दिल्ली में 1 नवंबर को प्रस्तावित राहुल गांधी की राजनीतिक रैली को लेकर राजधानी दिल्ली में सियासी घमासान तो मचा ही है साथ ही व्यापारियों ने भी इसके प्रस्तावित समय को लेकर इस पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं. जहां, दिल्ली भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा ने कांग्रेस पर दिवाली से पहले व्यापारिक गतिविधियों को प्रभावित करने की राजनीति करने का आरोप लगाया है.
वहीं, चांदनी चौक के सांसद और कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने कहा कि, विरोध प्रदर्शनों से पैदा होने वाला व्यवधान जारी रहा तो दिल्ली में दस दिनों के भीतर करीब 4000 करोड़ रुपए के कारोबार का नुकसान दिल्ली के कारोबारियों को हो सकता है.
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दिवाली से पहले रैली पर भाजपा का सवाल
केंद्रीय मंत्री हर्ष मल्होत्रा ने राहुल गांधी की प्रस्तावित रैली को लेकर 1984 के सिख नरसंहार के पीड़ितों का भी मुद्दा उठाया. उनका आरोप है कि 1 नवंबर को दिल्ली में बड़ी राजनीतिक रैली आयोजित करना पीड़ितों के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है. उन्होंने सवाल किया कि दिवाली से ठीक पहले ऐसी राजनीतिक गतिविधियों के जारिए व्यापारिक कामकाज को प्रभावित करने की जरूरत क्यों है? मल्होत्रा ने कहा कि, जुलाई से दिल्ली और मुंबई में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी की ओर से अलग-अलग दिनों में लगातार विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं.
उन्होंने आरोप लगाया कि इन गतिविधियों का मकसद जनहित से ज्यादा देश के व्यापार और अर्थव्यवस्था को प्रभावित करना है. आंदोलनों के पीछे विदेशी फंडिंग की आशंका का जिक्र करते हुए उन्होंने इस पर भी सवाल उठाए.
व्यापारियों की परेशानियों और सिख समाज की भावनाओं के प्रति असंवेदनशीलता
दिल्ली भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) और दिल्ली व्यापार महासंघ की आपत्तियों के बावजूद कांग्रेस का रैली आयोजित करने पर अड़े रहना व्यापारियों की परेशानियों और सिख समाज की भावनाओं के प्रति असंवेदनशीलता दिखाता है. संविधान की किताब हाथ में लेकर राजनीति करने वाली कांग्रेस के आचरण पर सवाल उठाते हुए मल्होत्रा ने राहुल गांधी से अपील की कि वे व्यापारिक संगठनों की मांग स्वीकार करें और दिवाली तथा भाई दूज तक सभी राजनीतिक आंदोलन स्थगित रखें. उन्होंने यह अपील दिल्ली भाजपा अध्यक्ष के साथ-साथ एक व्यापारी के रूप में भी की.
दिल्ली के कारोबार पर रोजाना 440 करोड़ तक प्रभावित होने का अनुमान
राजधानी में जारी विरोध प्रदर्शनों के आर्थिक प्रभाव को लेकर कैट ने कारोबार के आंकड़ों के आधार पर संभावित जोखिम का आकलन सामने रखा है. प्रवीन खंडेलवाल के मुताबिक, दिल्ली में प्रतिदिन औसतन करीब 2200 करोड़ रुपए का व्यापार होता है. ऐसे में बाजारों और व्यापारिक गतिविधियों में रुकावट का असर बड़े स्तर पर पड़ सकता है. कैट के अनुसार, दिवाली के इस अहम मौके पर अगर कारोबार में महज 20 प्रतिशत का भी व्यवधान आता है तो प्रतिदिन नुकसान के औसत अनुमानित आंकड़े 440 करोड़ रुपये के मुताबिक 10 दिनों के लगभग 4000 करोड़ रुपए से अधिक का नुकसान व्यापारियों को उठाना पड़ सकता है.
व्यापारियों, कर्मचारियों, श्रमिकों और आम लोगों पर अनावश्यक आर्थिक दबाव नहीं पड़ना चाहिए
खंडेलवाल ने लोकतांत्रिक अधिकारों और आर्थिक गतिविधियों के बीच संतुलन का मुद्दा उठाते हुए संविधान के तीन प्रावधानों का उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 19(1)(a) नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता देता है, जबकि अनुच्छेद 19(1)(b) शांतिपूर्वक और बिना हथियार एकत्र होने का अधिकार प्रदान करता है. वहीं, अनुच्छेद 19(1)(g) के तहत नागरिकों को पेशा अपनाने तथा व्यापार या व्यवसाय करने का अधिकार है, जो संविधान में निर्धारित उचित प्रतिबंधों के अधीन है. उनका कहना है कि लोकतांत्रिक अधिकारों का इस्तेमाल करते समय दूसरे नागरिकों के वैध हितों और आजीविका पर पड़ने वाले असर को भी ध्यान में रखना चाहिए. शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार सुरक्षित रहना चाहिए, लेकिन उसके कारण व्यापारियों, कर्मचारियों, श्रमिकों और आम लोगों पर अनावश्यक आर्थिक दबाव नहीं पड़ना चाहिए.
उन्होंने कहा कि राजधानी थोक वितरण, खुदरा व्यापार और वाणिज्यिक गतिविधियों का प्रमुख राष्ट्रीय केंद्र है. यहां के बाजार देशभर के निर्माताओं, वितरकों, खुदरा कारोबारियों और उपभोक्ताओं को जोड़ते हैं. इसलिए दिल्ली में लंबे समय तक व्यापार बाधित रहने का असर आपूर्ति शृंखला और व्यापारिक लेन-देन के जरिए राजधानी से बाहर भी पहुंच सकता है.














