देश के टॉप आईआईटी में छात्रों की मौत के मामले एक बार फिर चर्चा में है. आईआईटी बॉम्बे में 18 सितंबर को दूसरे वर्ष के छात्र साहिल वाकोडे की मौत के बाद कैंपस में छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया. इस घटना ने परीक्षा व्यवस्था, अनुशासनात्मक प्रक्रिया और छात्रों को मिलने वाली मानसिक स्वास्थ्य सहायता को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं. वहीं इससे पहले अगस्त में आईआईटी दिल्ली में एमएससी फिजिक्स के छात्र ऋषिकेश कुमार की मौत के बाद भी कैंपस में प्रदर्शन हुआ था.
देश के टॉप आईआईटी में बढ़ती मौत के मामलों ने लोगों के बीच चिंता बढ़ा दी है. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं कि देश के किस आईआईटी में सबसे ज्यादा छात्रों की मौत हुई है और 5 साल के आंकड़े क्या कहते हैं.
5 साल में इतने मौत के मामले हुए दर्ज
ग्लोबल आईआईटी एलुमनी सपोर्ट ग्रुप की ओर से जुटाए गए आंकड़ों के अनुसार, सितंबर 2021 से 18 सितंबर 2026 के बीच देश के आईआईटी कैंपस में आत्महत्या और दूसरी अप्राकृतिक मौतों के कुल 74 मामले दर्ज किए गए हैं. यह आंकड़ा आरटीआई से मिली जानकारी और मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर तैयार किया गया है. इसमें केवल आत्महत्या के मामले शामिल नहीं है, बल्कि दूसरी अप्राकृतिक मौत भी शामिल हैं.
IIT खड़गपुर में सबसे ज्यादा मामले
सितंबर 2021 से सितंबर 2026 के बीच आईआईटी खड़गपुर में 13 मौतें दर्ज की गई. इसके बाद आईआईटी कानपुर और आईआईटी दिल्ली में 9-9 मामले सामने आए हैं. आईआईटी मद्रास में 7, जबकि आईआईटी गुवाहाटी और आईआईटी बॉम्बे में 6-6 मामले दर्ज किए गए. आईआईटी वाराणसी में 5 और आईआईटी रुड़की तथा आईआईटी हैदराबाद में 4-4 मामले दर्ज हुए.
ये भी पढ़ें-असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा में 80% प्रश्न पुराने, उम्मीदवारों ने की जांच की मांग
IIT बॉम्बे में 2026 में तीन मौतें
आईआईटी बॉम्बे के मामले में 2026 विशेष रूप से चर्चा में है. आंकड़ों के अनुसार, इस साल संस्थान में 3 आत्महत्या या अप्राकृतिक मौतें दर्ज की गई है. सितंबर 2021 के बाद से आईआईटी बॉम्बे में दर्ज कुल 6 मामलों में से आधे इसी साल के हैं. 18 सितंबर को दूसरे वर्ष के एनर्जी साइंस एंड इंजीनियरिंग छात्र साहिल वाकोडे की मौत हुई. आईआईटी बॉम्बे के अनुसार, परीक्षा के दौरान वह मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते पाए गए थे और उन्होंने प्रश्न पत्र चैट जीपीटी पर अपलोड किया था.
संस्थान ने कहा कि उनके खिलाफ कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू नहीं की गई थी. घटना के बाद करीब 400 छात्रों ने कैंपस में विरोध प्रदर्शन किया. छात्रों ने परीक्षा प्रभारी, निदेशक और एक फैकल्टी सदस्य के इस्तीफे के साथ-साथ परीक्षा और दूसरे एकेडमी समितियों में छात्रों का प्रतिनिधित्व और अनुशासनात्मक नियमों की समीक्षा की मांग भी की.
आंकड़ों में बढ़ोतरी का दावा
ग्लोबल आईआईटी एलुमनी सपोर्ट ग्रुप के आंकड़ों के अनुसार सितंबर-दिसंबर 2021 के बीच तीन मामले दर्ज हुए थे. 2022, 2023 और 2024 में 14-14 मामले, 2025 में 16 और 1 जनवरी से 18 सितंबर 2026 तक 13 मामले दर्ज किए गए. 2021 और 2026 के आंकड़े पूरे साल के नहीं है. वहीं पिछले 20 सालों यानी जनवरी 2006 से सितंबर 2026 के बीच आईआईटी में आत्महत्या या दूसरे अप्राकृतिक मौतों से कम से कम 171 मामले दर्ज किए गए. इनमें से 2006 से 2015 के बीच 51 और 2016 से 2026 के बीच 120 मामले बताए गए हैं.
ये भी पढ़ें-UGC ने बदला नियम, अब MPT-MOT की डिग्री में होगा स्पेशलाइजेशन
Education Loan Information:
Calculate Education Loan EMI


















