नवरात्रि के मौके पर जयपुर में आपसी एकता-भाईचारे, सद्भावना और सौहार्द की अनूठी मिसाल पेश की जा रही है. जयपुर शहर में दशहरे के सबसे बड़े आयोजन में 105 फीट ऊंचाई के जिस पुतले का दहन किया जाएगा, उसे मुस्लिम समुदाय के 20 कलाकार तैयार कर रहे हैं. मुस्लिम कलाकारों की यह टीम दो महीने पहले ही मथुरा से जयपुर आ गई थी. जयपुर की दशहरा कमेटी विजयादशमी के दिन इन कलाकारों को मंच से सम्मानित कर अनूठा संदेश देने का भी काम करेगी.
जयपुर शहर की दशहरा कमेटी के रावण के पुतले को तैयार करने का काम मथुरा के मुस्लिम कलाकारों की टीम पिछली पांच पीढ़ियों से कर रही है. यहां रावण के पुतले को तैयार करने का काम जन्माष्टमी के अगले दिन से ही शुरू हो जाता है. मथुरा के मुस्लिम समुदाय के चांद बाबू अपने परिवार और सहयोगियों के साथ अगस्त के पहले हफ्ते में ही यहां आ गए थे. यह मुस्लिम कलाकार डेढ़ दो महीने तक यहां पूरे नियम और संयम का पालन करते हुए राम मंदिर में ही रहते हैं.
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चांद बाबू के पूर्वजों ने तैयार किया था रावण का पुतला बनाने का काम
यहां रावण का पुतला तैयार करने वाले कलाकार अलग- अलग दूसरे कामों से जुड़े हुए हैं, लेकिन यहां के पुतले को तैयार करने का काम यह अपने पूर्वजों की परंपरा को निभाने के लिए करते हैं. पांच पीढ़ी पहले चांद बाबू के पूर्वजों ने सबसे पहले यहां पुतला तैयार किया था. 65 साल पहले 20 फीट का पुतला महज़ ढाई सौ रूपये में तैयार हुआ था.
‘कलाकारों को धर्म के नजरिये नहीं देखना चाहिए’
आदर्श नगर कमेटी के उपाध्यक्ष राजीव मनचंदा के मुताबिक कलाकार तो सिर्फ कलाकार ही होते हैं. उन्हें हिंदू मुस्लिम के नजरिए से कतई नहीं देखा जा सकता. इनका कहना है कि उनके यहां रावण का पुतला बनाने वाले कलाकार जिस समर्पण भाव से काम करते हैं, वह बेमिसाल है. यही वजह है कि कमेटी उनके काम का सम्मान करती है.
जयपुर के आदर्श नगर में होता है सबसे बड़ा आयोजन
जयपुर शहर में दशहरे का सबसे बड़ा आयोजन आदर्श नगर में ही होता है. यहां रावण के 105 फीट ऊंचे पुतले का दहन किया जाता है. पुतला दहन से पहले जमकर आतिशबाजी की जाती है. इस कार्यक्रम को देखने के लिए तकरीबन एक लाख लोग जुटते हैं.
‘काम से हटने के बाद भी निभा रहे हैं पूर्वजों की रस्म’
पुतला बनाने वाले मुस्लिम कारीगरों का कहना है कि तीन पीढ़ी पहले ही इस काम से हटने के बाद भी वह अपने पूर्वजों की रस्म को निभा रहे हैं. यहां उन्हें जो सम्मान मिलता है, वह लाखों रुपए से बढ़कर है. मुख्य कारीगर चांद बाबू के छोटे भाई को 15 साल पहले 2011 में यहां पुतला बनाने के दौरान पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई थी. परिवार का मानना है कि प्रभु राम की कृपा की वजह से ही उन्हें बेटा हुआ था.
राम मंदिर ठहराए जाते हैं मुस्लिम कलाकार
जयपुर का दशहरा आयोजन हिंदू मुस्लिम एकता और गंगा जमुनी तहजीब की अनूठी मिसाल पेश करता है. मथुरा से आने वाले मुस्लिम कलाकारों को प्रभु राम के मंदिर में ठहराया जाता है और यही उनके रहने खाने की व्यवस्था भी की जाती है. कमेटी उपाध्यक्ष राजीव मनचंदा का कहना है कि वह देश के सामने एक अनूठी मिसाल पेश कर अलग संदेश देना चाहते हैं.
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