दिल्ली दंगों से जुड़े UAPA मामले में हाई कोर्ट ने उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार कर दिया है. अब इसे लेकर उमर खालिद के पिता सैयद कासिम रसूल इलियास की प्रतिक्रिया सामने आई है. उन्होंने अदालत के फैसले पर निराशा जताई है. यह आठवीं बार था जब हमने बेल के लिए अर्जी दी थी. उन्होंने ये भी कहा कि चार्जशीट के अंदर कोई ऐसा सबूत नहीं है, इसके बावजूद बेल रिजेक्ट हो रही है.
उमर खालिद के पिता ने मीडिया से बातचीत में कहा, “आज के फैसले ने हमें एक बार फिर निराश किया है. यह आठवीं बार था जब हमने बेल के लिए अर्जी दी थी. ट्रायल कोर्ट से तीन बार, सुप्रीम कोर्ट से दो बार और हाई कोर्ट से भी दो बार बेल रिजेक्ट हुई. यह आठवीं बार था जब हम हाई कोर्ट गए थे, और हमें लग रहा था कि सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले के बाद – जिसमें एक बेंच ने कहा था कि उमर खालिद को बेल मिल जानी चाहिए और उन्हें जमानत न मिलना गलत है.”
Delhi: On the Delhi High Court refusing to grant bail to Umar Khalid and Sharjeel Imam in the Delhi riots UAPA case, Umar Khalid’s father, Syed Qasim Rasool Ilyas, says, “Today’s decision has disappointed us once again. This was the eighth time that we had applied for bail. Bail… pic.twitter.com/UH3wj8NpRD
— IANS (@ians_india) September 30, 2026
उमर खालिद के गुनहगार होने के क्या सबूत- पिता
उन्होंने आगे कहा, ”नजीब का जो केस है वो इस तरह के आने वाले तमाम बेल के लिए याचिका दाखिल करने वालों को रौशनी देता है, तो उसकी रौशनी में उमर खालिद को बेल मिल जानी चाहिए थी. लेकिन हमारी अदालत का एक सेट पैटर्न है कि वो ये कहती है कि Prima Facie Case है, इसलिए बेल नहीं मिल सकती है. सवाल ये पैदा होता है कि उमर खालिद के गुनहगार होने के क्या सबूत हैं. क्या सबूत है कि उमर खालिद दिल्ली दंगों में शामिल थे. चार्जशीट के अंदर कोई ऐसा सबूत नहीं है, इसके बावजूद बेल रिजेक्ट हो रही है.”
6 साल तक बगैर ट्रायल के रखना सजा है- सैयद कासिम रसूल
उन्होंने आगे कहा, ”आप जानते हैं कि हमारे देश का ये उसूल है और बार-बार हमारे न्यायाधीश इस पर कह चुके हैं कि ‘बेल इज रूल एंड जेल इज एक्सेप्शन’. उमर खालिद के केस में ये चीज उलट गई है और ‘जेल इज रूल एंड बेल इज एक्सेप्शन’ वाला मामला नजर आ रहा है. वैसे भी किसी आदमी को 6 साल तक बगैर ट्रायल के रखना प्रोसेस को पनिशमेंट बना देता है. हम समझते हैं कि उमर खालिद और शरजील इमाम को बेल मिल जानी चाहिए क्योंकि ट्रायल अभी शुरू ही नहीं हुआ है और ये कब शुरू होगा इस पर संदेह है.
ट्रायल भी लंबा चलने का अंदेशा- उमर खालिद के पिता
उमर खालिद के पिता ने ये भी कहा कि ट्रायल भी लंबा चलने का अंदेशा है. इसके अंदर 900 गवाह हैं तो जाहिर सी बात है कि ट्रायल के जल्द खत्म होने की कोई उम्मीद नहीं है. उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा, ”अफसोस की बात है कि हमारी अदालतें किस दवाब में ऐसे फैसले कर रही हैं, . ये फैसले जो आ रहे हैं बहुत ही आश्चर्यजनक और निराशाजनक हैं.”
दिल्ली HC ने क्या कहा?
बता दें की दिल्ली हाई कोर्ट में जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस दिनेश भट्ट की पीठ ने मामले में खालिद और शरजील की जमानत याचिकाएं तीसरी बार खारिज कर दीं. बेंच ने कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट के 5 जनवरी के उस आदेश में बदलाव नहीं कर सकती, जिसमें दोनों आरोपियों से कहा गया था कि वे संरक्षित गवाहों की गवाही पूरी होने या आदेश पारित होने की तारीख से एक साल की अवधि पूरी होने, इनमें से जो भी पहले हो, उसके बाद जमानत के लिए आवेदन कर सकते हैं.
खालिद और इमाम के खिलाफ फरवरी 2020 में हुए दंगों के कथित मुख्य साजिशकर्ताओं में शामिल होने के आरोप में यूएपीए के तहत मामला दर्ज किया गया है. इन दंगों में 53 लोगों की मौत हुई थी और 700 से अधिक लोग जख्मी हुए थे.
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