अमेरिका के अटलांटा में G20 विदेश मंत्रियों की बैठक चल रही है. इस दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में रूस-यूक्रेन युद्ध के संबंध में बयान दिया है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने खुद दिल्ली में और उससे पहले बिश्केक में राष्ट्रपति पुतिन के साथ बातचीत की थी. मैं पहले मॉस्को गया था और आज भी मैंने लावरोव के साथ इस पर चर्चा की.
एस. जयशंकर ने ANI को दिए एक इंटरव्यू में आगे कहा कि इस बीच मैं कीव भी गया था और हम यूक्रेनी पक्ष के संपर्क में हैं. हम इस मामले में अमेरिकियों के साथ भी तालमेल बिठा रहे हैं, क्योंकि शांति मध्यस्थता को लेकर उनकी अपनी पहल है. इस संबंध में अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो को मोटे तौर पर पता है कि यहां क्या चल रहा है. इसके आगे डिटेल जानकारी या मौजूदा हालात जैसी बातों को सार्वजनिक रूप से साझा करने की स्थिति में मैं नहीं हूं.
#WATCH | Atlanta, US: On the G20 Foreign Ministers’ Meeting, EAM S Jaishankar says, “… Prime Minister Modi himself had a discussion with President Putin in Delhi and before that in Bishkek. I had gone earlier to Moscow, and even today, I discussed it with Mr Lavrov. In between, I had gone to Kyiv, and we are in touch with the Ukrainian side. We have also been coordinating this with the Americans because they have their own peace mediation initiative. Secretary Rubio knows roughly what is going on here. So that is where we are. Beyond that, in terms of details, state of play, etc., I don’t think I’d be in a position to share that publicly…”
— ANI (@ANI) November 1, 2026
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर बयान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस-यूक्रेन युद्ध के शांतिपूर्ण समाधान की बार-बार अपील की है. उन्होंने इस बात पर जोर दिया है कि इस संघर्ष को खत्म करने का एकमात्र तरीका बातचीत और कूटनीति है. उन्होंने 31 अगस्त 2026 को किर्गिस्तान के बिश्केक में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ हुई मुलाकात कहा था कि हमें कभी न खत्म होने वाले युद्ध की स्थिति से आगे बढ़कर युद्ध के अंत की ओर बढ़ना होगा. उन्होंने आगे कहा था कि युद्ध का हर एक दिन मानवता को पीछे धकेलता है. मोदी ने भारत के इस रुख को दोहराया कि संघर्ष को लगातार लड़ते रहने के बजाय शांतिपूर्ण बातचीत के जरिए सुलझाया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि भारत शांति बहाल करने के प्रयासों का समर्थन करता है और मानता है कि मानवता के लिए इस संघर्ष का समाधान होना बहुत जरूरी है.














