार मिसाइल और ड्रोन हमलों के बाद देश की एयर डिफेंस व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं. रियाद के किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर हुए घातक हमले के बाद सऊदी अरब ने जांच शुरू की है. जांच का मकसद यह पता लगाना है कि एयर डिफेंस सिस्टम हमलों को रोकने में क्यों नाकाम रहे और समय पर चेतावनी क्यों नहीं मिली.
अमेरिका के बनाए पैट्रियट जैसे एयर डिफेंस सिस्टम सऊदी अरब की सुरक्षा व्यवस्था का अहम हिस्सा हैं. इसके बावजूद हालिया हमलों ने दिखाया है कि ड्रोन, क्रूज मिसाइल और बैलिस्टिक मिसाइलों से एक साथ होने वाले हमलों को रोकना कितना मुश्किल हो सकता है. हालांकि, जांच पूरी होने से पहले यह कहना सही नहीं होगा कि किसी एक सिस्टम की नाकामी ही हमले की मुख्य वजह थी.
कैसे हूती हमलों ने बढ़ाई चुनौती?
AP की रिपोर्ट के मुताबिक, शुरुआती जांच में सामने आया है कि हूती ने पहले कई ड्रोन भेजे. इसके बाद क्रूज और बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया गया. इस तरह के हमले एयर डिफेंस सिस्टम पर एक साथ दबाव डालते हैं और उन्हें कई तरह के खतरों से निपटना पड़ता है. रिपोर्ट के अनुसार, हूती समूह के पास ऐसी मिसाइलें भी हैं, जिनके वॉरहेड उड़ान के दौरान दिशा बदल सकते हैं. इससे पैट्रियट जैसे इंटरसेप्टर सिस्टम के लिए उन्हें रोकना और मुश्किल हो सकता है. जांच में यह भी पता लगाया जा रहा है कि 1,000 किलोमीटर से ज्यादा दूरी तय करके आए हथियारों का समय पर पता क्यों नहीं चल पाया.
पैट्रियट और थाड सिस्टम पर उठे सवाल
पैट्रियट और थाड अलग-अलग तरह के हवाई और मिसाइल खतरों से निपटने के लिए बनाए गए हैं. लेकिन किसी भी एयर डिफेंस सिस्टम की क्षमता असीमित नहीं होती. एक साथ बड़ी संख्या में अलग-अलग हथियार आने पर रडार, चेतावनी व्यवस्था और मिसाइल रोकने वाले सिस्टम के बीच सही तालमेल बेहद जरूरी होता है.
मिसाइलों की कमी भी बनी चिंता
सऊदी अरब के सामने एक और चुनौती इंटरसेप्टर मिसाइलों की मौजूदगी है. AP की रिपोर्ट के अनुसार, लंबे समय से चल रहे क्षेत्रीय संघर्ष के दौरान मिसाइल रोकने वाले हथियारों का भंडार घटा है. सऊदी अरब ने इस स्थिति में दूसरे देशों से रक्षा मदद लेने की कोशिश भी की है. अगर किसी देश पर लगातार हमले होते रहें, तो उसे हर हमले को रोकने के लिए बड़ी संख्या में इंटरसेप्टर मिसाइलों की जरूरत पड़ सकती है. ऐसे में हथियारों की आपूर्ति और उन्हें दोबारा भरने की क्षमता भी सुरक्षा व्यवस्था का अहम हिस्सा बन जाती है.
रियाद एयरपोर्ट पर हमले के बाद जांच
रियाद एयरपोर्ट पर हुए हमलों में लोगों की मौत और बड़ी संख्या में लोगों के घायल होने की खबर आई है. हमलों के बाद एयरपोर्ट का संचालन भी प्रभावित हुआ. सऊदी अधिकारियों की जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि मिसाइलें और ड्रोन सुरक्षा व्यवस्था को पार करके लक्ष्य तक कैसे पहुंचे.














