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दिल्ली को IT हब बनाने की तैयारी, औद्योगिक नीति 2026 को मंजूरी


गुरुग्राम और नोएडा की तर्ज पर दिल्ली को भी आईटी, डिजिटल सेवाओं और आधुनिक उद्योगों का बड़ा केंद्र बनाने की दिशा में रेखा गुप्ता सरकार ने कदम बढ़ाया है. मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में मंगलवार (14 अक्टूबर) को हुई कैबिनेट बैठक में दिल्ली औद्योगिक नीति 2026 को मंजूरी दे दी गई. दस साल के लिए तैयार इस नीति में 10 प्रमुख क्षेत्रों को आर्थिक प्रोत्साहन देने का प्रावधान किया गया है. सरकार का लक्ष्य निवेश बढ़ाने, युवाओं के लिए रोजगार पैदा करने और प्रदूषण कम करने वाले उद्योगों को बढ़ावा देना है. 

इसके अलावा नई नीति में महिला उद्यमियों, युवाओं और छोटे कारोबारियों को खास तवज्जो भी दी गई है. महिला उद्यमियों को विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में पुरुष उद्यमियों के मुकाबले 20 से 40 प्रतिशत तक अधिक प्रोत्साहन राशि देने का प्रावधान किया गया है. इसके अलावा, उद्योग लगाने, कार्यालय का किराया चुकाने, कर्मचारियों की नियुक्ति और नई तकनीक अपनाने के लिए भी वित्तीय सहायता दी जाएगी. 

5 साल में 1000 करोड़ रुपये खर्च करेगी सरकार

औद्योगिक नीति के तहत मुख्यमंत्री उद्यमश्री योजना के लिए वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक कुल 1000 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना है. इस राशि के जरिए प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में नए निवेश को आकर्षित किया जाएगा और मौजूदा उद्योगों को आधुनिक बनाने में मदद मिलेगी. सरकार ने जिन 10 क्षेत्रों को प्राथमिकता दी है, उनमें आईटी, आईटीईएस और डिजिटल सेवाएं, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी), डेटा सेंटर, अनुसंधान एवं विकास तथा परीक्षण सुविधाएं, स्वास्थ्य सेवाएं और वेलनेस, शहरी लॉजिस्टिक्स, सर्कुलर इकोनॉमी एवं अपशिष्ट प्रबंधन, उद्योग आधारित कौशल विकास और एमएसएमई का तकनीकी आधुनिकीकरण शामिल हैं. 

इन क्षेत्रों के चयन के पीछे रोजगार और पर्यावरण, दोनों से जुड़ी जरूरतें हैं. सरकार ऐसे कारोबारों को बढ़ावा देना चाहती है, जिनमें आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल के साथ कम संसाधनों में काम करना संभव हो. 

आईटी कंपनियों को किराये से लेकर डिजिटल ढांचे तक में राहत

दिल्ली में आईटी और डिजिटल सेवाओं से जुड़ी कंपनियां निवेश करने पर कई तरह की आर्थिक सहायता की पात्र होंगी. 

  • डिजिटल ढांचा: योग्य निवेश पर तीन साल तक खर्च का 25 प्रतिशत मिलेगा. अधिकतम सहायता 10 करोड़ रुपये होगी.
  • ऑफिस का किराया: तीन साल तक किराये का 40 प्रतिशत दिया जाएगा. इसकी अधिकतम सीमा दो करोड़ रुपये है. 
  • इंटरनेट और कंप्यूटर सेवाएं: तेज इंटरनेट और कंप्यूटर आधारित सेवाओं के खर्च पर दो साल तक 25 प्रतिशत सहायता मिलेगी. इसकी सीमा सालाना 10 लाख रुपये है.
  • नई नियुक्तियां: हर नए कर्मचारी की नियुक्ति पर 40,000 से 50,000 रुपये तक प्रोत्साहन दिया जाएगा.

इस व्यवस्था का उद्देश्य दिल्ली में डिजिटल कारोबार स्थापित करने की लागत घटाना है, ताकि कंपनियों के लिए यहां कार्यालय खोलना और कर्मचारियों की भर्ती करना ज्यादा व्यावहारिक हो सके. 

जीसीसी स्थापित करने पर 50 करोड़ रुपये तक की मदद

बहुराष्ट्रीय कंपनियों के ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) भी नीति के प्रमुख लाभार्थियों में शामिल हैं. ये ऐसे केंद्र होते हैं, जहां से कंपनियां कई देशों में अपने कारोबार, तकनीकी सेवाओं और अन्य संचालन को संभालती हैं. जीसीसी के लिए पहले पांच वर्षों में डिजिटल ढांचा तैयार करने हेतु 50 करोड़ रुपये तक की सहायता का प्रावधान है. 

कार्यालय के किराये पर दो साल तक 40 प्रतिशत मदद मिलेगी, जिसकी अधिकतम सीमा दो करोड़ रुपये रखी गई है. इसके अलावा, हर नई नियुक्ति पर एक लाख से 1.20 लाख रुपये तक प्रोत्साहन दिया जाएगा. महिला उद्यमियों के लिए जीसीसी से जुड़ी अधिकतम सहायता 60 करोड़ रुपये होगी, जो सामान्य उद्यमों के लिए निर्धारित 50 करोड़ रुपये से 20 प्रतिशत अधिक है. 

स्वास्थ्य क्षेत्र में निवेश पर 10 करोड़ रुपये तक की सहायता

स्वास्थ्य सेवाओं और वेलनेस से जुड़ी इकाइयों को भी औद्योगिक नीति में जगह दी गई है.  इन क्षेत्रों में निवेश के लिए 10 करोड़ रुपये तक की सहायता का प्रावधान है. विशेषज्ञ चिकित्सकों की नई नियुक्ति पर प्रति डॉक्टर 50,000 से 60,000 रुपये तक दिए जाएंगे. इस कदम से स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े कारोबारों को विस्तार देने और विशेषज्ञ कर्मचारियों की नियुक्ति को प्रोत्साहित करने की कोशिश की गई है. 

वेयरहाउसिंग और माल ढुलाई को भी मिलेगा बढ़ावा

शहरी लॉजिस्टिक्स के तहत नई भंडारण इकाइयों को 10 करोड़ रुपये तक की आर्थिक सहायता मिल सकेगी. पहले से संचालित इकाइयां भी इस योजना से बाहर नहीं होंगी. उनके लिए एक करोड़ रुपये तक की मदद का प्रावधान है. माल ढुलाई से जुड़ी इकाइयों को नई तकनीक अपनाने पर 50 लाख रुपये तक की सहायता मिल सकती है. वहीं, स्वच्छ ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए दो करोड़ रुपये तक की मदद देने का प्रावधान है. इन उपायों के जरिए शहर में माल के भंडारण और परिवहन को अधिक व्यवस्थित बनाने के साथ तकनीकी सुधारों को प्रोत्साहित करने की योजना है.

डेटा सेंटर और रिसर्च इकाइयों के लिए खास प्रावधान

डेटा सेंटर में निवेश करने वाले योग्य उद्यमियों को 10 करोड़ रुपये तक की सहायता मिलेगी. इन केंद्रों में बिजली और पानी की खपत घटाने वाली तकनीक को अपनाने पर भी जोर दिया गया है. अनुसंधान एवं विकास तथा परीक्षण सुविधाओं के लिए भी 10 करोड़ रुपये तक की मदद का प्रावधान है. नई तकनीक और उत्पाद विकसित करने के साथ उनकी गुणवत्ता और उपयोगिता की जांच करने वाली इकाइयां इसका लाभ उठा सकेंगी. 

पेटेंट को बढ़ावा देने के लिए 5 लाख रुपये की सहायता

पेटेंट को बढ़ावा देने के लिए प्रत्येक पेटेंट पर पांच लाख रुपये की सहायता दी जाएगी. हालांकि, यह मदद अधिकतम चार पेटेंट तक सीमित रहेगी. इसके अतिरिक्त, कोल्ड स्टोरेज और सामान को निर्धारित तापमान पर सुरक्षित रखने वाली सुविधाओं के लिए दो करोड़ रुपये तक की सहायता मिलेगी. इन प्रावधानों का उद्देश्य शोध, उत्पाद विकास और भंडारण से जुड़ी आधुनिक सुविधाओं को प्रोत्साहित करना है.

छोटे उद्योगों को मशीनों के आधुनिकीकरण में मदद

एमएसएमई यानी सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों के लिए भी नीति में आर्थिक सहायता का प्रावधान किया गया है. सरकार चाहती है कि छोटे उद्योग नई तकनीक अपनाएं, मशीनों को आधुनिक बनाएं और अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाएं. औद्योगिक प्रोत्साहन के आठ प्रमुख बिंदुओं में महिला उद्यमियों को विशेष सहायता, पूंजीगत निवेश पर आर्थिक मदद, कार्यालय के किराये में राहत, नई नियुक्तियों पर प्रोत्साहन, अनुसंधान एवं तकनीकी विकास के लिए सहायता देना शामिल है.

इसके अलावा आधुनिक मशीनों और उत्पादन प्रणालियों को अपनाने में मदद, ऊर्जा दक्षता बढ़ाने के उपाय तथा औद्योगिक जमीन और जरूरी मंजूरियां हासिल करने में सहयोग शामिल हैं. इसके तहत उद्योगों की जरूरतों के मुताबिक युवाओं को प्रशिक्षण देने और मौजूदा कर्मचारियों के कौशल में सुधार करने पर भी ध्यान दिया जाएगा.

पानी, बिजली और कचरे के प्रबंधन पर भी जोर

दिल्ली में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के साथ पर्यावरणीय दबाव कम करना भी नई नीति का एक अहम उद्देश्य है. इसके लिए पानी की खपत घटाने, ऊर्जा बचाने और कचरे का दोबारा इस्तेमाल करने वाली इकाइयों को प्रोत्साहित किया जाएगा. सर्कुलर इकोनॉमी और अपशिष्ट प्रबंधन से जुड़े कारोबारों को सहायता देने का प्रावधान है. जैविक कचरे के प्रसंस्करण के लिए सामान्य उद्यमों को एक करोड़ रुपये तक की सहायता मिलेगी. महिला उद्यमियों के लिए यह सीमा 1.20 करोड़ रुपये होगी. 

उन्नत विनिर्माण यानी प्रिसिजन मैन्युफैक्चरिंग में भी निवेश को बढ़ावा दिया जाएगा. आधुनिक तकनीक की मदद से अधिक सटीक उत्पाद बनाने वाली इकाइयों को तकनीकी सुधार, मशीनों के आधुनिकीकरण और ऊर्जा बचत के उपायों के लिए सहायता दी जाएगी.

महिला उद्यमियों को किस क्षेत्र में कितनी अतिरिक्त सहायता?

नई औद्योगिक नीति 2026 में महिला उद्यमियों को कारोबार के विस्तार और नई इकाइयां स्थापित करने के लिए सामान्य उद्यमियों के मुकाबले अधिक आर्थिक सहायता देने का प्रावधान किया गया है. अलग-अलग क्षेत्रों में सहायता की अधिकतम सीमा तय की गई है.

1. आईटी और डिजिटल सेवाएं: इस क्षेत्र में सामान्य उद्यमियों को 10 करोड़ रुपये तक की सहायता मिलेगी, जबकि महिला उद्यमियों के लिए यह सीमा 12 करोड़ रुपये रखी गई है. यानी उन्हें 20 प्रतिशत अधिक प्रोत्साहन मिलेगा.

2. ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी): बहुराष्ट्रीय कंपनियों के संचालन केंद्र स्थापित करने के लिए सामान्य उद्यमों को 50 करोड़ रुपये तक की सहायता मिलेगी. महिला उद्यमियों के लिए यह राशि 60 करोड़ रुपये तक होगी, जो 20 प्रतिशत अधिक है.

3. डेटा सेंटर: डेटा सेंटर स्थापित करने वाले सामान्य उद्यमों को 10 करोड़ रुपये तक की सहायता दी जाएगी. महिला उद्यमियों के लिए अधिकतम सहायता 12 करोड़ रुपये होगी. इस तरह उन्हें 20 प्रतिशत अतिरिक्त प्रोत्साहन मिलेगा.

4. अनुसंधान एवं विकास: नई तकनीक और उत्पादों के विकास तथा परीक्षण से जुड़ी इकाइयों के लिए सामान्य उद्यमियों को 10 करोड़ रुपये तक की मदद मिलेगी. महिला उद्यमियों के लिए यह सीमा बढ़ाकर 12 करोड़ रुपये की गई है. यह सामान्य सहायता से 20 प्रतिशत अधिक है.

5. नई वेयरहाउसिंग इकाइयां: नई भंडारण इकाइयां स्थापित करने के लिए सामान्य उद्यमियों को 10 करोड़ रुपये तक की सहायता मिलेगी. महिला उद्यमियों के लिए यह राशि 12 करोड़ रुपये तक होगी, यानी 20 प्रतिशत अधिक प्रोत्साहन.

6. जैविक कचरा प्रसंस्करण: इस क्षेत्र में सामान्य उद्यमों को एक करोड़ रुपये तक की आर्थिक सहायता मिलेगी. महिला उद्यमियों के लिए यह सीमा 1.20 करोड़ रुपये रखी गई है. उन्हें यहां भी 20 प्रतिशत अतिरिक्त सहायता मिलेगी.

7. प्रिसिजन मैन्युफैक्चरिंग: आधुनिक तकनीक से सटीक उत्पाद बनाने वाली इकाइयों को सामान्य श्रेणी में पांच करोड़ रुपये तक की सहायता मिलेगी. महिला उद्यमियों के लिए अधिकतम सीमा छह करोड़ रुपये है. इस प्रकार उन्हें 20 प्रतिशत अधिक प्रोत्साहन मिलेगा.

8. एमएसएमई का तकनीकी आधुनिकीकरण: छोटे उद्योगों में नई तकनीक और आधुनिक मशीनें अपनाने के लिए सामान्य उद्यमियों को छह करोड़ रुपये तक की सहायता मिलेगी. महिला उद्यमियों के लिए यह राशि सात करोड़ रुपये तक निर्धारित की गई है.

ऊर्जा की बचत, पानी के कम इस्तेमाल पर जोर

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा, ”सरकार दिल्ली को आधुनिक तकनीक और बहुराष्ट्रीय कंपनियों के संचालन का प्रमुख केंद्र बनाना चाहती है.” उन्होंने ऊर्जा की बचत, पानी का कम इस्तेमाल और कचरा घटाने पर भी जोर दिया. सरकार का दावा है कि नई नीति से औद्योगिक निवेश बढ़ेगा, नए कारोबार स्थापित होंगे और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर तैयार होंगे.

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