समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के अलग-अलग मुद्दों पर दिए गए बयानों को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर और डॉ. संजय निषाद ने तीखा पलटवार किया है. दोनों नेताओं ने सपा सरकार के कार्यकाल और योगी सरकार के समय की तुलना करते हुए अखिलेश यादव पर निशाना साधा. रोजगार, सरकारी भर्ती, निवेश, कानून-व्यवस्था, मोबाइल और शिक्षा से लेकर गठबंधन की राजनीति तक, दोनों मंत्रियों ने अखिलेश यादव के बयानों पर जवाब दिया.
ओम प्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव पर धोखा देने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि पिछले विधानसभा चुनाव में सुभासपा के सिंबल का इस्तेमाल करते हुए अखिलेश यादव ने अपने 12 प्रत्याशियों को चुनाव लड़ाया था.
शनिवार को सपा में शामिल हुए नेताओं को लेकर सवाल पूछे जाने पर राजभर ने कहा कि वो सब के सब दगे हुए कारतूस हैं. कभी बसपा में रहते हैं, कभी सपा, तो कभी किसी दूसरी पार्टी में चले जाते हैं. उन्होंने कहा कि केवल ऐसे नेताओं से गठबंधन करने से वोट नहीं मिलता.
‘सपा राज में बिकती थी नौकरी’, अखिलेश यादव पर योगी के मंत्रियों का पलटवार
राजभर का यह बयान गठबंधन की राजनीति को लेकर अखिलेश यादव पर सीधा हमला माना जा रहा है. उन्होंने अपने पुराने राजनीतिक अनुभव का हवाला देते हुए सपा के साथ हुए गठबंधन को लेकर भी नाराजगी जाहिर की.
मोबाइल और शिक्षा के मुद्दे पर भी अखिलेश को घेरा
बच्चों के मोबाइल इस्तेमाल और शिक्षा को लेकर अखिलेश यादव की टिप्पणियों पर भी ओम प्रकाश राजभर ने पलटवार किया. उन्होंने कहा कि बच्चों को मुख्य रूप से अपनी पढ़ाई पर ध्यान देना चाहिए. बेहतर शिक्षा के बिना बच्चों को नौकरी और रोजगार नहीं मिल सकता.
राजभर ने कहा कि अगर बच्चों का पूरा ध्यान केवल मोबाइल में रहेगा, तो वे आगे कैसे बढ़ेंगे? हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि बच्चों के पास मोबाइल रहे, लेकिन उससे जो शैक्षणिक जानकारी मिलती है, वे उसी पर अमल करें.
उत्तर प्रदेश में निवेश को लेकर भी राजभर ने अखिलेश यादव को घेरा. उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव की सरकार के दौरान उत्तर प्रदेश में कोई भी निवेशक आने को तैयार नहीं था. उनके मुताबिक योगी सरकार के दौरान स्थिति बदली है.
राजभर ने सैमसंग जैसी बड़ी मोबाइल कंपनियों का उदाहरण देते हुए कहा कि आज बड़ी कंपनियां उत्तर प्रदेश में आकर अपना कारोबार स्थापित कर रही हैं. इससे हजारों लोगों को रोजगार मिल रहा है. उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव को सपा के चश्मे से यह सब दिखाई नहीं दे रहा.
नौकरियों के रेट को लेकर शिवपाल पर तंज
सरकारी नौकरियों और भर्ती प्रक्रिया को लेकर ओम प्रकाश राजभर ने सपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि तत्कालीन सपा सरकार में यूपीपीएससी में पक्षपात करते हुए अयोग्य व्यक्ति को अध्यक्ष पद पर बिठा दिया गया था. राजभर के मुताबिक हाईकोर्ट ने इस पर सख्त टिप्पणी की थी और तत्कालीन अध्यक्ष को पद से हटाने के लिए कहा था.
राजभर ने तंज कसते हुए कहा कि सपा सरकार में नौकरियों के विज्ञापनों के साथ बोलियां लगती थीं और बिना पैसों के नौकरी नहीं मिलती थी. उन्होंने कहा, “सपा सरकार में शिवपाल चाचा एंड कंपनी सक्रिय हो जाती थी और जैसी नौकरी होती उस हिसाब से 10 लाख, 15 लाख, 20 लाख, 25 लाख रुपये तक की बोली लगती.”
राजभर ने दावा किया कि आज योगी सरकार में बिना किसी भ्रष्टाचार और पक्षपात के पारदर्शी प्रक्रिया के तहत 10 लाख योग्य युवाओं को नौकरियां दी गई हैं. उन्होंने कहा कि जिलों, ब्लॉकों और तहसीलों में रोजगार मेले आयोजित किए जा रहे हैं. इसके अलावा बैंकों के माध्यम से बिना गारंटी और ब्याज मुक्त ऋण देकर छोटे व्यापारियों और युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ा जा रहा है.
सपा के समय एक हजार दंगे, योगी शासन में शून्य- राजभर
कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर भी ओम प्रकाश राजभर ने सपा सरकार पर हमला बोला. उन्होंने कहा कि अखिलेश सरकार के 5 साल के शासनकाल में प्रदेश में एक हजार से अधिक दंगे हुए थे, जबकि योगी आदित्यनाथ के 10 साल के शासन में एक भी दंगा नहीं हुआ है.
राजभर ने कहा कि सपा सरकार के समय गुंडे और माफिया सड़कों पर खुलेआम हथियार लहराते हुए घूमते थे. उनके मुताबिक योगी सरकार में कोई गैंगवार नहीं हुआ और माफिया पूरी तरह से खत्म हो चुके हैं.
अखिलेश के अयोध्या दौरे पर संजय निषाद का तंज
कैबिनेट मंत्री डॉ. संजय निषाद ने अखिलेश यादव के संभावित अयोध्या दौरे को लेकर भी तंज कसा. उन्होंने कहा कि देर से ही सही, कम से कम वे अयोध्या आ तो रहे हैं.
संजय निषाद ने कहा कि अखिलेश यादव को भगवान श्रीराम के साथ-साथ निषादराज के भी दर्शन करने चाहिए और अपनी पिछली गलतियों के लिए माफी मांगनी चाहिए. उन्होंने कहा, “माफी मांगने से गलती सुधर जाती है.”
संजय निषाद का यह बयान अखिलेश यादव के अयोध्या दौरे को लेकर सियासी हमले के तौर पर देखा जा रहा है. उन्होंने अयोध्या से जुड़े मुद्दों के साथ निषाद समाज और निषादराज का भी जिक्र किया.
2017 से पहले और बाद की स्थिति की तुलना की अपील
डॉ. संजय निषाद ने कहा कि विपक्ष का काम सरकार पर आरोप लगाना है, लेकिन जनता को 2017 से पहले और 2017 के बाद की स्थितियों की तुलना करनी चाहिए. उन्होंने कहा कि चाहे नौकरी का मामला हो, भर्ती आयोगों की पारदर्शिता हो, कानून-व्यवस्था हो या घोटाले, तुलना करने पर स्थिति साफ हो जाएगी.
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दोनों मंत्रियों के बयानों से साफ है कि आने वाले समय में सपा और भाजपा के बीच राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो सकती है. एक तरफ अखिलेश यादव सरकार के कामकाज और रोजगार जैसे मुद्दों पर सवाल उठा रहे हैं.
वहीं भाजपा के सहयोगी दलों के नेता सपा सरकार के पुराने कार्यकाल को सामने रखकर जवाब दे रहे हैं. रोजगार, भर्ती, निवेश और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दे इस राजनीतिक बहस के केंद्र में बने हुए हैं.














