इजराइल के 27 अक्टूबर 2026 के चुनाव नतीजों ने एक ऐसी सियासी पेचीदगी पैदा कर दी है, जिसमें सिर्फ सीटों का गणित नहीं, बल्कि ‘विदेशी हस्तक्षेप’ का आरोप भी शामिल हो गया है. 30 अक्टूबर 2026 तक के आंकड़ों के मुताबिक, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व वाले ब्लॉक को 46 सीटें, गादी आइजनकोट वाले विपक्षी ब्लॉक को 55 सीटें और अरब-नेतृत्व वाली पार्टियों को रिकॉर्ड 19 सीटें मिली हैं. सरकार बनाने के लिए 61 सीटें जरूरी हैं, जो किसी के पास नहीं हैं. इसी बीच, नेतन्याहू की लिकुड पार्टी ने आरोप लगाया कि अरब पार्टियों ने ‘कतर और तुर्किये की मदद से चुनाव चुराया’ है.
इसके बाद इजराइल के केंद्रीय चुनाव समिति के अध्यक्ष न्यायमूर्ति नोआम सोहलबर्ग के निर्देश पर शिन बेट ने विदेशी फंडिंग और चुनावी रिश्वत की जांच शुरू कर दी है…
आरोप क्या हैं और किसने लगाए?
लिकुड पार्टी ने 29 अक्टूबर 2026 को दावा किया कि अरब नेतृत्व वाली पार्टियों ने ‘चुनाव चुराया’ है. इसमें ‘विदेशी सहायता’ का इस्तेमाल हुआ है. पार्टी ने सीधेतौर पर किसी देश का नाम नहीं लिया, लेकिन इजराइली मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, लिकुड के सदस्यों ने कतर और तुर्किये पर दखल का आरोप लगाया.
लिकुड के आरोपों के मुताबिक:
- राम पार्टी को कतर से पैसा मिलना, जिसका इस्तेमाल ‘वोट खरीदने’ के लिए किया गया.
- कुछ इलाकों में मतपत्रों के साथ नकदी भरे लिफाफे मिलने का दावा.
- मतदान समिति के सदस्यों को धमकी और हिंसा, एक साथ कई मतदाताओं का बूथ में जाना, दोहरा मतदान और मतदाताओं की संख्या में गड़बड़ी.
- मतदाताओं को जुटाने के लिए प्रतिबंधित सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल.
लिकुड ने इसे ‘रामगेट स्कैंडल’ और ‘राजनीतिक भूकंप‘ करार दिया और दावा किया कि यह ‘संसद पर विदेशी कब्जे, इजराइल के इस्लामीकरण और दक्षिणपंथी सरकार को गिराने’ की साजिश है.
शिन बेट की जांच: क्या है असली स्थिति?
केंद्रीय चुनाव समिति के अध्यक्ष सोहलबर्ग ने 28 अक्टूबर को शिन बेट प्रमुख डेविड जिनी को पत्र लिखकर जांच का आदेश दिया. पत्र में कहा, ‘मेरे सामने चुनाव के दौरान इजराइल के हितों के खिलाफ काम करने वाली संस्थाओं से विदेशी फंडिंग के जरिए अनुचित प्रभाव डालने का गंभीर संदेह लाया गया है.’
जांच का केंद्र बिंदु यह है कि अरब समुदाय में मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिए बड़ी रकम विदेश से भेजी गई और संभावित स्रोतों में कतर और तुर्किये शामिल हैं. लेकिन शिन बेट ने साफ किया है कि:
- जांच की जानकारी किसी राजनीतिक दल या राजनीतिक खिलाड़ी से नहीं, बल्कि एजेंसी की अपनी खुफिया जानकारी से आई है.
- जांच ‘केंद्रित और सीमित’ है. यह पूरे अरब समुदाय पर संदेह नहीं डालती. सिर्फ उन पर कार्रवाई होगी जिन्होंने कानून तोड़ा है.
- जांच पूरी होने तक इसके निष्कर्षों के बारे में कोई भी बयान एजेंसी की स्थिति नहीं दर्शाता.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शिन बेट के पास पहले से ही संभावित अवैध धन हस्तांतरण की खुफिया जानकारी थी, लेकिन उसने चुनाव समिति को पहले सूचित नहीं किया था. जांच में यह भी देखा जा रहा है कि क्या पैसा पहले आतंकी संगठनों के फंडिंग में इस्तेमाल हुए चैनलों (करेंसी एक्सचेंज, दुश्मन देशों की शाखाएं) से होकर आया है. मोसाद भी इस जांच में शिन बेट की सहायता कर रहा है.
विपक्ष और अरब पार्टियों की प्रतिक्रिया: ‘चुनाव को बदनाम करने की साजिश’
विपक्षी नेता गादी आइजनकोट और अरब पार्टियों के नेताओं ने नेतन्याहू पर ‘चुनाव नतीजों को जानबूझकर बदनाम करने’ का आरोप लगाया है. आइजनकोट ने कहा कि जांच के बारे में जानकारी मिलने के बाद भी ‘यह तय करना जल्दबाजी होगी कि क्या हुआ या हुआ भी या नहीं’. नेतन्याहू पर ‘चुनाव नतीजों को अवैध ठहराने के लिए संगठित अभियान’ चलाने का आरोप लगाया.
जॉइंट लिस्ट के हिस्सा बालाद पार्टी के अध्यक्ष समी अबू शेहादेह ने आरोपों को ‘नस्लवादी ब्लड लिबल’ करार दिया और कहा कि हारने वाला पक्ष सुरक्षा एजेंसियों का इस्तेमाल करके चुनाव नतीजों को पलटने की कोशिश कर रहा है.
कतर के विदेश मंत्रालय ने आरोपों को ‘हास्यास्पद और खतरनाक’ बताते हुए स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया और इजराइली राजनेताओं पर ‘दोहा के खिलाफ दुष्प्रचार अभियान’ चलाने का आरोप लगाया.
यह मामला क्यों अहम है?
आरोपों का असली असर सरकार बनाने की प्रक्रिया पर पड़ सकता है. अरब पार्टियों के 19 सीटों के साथ, विपक्ष (55 सीटें) के पास सरकार बनाने का एक रास्ता है. नेतन्याहू के आरोपों का मकसद यही रास्ता रोकना है. BBC की रिपोर्ट के मुताबिक, आलोचकों का मानना है कि यह ‘अरब पार्टियों को बदनाम करने की कोशिश’ है, ताकि आइजनकोट के लिए उनके साथ गठबंधन करना ‘राजनीतिक रूप से असंभव’ हो जाए.
हालांकि, शिन बेट और चुनाव समिति के अधिकारियों ने संकेत दिया है कि जांच अंतिम नतीजों को नहीं रोकेगी और राष्ट्रपति इसहाक हर्ज़ोग की सरकार बनाने की प्रक्रिया शुरू करने में बाधा नहीं डालेगी. कार्यवाहक चुनाव समिति महानिदेशक डीन लिव्ने ने कहा, ‘चुनावी अखंडता के व्यवस्थित उल्लंघन के आरोपों का कोई आधार नहीं है.’
सरकार बनने का रास्ता अभी बंद नहीं
इजराइल का यह चुनाव सिर्फ सीटों का गणित नहीं, बल्कि विदेशी हस्तक्षेप के आरोपों और सुरक्षा एजेंसी की जांच के बीच फंसा हुआ है. अरब पार्टियों के 19 सीटों ने विपक्ष को एक संभावित रास्ता दिखाया है और नेतन्याहू के ‘विदेशी फंडिंग’ के आरोप उसी रास्ते को बंद करने की कोशिश हो सकते हैं.
शिन बेट की जांच अभी चल रही है और उसके नतीजे आने में वक्त लगेगा. फिलहाल, सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह जांच सिर्फ कानूनी प्रक्रिया है या सियासी खेल का हिस्सा?














