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अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में ‘सर सैयद डे’ की तैयारी, देश-विदेश से आएंगे मेहमान


अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में 17 अक्टूबर को संस्थापक सर सैयद अहमद खान का जन्मदिन धूमधाम से मनाने की तैयारी की जा रही है. कार्यक्रम को भव्य बनाने के लिए बड़े-बड़े अतिथियों को बुलाया गया है. एएमयू में हर साल शाही अंदाज के साथ सर सैयद अहमद खान का जन्मदिन मनाया जाता है. इस दिन देश के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी यहीं से शिक्षा हासिल करने वाले एलम्यूनियाई शामिल होते हैं. 

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के संस्थापक का जन्मदिन दुनियाभर में मनाया जाता है. इस बार एएमयू में सर सैयद दिवस पर सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह को मुख्य अतिथि के तौर पर आमंत्रित किया गया है. 

कार्यक्रम की शुरुआत सुबह छह बजे विश्वविद्यालय की मस्जिद में कुरान ख्वानी से होगी. इसके बाद सुबह सात बजे उनकी मजार पर चादरपोशी की जाएगी. प्रातः 9.30 बजे उनके लेखन और पुस्तकों पर आधारित प्रदर्शनी तथा पुस्तक लोकार्पण समारोह आयोजित होगा. मुख्य समारोह सुबह 10.45 बजे गुलिस्ताने सैयद में शुरू होगा. इसके बाद कुलसचिव प्रो. आसिम जफर स्वागत भाषण देंगे. 

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कैसे हुई एएमयू की स्थापना?

एएमयू के संस्थापक सर सैयद अहमद खान ने इसकी शुरुआत एक छोटे से स्कूल से की थी, बाद में इसका नाम अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय पड़ा. कहा जाता है कि सर सैय ने इस यूनिवर्सिटी को भीख मांग कर बनाया था. जिसमें एक-एक पैसे का हिसाब रखा गया था. उन्होंने कहा था कि इसके लिए जो जितना दान करेगा उसके हिसाब से ही उसके नाम को यूनिवर्सिटी में जगह दी जाएगी. 

यूनिवर्सिटी के लिए जिन लोगों ने कम पैसे दिए उनके नाम दीवार पर और जिन्होंने ज्यादा पैसे दिए उनके नाम क्लासरूम व अन्य जगहों पर लिखे गए जो आज तक महफूज हैं. जिसके बाद से ये यूनिवर्सिटी हर रोज़ तरक्की कर रही है. उनके जन्मोत्सव की तैयारी को लेकर एएमयू कोई कमी नहीं छोड़ता है. 

कौन थे सर सैयद अहमद खान

सर सैयद अहमद खान 19वीं सदी के भारतीय मुस्लिम व्यवहारवादी, समाज सुधारक और दार्शनिक थे. जिनका सपना शिक्षा की ओर लोगों को आकर्षित करना था. उनका जन्म 17 अक्टूबर 1817 को दिल्ली के सैयद परिवार में हुआ था. 28 मार्च 1898 को अलीगढ़ में उनकी मृत्यु हो गई. सर सैयद की शैक्षणिक सेवाओं को दुनिया जानती है. उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में बहुत काम किए थे.

1847 में सर सैयद ने दिल्ली की ऐतिहासिक इमारतों पर एक किताब लिखी थी जिसका नाम आसार-उस-सनादीद था जो एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक किताब है. इसके अलावा भी बहुत सी ऐसी किताब हैं जो उन्हें शिक्षा का उजाला कहती आई हैं. 

इस बार उनके जन्मोत्सव पर सर सैयद अहमद खान की विरासत का स्मरण करते हुए शिक्षा, सामाजिक सुधार और बौद्धिक विकास के उनके दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया जाएगा. इस अवसर पर कई बड़े लोगों को आमंत्रित किया गया है. जिनमें इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज सत्य वीर सिंह और केरल के एझिमाला स्थित भारतीय नौसेना अकादमी के प्रधानाचार्य रियर एडमिरल एस. एम. उरूज अतहर का नाम शामिल है.  

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