फ्रांस इस समय जीवन यापन के खर्च के खिलाफ सड़कों पर है. यहां पेरिस समेत अन्य जगह पर व्यापक रूप से विरोध प्रदर्शन देखने को मिल रहा है. इसी बीच लिमोगेस का ऐतिहासिक टाउन हॉल एक भीषण आग की चपेट में आकर ढह गया. यह 143 साल पुराना है. इसे साल 1873 में बनाया गया था. वर्ल्ड वॉर झेलने वाली इस इमारत का उद्घाटन साल 1883 में हुआ था, लेकिन अब पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई हिंसक झड़प में नहीं बच सकी.
AFP की न्यूज रिपोर्ट के मुताबिक, लिमोगेस में स्थित टाउन हॉल की इमारत काफी नष्ट हो चुकी है. इस ऐतिहासिक इमारत के नुकसान को विरासत के लिए सबसे बड़ी आपदा करार दिया गया है. प्रदर्शनकारियों की तरफ से इमारत को निशाना बनाने पर कड़ी निंदा हो रही है.
प्रदर्शनकारियों ने पहले टाउन हॉल के बाहर पुलिस की गाड़ी को निशाना बनाया. उसमें आग लगाई, खिड़कियां तोड़ी और इमारत में घुसकर आग के हवाले कर दिया. अब इलाके में फायरब्रिगेड की टीम तैनात की गई है.
🇫🇷 Limoges town hall still burning, bell tower collapses The town hall dates back to 1883 and was modeled on Paris’s Hôtel de Ville. https://t.co/RSIjVsdaES
— Vegas ʷ̣ (@vegasyx) October 17, 2026
फ्रांंस के गृह मंत्रालय ने क्या बताया?
फ्रांस के गृह मंत्रालय ने बताया कि शनिवार को हुए विरोध प्रदर्शनों में करीबन साढ़े पांच लाख लोग शामिल हुए. जबकि सीजीटी यूनियन का कहना है कि इसमें 8 लाख प्रदर्शनकारियों ने भागीदारी की. बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 1200 लोगों को अरेस्ट किया जा चुका है. फ्रांस के शहरों में आगजनी, लूटपाट और तोड़फोड़ हुई है.
पुलिस ने भी एहतियातन नकाबपोश प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस के गोले छोड़े, और वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया है. प्रदर्शनाकरियों ने राजधानी में रखी गाड़ियों को जला दिया.ल्योन शहर में प्रोटेस्टर्स ने एक टूरिस्ट ऑफिस को आग लगा दी. उन्होंने मार्सिले, लिले में टाउन हॉल और बोर्डों में एक पुलिस परिसर की इमारत में घुसकर नुकसान पहुंचाया. पेरिस के मेयर इमैनुएल ग्रेगोइरे ने कहा है कि राजधानी में पूरी की पूरी सड़क बर्बाद हो चुकी है. राष्ट्रपति ने बयान दिया है कि जिन लोगों ने भी इस तरह का उपद्रव किया है, उनपर मुकदमा चलाया जाएगा. उन्हें सजा दी जाएगी.
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, गृह मंत्रालय ने कहा है कि पेरिस और रेनेस, टूलूज और एंगर्स जैसे शहरों में नकाबपोश अल्ट्रा वामपंथी प्रदर्शनकारी इकट्ठा हुए. इन ग्रुप ने ल्योन, मोंटपेलियर और वैलेंस जैसी जगह पर सड़क किनारे रखे सामानों में आग लगा दी. सार्वजनिक इमारतों को नुकसान पहुंचाया. दुकानों में लूटपाट की.
अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने पश्चिमी लिबरल्स को घेरा
इधर अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इस घटना पर फ्रांस में हुए इमिग्रेशन को लेकर पश्चिमी लिबरल्स को जिम्मेदार ठहराया है. उन्होंने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि पश्चिमी उदारवादियों ने विविधता और करुणा के नाम पर फ्रांस और अन्य देशों में तीसरी दुनिया के लोगों को लाकर बसा दिया. उन्होंने समाज में घुलने-मिलने और अनुकूलता जैसे बुनियादी सवालों को नजरंदाज कर दिया. उन्हें पहले इसको लेकर चेतावनी दी थी, लेकिन उन्होंने इसे अनसुना कर दिया.
वेंस ने कहा कि मैं प्रार्थना करता हूं कि अद्भुत लोगों से भरा सुंदर फ्रांस इस पागलपन को रोक दे. इससे पहले वहां ऐतिहासिक इमारत को जला दिया जाए. मुझे उम्मीद है कि अमेरिकी लोग इस पर ध्यान देंगे. कांग्रेस के डेमोक्रेट्स आपके देश के लिए यही भविष्य चाहते हैं.
फ्रांस, इटली और अल्बानिया… यूरोप में कई जगहों पर प्रोटेस्ट, क्यों हो रहा बवाल?













