दिल्ली में पुलिसकर्मियों और वकीलों के बीच बढ़े विवाद का मामला अब हाईकोर्ट पहुंच गया है. पुलिसकर्मियों पर वकीलों को धमकाने, उनके खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करने और सार्वजनिक रूप से उन्हें बदनाम करने के आरोप लगाते हुए दिल्ली हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की गई है. याचिका में वकीलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ ही धमकी देने वाले पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ आपराधिक और विभागीय कार्रवाई की मांग की गई है.
यह याचिका वकील करण बीर सिंह ने दाखिल की है. याचिकाकर्ता का कहना है कि वकील को अपने पेशे से जुड़ी जिम्मेदारियां निभाते समय किसी भी तरह की गैरकानूनी धमकी या दबाव के डर में नहीं रहने चाहिए. इस मामले में केवल एक पुलिस अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन सभी लोगों की भूमिका की जांच होनी चाहिए जिन पर धमकी देने या वकीलों को अपमानित करने के आरोप लगे हैं.
AK-47 से हमला करने की धमकी देने का आरोप
याचिका में दावा किया गया है कि एक पुलिसकर्मी ने वकीलों के खिलाफ सार्वजनिक रूप से AK-47 राइफल का इस्तेमाल करने की धमकी दी थी. याचिकाकर्ता ने इस कथित धमकी को गंभीर बताते हुए कहा है कि ऐसे बयानों से वकीलों के बीच डर का माहौल बन सकता है. हालांकि ये आरोप याचिका में लगाए गए हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है.
याचिका के मुताबिक सोशल मीडिया पर प्रसारित कुछ वीडियो में सहायक पुलिस आयुक्त मनस्वी वशिष्ठ कथित तौर पर वकीलों के खिलाफ धमकी भरे और अपमानजनक बयान देते दिखाई दे रहे हैं. इन वीडियो में कथित तौर पर यह भी कहा गया कि अगर पांच वकील किसी पुलिस थाने में एक साथ एंट्री करते हैं तो इसे गैरकानूनी जमावड़ा मानकर उन्हें हिरासत में लिया जा सकता है.
2 नवंबर को पुलिस मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन के बाद बढ़ा विवाद
यह याचिका 2 नवंबर को दिल्ली पुलिस मुख्यालय के बाहर पुलिसकर्मियों के प्रदर्शन के बाद दाखिल की गई है. इस प्रदर्शन का नेतृत्व ACP मनस्वी वशिष्ठ ने किया था. याचिका में इस प्रदर्शन के आयोजन और इसमें शामिल पुलिसकर्मियों की भूमिका की भी जांच की मांग की गई है. याचिकाकर्ता ने कहा है कि वर्दी में तैनात पुलिसकर्मियों के ऐसे प्रदर्शन की जांच पुलिस बल के सदस्यों के अधिकारों पर प्रतिबंध लगाने वाले पुलिस बल (अधिकारों पर प्रतिबंध) अधिनियम, 1966 के तहत भी की जानी चाहिए. याचिका में इस कानून के प्रावधानों के संदर्भ में प्रदर्शन की वैधता की जांच करने की मांग की गई है.
सिर्फ निलंबन काफी नहीं, दूसरे पुलिसकर्मियों की भूमिका भी जांचने की मांग
याचिका में कहा गया है कि ACP मनस्वी वशिष्ठ के निलंबन की खबर सामने आने के बावजूद विवाद से जुड़े सभी सवालों का जवाब नहीं मिलता. याचिकाकर्ता के मुताबिक, सोशल मीडिया पर कथित धमकी वाले वीडियो अब भी प्रसारित हो रहे हैं और अन्य संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ उचित कार्रवाई किए जाने की जरूरत है.
याचिका में इस बात पर जोर दिया गया है कि कार्रवाई केवल एक अधिकारी तक सीमित नहीं रहनी चाहिए. जिन अन्य पुलिसकर्मियों पर धमकी देने या वकीलों के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियां करने के आरोप हैं उनकी भूमिका की भी जांच होनी चाहिए. साथ ही यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि भविष्य में वकीलों को उनके पेशेवर काम के दौरान डराने या दबाव में लेने की कोशिश न हो.
सोशल मीडिया से वीडियो हटाने और वकीलों को सुरक्षा देने की मांग
याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट से मांग की है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से कथित धमकी भरे और अपमानजनक वीडियो हटाने के लिए उचित निर्देश दिए जाएं. इसके अलावा, वकीलों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने और उन्हें पुलिस कर्मियों की कथित धमकियों से बचाने के लिए व्यवस्था बनाने की मांग भी की गई है. याचिका में ACP मनस्वी वशिष्ठ और धमकी देने के आरोपों का सामना कर रहे अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ आपराधिक और विभागीय कार्रवाई की मांग की गई है.
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