नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में अपना पहला भाषण दिया, जिसमें उन्होंने जलवायु से जुड़े खतरों से निपटने को लेकर एक प्रस्ताव रखा. इस दौरान वह अपने सिग्नेचर लुक यानी काला चश्मा और पारंपरिक नेपाली टोपी पहने नजर आए. सोशल मीडिया पर बालेन शाह के भाषण के साथ-साथ उनके लुक को लेकर भी चर्चा हो रही है. यहां उन्होंने हिमालयी क्षेत्र में जलवायु से जुड़े खतरों से निपटने के लिए क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करने के मकसद से नेपाल, भारत और चीन के नेतृत्व में टहिमालयन क्लाइमेट रेजिलिएंस मैकेनिज्म’ बनाने का प्रस्ताव रखा.
काठमांडू पोस्ट के अनुसार, पीएम बालेन शाह अपने धूप के चश्मे पहनने के समय और तरीके को लेकर बेहद सतर्क रहते हैं. वे संसद के सत्रों, सार्वजनिक समारोहों, सैन्य परेडों और विदेशी राजदूतों के साथ तस्वीरें खिंचवाते समय भी चश्मा पहने रहते हैं. मंत्रिमंडल की बैठकों या संयुक्त बैठकों के दौरान भी वह चश्मा नहीं लगाते हैं.
बालेन शाह अपने सनग्लास क्यों नहीं उतारते?
रैपर से नेता बने बालेन शाह अब नेपाल की राजनीति में एक बड़ा नाम बन चुके हैं. उनका सिग्नेचर स्टाइल काला सूट और डार्क सनग्लासेस म्यूजिक के दिनों से लेकर प्रधानमंत्री पद तक उनके साथ रहा है. उनकी इस खास पहचान का असर यह है कि नेपाल की एक लोकप्रिय शॉपिंग वेबसाइट पर ‘बालेन शाह ग्लासेस’ नाम से उनके स्टाइल के चश्मे बिकते हैं. 2022 में काठमांडू के मेयर चुनाव में एक निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में जीत हासिल करके उन्होंने देश के बड़े नेताओं को हैरान कर दिया था.
VIDEO | USA: Nepal PM Balendra Shah proposes Himalayan climate mechanism with India, China to share data, monitor glacier lakes at UNGA.
(Source: United Nations’ YouTube channel)#Himalayan #UNGA #UN pic.twitter.com/vN2q2FQ47R
— Press Trust of India (@PTI_News) September 25, 2026
इसके बाद, सितंबर 2025 में हुए युवा आंदोलन के बाद भी उन्होंने अपना यही अंदाज बनाए रखा और मार्च के आम चुनावों में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) की ऐतिहासिक जीत के साथ देश के प्रधानमंत्री बने। पद संभालने के बाद भी उनका यह चश्मा हटाने से इनकार करना उनकी अलग और बेबाक अंदाज को दर्शाता है.
कब-कब बालेन शाह ने अपना चश्मा उतारा
बालेन शाह अमूमन हमेशा सनग्लासेस पहने रखते हैं, लेकिन ऐसे तीन मौके आए हैं जब उन्होंने जनता से सीधे नजरें मिलाने के लिए अपना चश्मा उतारा. पहला- जुलाई में दक्षिणी नेपाल में हुई हिंसक हिंदू-मुस्लिम झड़पों के बाद जब उन्होंने जनता को संबोधित किया. दूसरा- अगस्त में जब वह बाढ़ से प्रभावित और तबाह हुए इलाकों का दौरा करने पहुंचे. तीसरा- एक खास मौके पर जब उन्होंने कुछ महीने पहले अपने समर्थकों से दिल की बात कहते हुए ‘आई लव यू’ कहा था.
हालांकि, संसद में जनता के बीच गलत संदेश न जाए, इसलिए अगस्त में स्पीकर ढोल प्रसाद अर्याल ने संसदीय कार्यवाही के दौरान काला चश्मा पहनने पर रोक लगा दी थी. रिपोर्ट के अनुसार, बालेन शाह के ऑफिस ने इसका बचाव करते हुए स्पष्ट किया कि डॉक्टर ने उन्हें तेज रोशनी से आंखों के बचाव के लिए मेडिकल एडवाइस के तहत यह चश्मा पहनने को कहा है.















