हिमाचल प्रदेश में डॉक्टरों की कमी को दूर करने और स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने शनिवार को जानकारी दी कि केंद्र सरकार ने हिमाचल प्रदेश के 6 मेडिकल कॉलेज में पोस्ट ग्रेजुएट की 320 नई मेडिकल सीटों को मंजूरी दे दी है. इस योजना के लिए केंद्र सरकार लगभग 415 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रावधान करेगी. केंद्रीय मंत्री ने कहा कि हिमाचल सरकार की ओर से 23 जून 2026 को इस संबंध में प्रस्ताव भेजा गया था, जिस पर त्वरित कार्रवाई करते हुए केंद्र ने सभी 320 सीटों को हरी झंडी दे दी है. उन्होंने राज्य सरकार से आग्रह किया है कि वह सभी जरूरी औपचारिकताएं तेजी से पूरी करें, ताकि राज्य के छात्रों और मरीजों को इसका लाभ जल्दी से मिल सके.
किस मेडिकल कॉलेज को मिली कितनी सीटें
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी जानकारी के अनुसार स्वीकृत की गई 320 नई पीजी सीटें राज्य के 6 प्रमुख सरकारी मेडिकल कॉलेज में बांटी गई है. वहीं इन नई सीटों के शुरू होने से सर्जरी, ऑर्थोपेडिक, गायनेकोलॉजी, पीडियाट्रिक्स और ऑन्कोलॉजी जैसे जरूरी डिपार्टमेंट में एक्सपर्ट डॉक्टरों की संख्या बढ़ेगी और मरीजों को बेहतर इलाज मिलेगा.
- आईजीएम शिमला 91 सीटें
- टांडा मेडिकल कॉलेज- 57 सीटें
- हमीरपुर मेडिकल कॉलेज- 57 सीटें
- मंडी मेडिकल कॉलेज-55 सीटें
- नाहन मेडिकल कॉलेज-32 सीटें
- चंबा मेडिकल कॉलेज- 28 सीटें
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15,000 करोड़ के राष्ट्रीय अभियान का हिस्सा
जेपी नड्डा ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश भर में मेडिकल शिक्षा के विस्तार के लिए 15,000 करोड़ रुपये की योजना के तहत 10,000 नई पीजी और यूजी सीटें जोड़ने का टारगेट रखा गया है. हिमाचल प्रदेश में 320 पीजी सीटों की यह मंजूरी इसी राष्ट्रीय अभियान का एक अहम हिस्सा है. वहीं 6 अक्टूबर को मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने भी जेपी नड्डा से इस मामले पर चर्चा की थी. वहीं हिमाचल में पीजी सीटें बढ़ने से राज्य के मेडिकल कॉलेजों में मेडिकल शिक्षा की क्षमता बढ़ेगी.
दूसरी योजनाओं में भी तेजी लाने की अपील
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने हिमाचल सरकार से केंद्र की सहायता से चल रही दूसरी विकास परियोजनाओं को भी तेजी से पूरा करने की अपील की है. उन्होंने विशेष रूप से चंडीगढ़-बद्दी और भानुपल्ली-बिलासपुर रेलवे लाइनों का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य के वित्तीय अंशदान और भूमि अधिकरण से जुड़े लंबित मामलों को जल्द सुलझाया जाए.
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