उत्तराखंड में चर्चित अंकिता भंडारी केस में जारी सियासत के बीच पुलिस ने भी अपना पक्ष रखा है और पूरी तरह केस की पैरवी गंभीरता से करने का दावा किया है. इस संबंध में गुरूवार को एडीजी लॉ एंड आर्डर डॉ वी. मुरुगेशन ने देहरादून मुख्यालय पर प्रेसवार्ता में विस्तार से जानकारी दी.
डॉ मुरुगेशन ने बताया कि घटना के 24 घंटे के बीतर तीनों अभियुक्तों को गिरफ्तार कर लिया गया था. इस मामले में पुलिस ने तेज कार्रवाई की है. उन्होंने बताया कि इस मामले में एसआईती के गठन के साथ ही DIG स्तर की महिला अधिकारी को उसका अध्यक्ष बनाया, ताकि इस पूरे प्रकरण की गहन एवं प्रभावी जांच पूरी की जा सके.
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88 दिनों में जांच पूरी करने का दावा
एडीजी लॉ एंड आर्डर ने बताया कि एसआईटी ने प्रकरण की जांच के दौरान डिजिटल, तकनीकी, फॉरेंसिक एवं भौतिक साक्ष्यों का गहनता से संकलन किया. इसके अलावा अभियुक्तों से विस्तृत पूछताछ, फॉरेंसिक रिपोर्टों एवं गवाहों के बयानों सहित सभी महत्वपूर्ण साक्ष्यों का गहन विश्लेषण किया गया. एसआईटी ने 88 दिनों में जांच पूरी कर लगभग 500 पेज की चार्जशीट अदालत में दाखिल की.
पुलिस की पैरवी से तीनों को आजीवन कारावास की सजा मिली
डॉ. मुरुगेशन ने बताया कि उत्तराखंड शासन द्वारा प्रकरण की त्वरित सुनवाई एवं प्रभावी पैरवी सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक प्रयास किए गए. एसआईटी द्वारा संकलित ठोस साक्ष्यों और अभियोजन पक्ष की प्रभावी पैरवी के फलस्वरूप 30 मई 2025 को कोटद्वार स्थित अपर जिला एवं सत्र न्यायालय ने तीनों अभियुक्तों पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर एवं अंकित गुप्ता को दोषी करार देते हुए आजीवन कठोर कारावास की सजा सुनाई गई है. तीनों दोषी वर्तमान में जेल में बंद हैं और आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं.
उधर इस मामले में कांग्रेस लगातार बीजेपी सरकार को घेर रही है. आरोप लगाया है कि सरकार ने जानबूझकर उस तथाकथित VIP को बचाया है. जांच से पहले ही रिसोर्ट पर बुलडोजर क्यों चलाकर सुबूत नष्ट किए गए.
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