नेश्नलिस्ट कांग्रेस पार्टी (शरद पवार) के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद पवार ने महाराष्ट्र में किसानों के मुद्दों पर अपनी बात रखते हुए बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा है कि ‘कुछ फैसले दिल्ली में होते हैं.’ पवार का यह बयान ऐसे वक्त में आया है जब यह चर्चा है कि एनसीपी (एसपी), भारतीय जनता पार्टी नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी NDA का हिस्सा बन सकती है.
पवार ने कहा कि सांसद के तौर पर भी वे अपनी जिम्मेदारी निभा सकते हैं. राज्य सरकार से जुड़े मुद्दों को उठाना, फैसले करवाना, कार्यकर्ताओं के हाथ मजबूत करना और मुश्किल में फंसे लोगों की मदद करना महाराष्ट्र तक सीमित जिम्मेदारी है, लेकिन कुछ फैसले दिल्ली में होते हैं. उन्होंने अपने केंद्र सरकार में मंत्री रहने के समय का एक उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय भी सूखा पड़ा था. तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने मंत्रिमंडल की बैठक बुलाई थी और सभी ने कहा था कि सूखे से जुड़े फैसले लेने के सभी अधिकार उन्हें दिए जाएं. उन्हें सिर्फ अधिकार ही नहीं दिए गए थे, बल्कि मंत्रिमंडल की मंजूरी लिए बिना फैसले लेने का अधिकार भी दिया गया था.
महाराष्ट्र के पूर्व सीएम ने कहा कि आज महाराष्ट्र में बेहद गंभीर सूखे की स्थिति पैदा हो गई है. ऐसे समय में संकटग्रस्त नागरिकों की मदद के लिए खड़ा होना हम सभी की जिम्मेदारी है और इसी उद्देश्य से आज यह बैठक बुलाई गई है. उन्होंने कहा कि बहुत कम समय के नोटिस पर राज्यभर से सभी लोग यहां पहुंचे और उन्हें इस बात का संतोष है कि अपने-अपने क्षेत्रों की स्थिति की जानकारी लेकर कार्यकर्ताओं ने अपनी चिंता व्यक्त की.
उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों से कुछ पदाधिकारी इस संकट को लेकर चर्चा कर रहे थे. यह संकट राजनीति करने का नहीं, बल्कि संकट में फंसे लोगों की मदद करने और इस जिम्मेदारी के साथ काम करने का है. इसी उद्देश्य से पार्टी के विधायकों, सांसदों और कुछ पदाधिकारियों के साथ बैठक की गई.
पवार ने कहा कि सहयोगियों की ओर से सामने रखे गए मुद्दों के आधार पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री को एक पत्र भेजा गया था. उम्मीद थी कि राज्य सरकार उसमें कुछ और सुधार करते हुए फैसले लेगी. कुछ फैसले लिए गए, लेकिन वे पर्याप्त नहीं हैं. इसलिए कल फिर कुछ घंटों तक बैठक कर जिलों से मिली अतिरिक्त महत्वपूर्ण मांगों के आधार पर मुख्यमंत्री को एक नया प्रस्ताव भेजा गया है. उम्मीद है कि इसके बाद कुछ और फैसले लिए जाएंगे. एक निश्चित समय में इन मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो आगे क्या कदम उठाना है, इसकी जानकारी प्रदेश अध्यक्ष ने भी दी है.
महाराष्ट्र को भी ऐसी नीतियों की जरूरत- पवार
उन्होंने एक वाकया याद करते हुए कहा-मुझे याद है कि मैं जालना में था. वहां राजेशभैया टोपे और जिलाध्यक्ष ने बताया कि क्षेत्र में मोसंबी के बाग बहुत अधिक हैं और भारी नुकसान हुआ है. उन्होंने कहा कि इससे पहले सरकार ने कभी मोसंबी की फसल बचाने के लिए पैसे नहीं दिए थे. इसके बाद वह जालना से छत्रपति संभाजीनगर और फिर दिल्ली गए. उसी शाम अपनी समिति की बैठक बुलाई गई, जिसमें मोसंबी के बागों को बचाने के लिए प्रति एकड़ पानी देने के लिए 25 हजार रुपये देने का फैसला किया गया. इससे सैकड़ों एकड़ फसल बचाई जा सकी. उन्होंने कहा कि आज महाराष्ट्र को भी ऐसी नीतियों की जरूरत है.
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार ने कुछ फैसले लिए हैं, लेकिन उनमें उन्हें कमियां दिखाई देती हैं. उदाहरण के तौर पर सरकारी आदेश में कहा गया है कि कृषि से जुड़े कर्ज की वसूली पर स्थगन दिया जाएगा. इसका मतलब यह है कि कर्ज माफ नहीं हुआ है, बल्कि फिलहाल उसकी वसूली नहीं की जाएगी. उन्होंने सवाल किया कि अगर आपके नाम पर लिया गया कर्ज सिर्फ वसूल नहीं किया गया, तो क्या इससे वास्तविक मदद होगी?
उन्होंने कहा कि कर्ज आपके सिर पर बना रहेगा और अगर कर्ज बकाया रह गया तो आप डिफॉल्टर हो जाएंगे. एक बार डिफॉल्टर होने के बाद आपको नया कर्ज नहीं मिलेगा. उन्होंने कहा कि ऐसे कई फैसले लिए गए हैं, इसलिए लोगों के बीच जागरूकता फैलाने और सरकार से इन मुद्दों पर मांग करने का काम पार्टी कार्यकर्ताओं को करना होगा.
















