झारखंड हाई कोर्ट ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर गुरुवार (1 अक्टूबर) को 10000 रुपये का जुर्माना लगाया क्योंकि उनके वकील ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अधिकारियों की याचिका पर स्थगन (Adjournment) का अनुरोध किया था. याचिका में, ईडी अधिकारियों ने 2024 में सीएम सोरेन के दिल्ली स्थित आवास पर ली गई तलाशी से जुड़े मामले में अपने खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही को चुनौती दी है.
धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) मामले में प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई के बाद हेमंत सोरेन की शिकायत पर 31 जनवरी 2024 को रांची के एससी/एसटी पुलिस थाने में एक प्राथमिकी दर्ज की गई थी.
मामले से जुड़ी और जानकारी
ईडी ने दिल्ली में हेमंत सोरेन के घर की तलाशी ली, जिसके बाद उन्होंने एजेंसी के अधिकारियों पर परेशान करने का आरोप लगाया और कहा कि उन्हें इसलिए निशाना बनाया जा रहा है कि वह आदिवासी समुदाय से हैं. इसके बाद अधिकारियों ने पुलिस थाने से जारी उस नोटिस को चुनौती दी, जिसमें उन्हें प्राथमिकी के सिलसिले में मामले के जांच अधिकारी (आईओ) के सामने पेश होने के लिए कहा गया था.
कोर्ट ने जारी किया था नोटिस
ईडी अधिकारी कपिल राज, देवव्रत झा, अनुपम कुमार और अमन पटेल की याचिका पर सुनवाई करते हुए, अदालत ने 4 मार्च 2024 को हेमंत सोरेन और राज्य सरकार को नोटिस जारी कर उनसे जवाब मांगा था. अदालत ने यह भी निर्देश दिया था कि मामले की सुनवाई के दौरान ईडी अधिकारियों के खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई न की जाए.
गुरुवार की कार्यवाही के दौरान, सोरेन के वकील ने स्थगन की मांग की. इस पर हाई कोर्ट ने कहा कि पहले भी कई बार स्थगन का अनुरोध किया जा चुका है और सोरेन को झारखंड राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण को 10,000 रुपये अदा करने का निर्देश दिया. इसके हाई कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 2 नवंबर की तारीख तय की.
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