महाराष्ट्र में इन दिनों सूखे का संकट है. खरीफ सीजन 2026 में सूखे की स्थिति और फसलों को हुए नुकसान का प्रत्यक्ष जायजा लेने के लिए केंद्र सरकार का अंतर-मंत्रालयीन दल महाराष्ट्र के दौरे पर आया है. 8 से 11 अक्टूबर के बीच होने वाले इस दौरे में राज्य की सूखे की स्थिति का आकलन किया जाएगा. इस दौरान बारिश, फसल नुकसान, पीने के पानी की उपलब्धता और पशुओं के चारे की स्थिति का प्रत्यक्ष निरीक्षण किया जाएगा.
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के संयुक्त सचिव मुक्तानंद अग्रवाल इस दल के प्रमुख हैं. केंद्र सरकार के कृषि, जल संसाधन, ग्रामीण विकास, जलापूर्ति, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण, पशुपालन, वित्त विभाग, नीति आयोग तथा अन्य संबंधित विभागों के प्रशासनिक और तकनीकी अधिकारी इस दल में शामिल हैं.
राज्य सरकार की ओर से सूखे की स्थिति पर विस्तृत प्रस्तुति
केंद्रीय दल के मुंबई पहुंचने के बाद आज सह्याद्री अतिथि गृह में मुख्य सचिव राजेश अग्रवाल की अध्यक्षता में बैठक हुई. मुख्य सचिव राजेश अग्रवाल ने इस दौरान कम बारिश के कारण महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में पैदा हुई पानी की किल्लत, संभावित टैंकरों की जरूरत, खेती पर निर्भर खेत मजदूरों और जमीन मालिकों की समस्याओं, मजदूरों के पलायन की संभावना तथा किसान आत्महत्याओं जैसे मुद्दों की ओर केंद्रीय दल का ध्यान आकर्षित किया.
राज्य के राहत एवं पुनर्वास विभाग की ओर से अपर मुख्य सचिव विनिता वेद-सिंगल ने राज्य में बारिश की स्थिति, अल नीनो के कारण मौसम और बारिश पर पड़े प्रभाव तथा कृषि फसलों को हुए नुकसान की विस्तृत एवं तकनीकी जानकारी दी. पीने के पानी की उपलब्धता को लेकर भी विस्तृत समीक्षा प्रस्तुत की गई.
कृषि विभाग की ओर से सचिव परिमल सिंह और आयुक्त सूरज मांढरे ने राज्य में फसलों को हुए नुकसान तथा जिलावार स्थिति की वस्तुनिष्ठ जानकारी केंद्रीय दल के समक्ष रखी. पशुसंवर्धन विभाग की ओर से आयुक्त डॉ. किरण पाटील ने पशुओं के चारे की मौजूदा स्थिति और अगले सात महीनों में संभावित स्थिति की जानकारी दी.
पेयजल की स्थिति की समीक्षा
राज्य में बारिश की कमी के कारण पीने के पानी की उपलब्धता पर भी असर पड़ा है. फिलहाल टैंकरों के माध्यम से जारी जलापूर्ति, पिछले तीन वर्षों की तुलना में पानी की स्थिति तथा टैंकरों के जरिए जलापूर्ति शुरू करने के लिए प्रस्तावित गांवों की जानकारी जलापूर्ति विभाग के अपर मुख्य सचिव पराग जैन और भूजल सर्वेक्षण एवं विकास आयुक्त रवींद्र खेबुडकर ने प्रस्तुत की.
जल संसाधन विभाग के प्रधान सचिव एकनाथ डवले, जलसंधारण विभाग के सचिव जितेंद्र पापलकर, रोजगार गारंटी योजना के सचिव अप्पासाहेब धुलाज सहित ऊर्जा विभाग की ओर से भी मौजूदा स्थिति की समीक्षा और अगले सात महीनों में संभावित स्थिति की जानकारी दी गई. इस दौरान लघु सिंचाई तालाब (एमआई टैंक), गांवों में उपलब्ध जल स्रोत और उनकी मौजूदा स्थिति के बारे में भी केंद्रीय दल को जानकारी दी गई.
प्रत्यक्ष निरीक्षण के लिए जिलों और स्थानों का निर्धारण
राज्य सरकार की ओर से प्रस्तुत आंकड़ों, उपलब्ध साक्ष्यों और विभिन्न विभागों से प्राप्त जानकारी का केंद्रीय दल ने संज्ञान लिया. इस जानकारी के आधार पर सूखे की स्थिति का प्रत्यक्ष निरीक्षण करने के लिए किन जिलों और स्थानों का दौरा किया जाना है, इसका नियोजन किया गया.
केंद्रीय दल के अधिकारी राज्य के विभिन्न हिस्सों में जाकर सूखे की स्थिति, फसलों को हुए नुकसान और पानी की किल्लत का प्रत्यक्ष जायजा लेंगे. इसके लिए विभिन्न दल गठित कर अधिक से अधिक क्षेत्रों का निरीक्षण करने की योजना बनाई गई है. इस दौरान स्थानीय अधिकारी, विशेषज्ञ और राज्य सरकार के संबंधित अधिकारी भी मौजूद रहेंगे.
प्रत्यक्ष निरीक्षण पूरा करने के बाद केंद्रीय दल मुंबई लौटेगा और 11 अक्टूबर को सूखे की स्थिति को लेकर आगे की विस्तृत चर्चा करेगा. इस दौरे के माध्यम से राज्य में सूखे की वास्तविक स्थिति, कृषि फसलों को हुए नुकसान, पानी की किल्लत और आवश्यक उपायों की जानकारी केंद्र सरकार के समक्ष रखी जाएगी.
इस बैठक में राजस्व विभाग के अपर मुख्य सचिव विकास खारगे, ग्रामीण विकास विभाग के सचिव डॉ. चंद्रकांत पुलकुंडवार, पर्यावरण विभाग की सचिव जयश्री भोज सहित केंद्रीय दल के सदस्य और राज्य के संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे.
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