भारत के पड़ोसी देश बांग्लादेश के समुद्री बंदरगाहों पर कंट्रोल करने का मंसूबा बनाए चीन को बड़ा झटका लगा है. चीन बांग्लादेश के समुद्री बंदरगाहों पर कंट्रोल हासिल करके बंगाल की खाड़ी और उससे आगे अपने रणनीतिक हितों को बढ़ाने की योजना बनाए हुए था, लेकिन बांग्लादेश की सत्तारूढ़ बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने देश के पोर्ट्स के आधुनिकीकरण के लिए अन्य वैश्विक पोर्ट संचालकों को ठेके दे दिए हैं.
न्यूज एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रिकलैन न्यूज पोर्टल पर छपी रिपोर्ट में बताया गया कि फरवरी महीने में बांग्लादेश के पीएम बनने के कुछ महीने बाद जून में तारिक रहमान बीजिंग की यात्रा पर गए थे, जहां उन्होंने यह फैसला लिया था कि चीन बांग्लादेश के मोंगला पोर्ट का विकास करेगा. बंदरगाह की माल ढुलाई क्षमता बढ़ाने के लिए चीन की वित्तीय सहायता से एक परियोजना के तहत मोंगला पोर्ट पर आधुनिक मशीनों से लैस दो अत्याधुनिक कंटेनर जेटी का निर्माण किया जाना था.
PPP मॉडल के तहत चटगांव पोर्ट होगा काम
हालांकि, हाल में हुए घटनाक्रमों के मुताबिक, चटगांव पोर्ट अथॉरिटी ने डेनमार्क के मार्स्क ग्रुप के साथ 30 साल का समझौता किया है. दुनिया की प्रमुख टर्मिनल संचालक कंपनियों में शामिल मार्स्क ग्रुप इस समझौते के तहत पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत चटगांव पोर्ट पर लाडिया कंटेनर टर्मिनल की डिजाइनिंग, फंडिंग, निर्माण और संचालन करेगा.
हाल के सालों में ढाका की लगातार सरकारें बांग्लादेश के समुद्री बंदरगाहों के विकास के लिए अन्य विदेशी कंपनियों को शामिल करके चीन पर पूरी तरह निर्भर रहने से बचती रही हैं.
शेख हसीना सरकार ने भी चीन को पोर्ट बनाने की नहीं दी थी मंजूरी
रिपोर्ट के मुताबिक, जापान अंतरराष्ट्रीय सहयोग एजेंसी (JICA) के रियायती लोन से मातारबाड़ी पोर्ट के विकास और डेनमार्क के मार्स्क ग्रुप के साथ चटगांव में लाडिया कंटेनर टर्मिनल के विकास से जुड़े दोनों समझौतों पर 2025 में हस्ताक्षर किए गए थे, जब देश में अंतरिम सरकार सत्ता में थी.
वहीं, बांग्लादेश की पूर्व पीएम शेख हसीना ने भी देश की समुद्री परिसंपत्तियों के आसपास चीन की बढ़ती कमर्शियल और टेक्निकल मौजूदगी को लेकर भारत की चिंताओं पर ध्यान दिया था. भारत के नजदीक रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण स्थानों पर चीन की मौजूदगी बढ़ने की आशंकाओं को ध्यान में रखते हुए उन्होंने चीनी मदद से सोनादिया में गहरे समुद्री पोर्ट बनाने की मंजूरी देने से इनकार कर दिया था.
चटगांव पोर्ट पर चीन किन प्रोजेक्ट्स पर कर रही काम?
रिपोर्ट के मुताबिक, पतेंगा कंटेनर टर्मिनल चटगांव पोर्ट का पहला ऐसा टर्मिनल है, जिसका संचालन किसी विदेशी कंपनी की तरफ से किया जा रहा है. सऊदी अरब की कंपनी रेड सी गेटवे टर्मिनल इस टर्मिनल का संचालन कर रही है. इसे जून 2025 में ऑपरेशनल किया गया था.
वहीं, चीनी कंपनियां फिलहाल चटगांव पोर्ट पर बंदरगाह संबंधी मशीनों की आपूर्ति करने, आसपास इंडस्ट्रियल पार्क बनाने और आगामी टर्मिनल आधुनिकीकरण प्रोजेक्ट्स में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने की दिशा में काम कर रही हैं.
भारत को चारों तरफ से घेरने की चीन की कोशिश फेल
दरअसल, चीन के वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर नियंत्रण हासिल करने या भारत को चारों ओर से घेरने की अपनी ‘स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स’ रणनीति को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से हिंद महासागर इलाके में अपना वर्चस्व बढ़ाने के लिए सिर्फ मोंगला पोर्ट पर कंट्रोल पर्याप्त नहीं होगा.
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि ढाका सरकार का नजरिया ऐसा प्रतीत होता है कि वह बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था के निर्यात-आधारित इलाके को मजबूत करने के लिए चीनी निवेश को प्रोत्साहित करना चाहती है, लेकिन साथ ही चीन को देश के समुद्री बंदरगाहों का इस्तेमाल अपने रणनीतिक हितों को आगे बढ़ाने के लिए करने का मौका नहीं देना चाहती है.
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