उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं. हालांकि चुनाव से पहले सपा में खींचतान लगातार नजर आ रही है. समाजवादी पार्टी पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के जरिए कार्यकर्ताओं को एकजुट करने और अपने जनाधार को मजबूत करने की कोशिश में जुटी है.
वहीं गाजीपुर में आयोजित पीडीए सम्मेलन में विवाद की खबर सामने आई. गाजीपुर के जखनिया विधानसभा क्षेत्र में आयोजित पीडीए महासम्मेलन के दौरान पार्टी के नेताओं के बीच कथित तकरार ने सपा की एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए.
सपा प्रदेश अध्यक्ष के सामने भिड़े नेता
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे सपा प्रदेश अध्यक्ष श्यामलाल पाल के सामने ही जिला अध्यक्ष गोपाल यादव और जखनिया विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष कमलेश यादव व भानु यादव के बीच मंच से नाम नहीं लिए जाने को लेकर विवाद हो गया. इस घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं.
नेताओं में नोकझोंक बनी चर्चा का विषय
सपा द्वारा जिस मंच से पीडीए की एकजुटता, सामाजिक न्याय और आगामी चुनाव में पार्टी को मजबूत करने का संदेश दिया जाना था. वहीं नेताओं के बीच कथित नोकझोंक चर्चा का विषय बन गई. विपक्षी दलों को भी सपा पर सवाल उठाने का मौका मिल सकता है.
अब सवाल यह है कि जब पार्टी के जिम्मेदार नेता सार्वजनिक मंच पर आपसी तालमेल नहीं दिखा पा रहे हैं, तो वे जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं को किस तरह एकजुट करेंगे? 2027 में सत्ता में वापसी का लक्ष्य लेकर चल रही सपा के लिए पीडीए सम्मेलन केवल भीड़ जुटाने का नहीं, बल्कि संगठन में समन्वय, कार्यकर्ताओं में जागरूकता और नेतृत्व के बीच भरोसा मजबूत करने का भी माध्यम है. चुनावी सफलता के लिए पार्टी को संदेश देना होगा कि व्यक्तिगत नाराजगी से ऊपर संगठन और जनता के मुद्दे हैं.
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